SIR मामले में ममता की व्यक्तिगत उपस्थिति के खिलाफ शीर्ष अदालत में आवेदन दायर

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने राज्य में मतदाता सूची के एसआईआर के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की है.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की है
  • ममता ने उच्चतम न्यायालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थिति दर्ज कराते हुए हस्तक्षेप का आग्रह किया था
  • अखिल भारत हिंदू महासभा के पूर्व उपाध्यक्ष ने ममता की याचिका में हस्तक्षेप करने की अनुमति के लिए आवेदन किया
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।
नई दिल्ली:

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) मामले में उच्चतम न्यायालय में व्यक्तिगत उपस्थिति को ‘संवैधानिक रूप से अनुचित' और ‘कानूनी रूप से अस्वीकार्य' बताते हुए शीर्ष अदालत में एक आवेदन दायर किया गया है. बनर्जी चार फरवरी को उच्चतम न्यायालय में बहस करने वालीं पहली सेवारत मुख्यमंत्री बनीं. उन्होंने ‘लोकतंत्र को बचाने' के लिए मतदाता सूची के जारी एसआईआर में हस्तक्षेप करने का न्यायालय से आग्रह किया था, और आरोप लगाया था कि पश्चिम बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है और वहां के लोगों को कुचला जा रहा है.

सोमवार को होगी सुनवाई

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति एन वी अंजारिया की पीठ सोमवार को राज्य में जारी एसआईआर कवायद से संबंधित याचिकाओं के एक समूह पर सुनवाई करेगी, जिसमें ममता बनर्जी द्वारा दायर याचिका भी शामिल है. अखिल भारत हिंदू महासभा के पूर्व उपाध्यक्ष सतीश कुमार अग्रवाल द्वारा दायर आवेदन में बनर्जी द्वारा दायर याचिका में हस्तक्षेप करने की मांग की गई है.

ये भी पढ़ें : बंगाल में बेरोजगार युवाओं को प्रति माह मिलेंगे 1500 रुपए, चुनाव से पहले ममता का मास्टर स्ट्रोक

SIR को लेकर याचिका दायर

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने राज्य में मतदाता सूची के एसआईआर के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की है. आवेदन में कहा गया है कि याचिकाकर्ता द्वारा दायर की गई उपरोक्त रिट याचिका का विषय कोई व्यक्तिगत या निजी विवाद नहीं है, बल्कि यह राज्य प्रशासन और भारत के संविधान तथा लागू चुनाव कानूनों के अनुसार मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) करने में भारत निर्वाचन आयोग द्वारा शक्तियों के संवैधानिक प्रयोग से संबंधित है.

ये भी पढ़ें : CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आएगा महाभियोग? समझिए- क्यों विपक्ष के लिए ये हारी हुई लड़ाई लड़ने जैसा है!

आवेदन में क्या कुछ कहा

इसमें यह भी कहा गया है कि उठाए गए मुद्दे पश्चिम बंगाल की संस्थागत कार्यप्रणाली और निर्वाचन आयोग के साथ उसके संवैधानिक संबंधों को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं. आवेदन में कहा गया है, ‘‘ऐसी परिस्थितियों में याचिकाकर्ता, जो कि वर्तमान मुख्यमंत्री हैं, व्यक्तिगत हैसियत से उपस्थित होने का दावा नहीं कर सकती हैं, और इस न्यायालय के समक्ष कोई भी प्रतिनिधित्व अनिवार्य रूप से पश्चिम बंगाल राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले विधिवत नियुक्त अधिवक्ताओं के माध्यम से ही होना चाहिए.''
 

Advertisement
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
Featured Video Of The Day
Bangladesh Hindus Attacked: बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार, RSS Chief क्या बोले? | Syed Suhail