अमायरा तो चली गई लेकिन उसे इंसाफ तब मिलेगा जब स्कूलों की दीवारों में दिल धड़केगा, CBSE जांच में डरावने खुलासे

अमायरा की खुदकुशी के बाद CBSE ने मामले की जांच की. जिसमें पता चला कि घटना वाले दिन अमायरा ने 5 बार मदद मांगी थी. वो 18 महीने से स्कूल प्रबंधन से मदद मांग रही थी. लेकिन उसे सही समय पर मदद नहीं मिली.

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मां के साथ अमायरा की पुरानी तस्वीर. अमायरा ने बीते दिनों जयपुर के एक स्कूल में छलांग लगाकर जान दे दी.
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  • जयपुर की अमायरा के खुदकुशी मामले में CBSE ने स्कूल की मान्यता रद्द कर दी है. रिपोर्ट में कई खुलासे हुए हैं.
  • CBSE की जांच में पता चला कि अमायरा को 18 महीने से बुलिंग और मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा था.
  • अमायरा ने घटना वाले दिन 5 बार अपनी क्लास टीचर से मदद मांगी थी, लेकिन उसे डांटकर असहाय छोड़ दिया गया.
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जयपुर:

Amyra Suicide Case Jaipur: जयपुर की 9 साल की बच्ची अमायरा ने स्कूल की चौथी मंजिल से कूद कर जान दे दी थी. अमायरा के इस आत्मघाती कदम की CBSE ने डिटेल जांच की है. जिससे डरावने वाले खुलासे हुए है. जांच के आधार पर जयपुर ने नीरजा मोदी स्कूल की मान्यता तो रद्द कर दी गई. लेकिन इतना तय है कि अमायरा को इंसाफ तब मिलेगा, जब स्कूलों की दीवारों में दिल धड़केगा. वहां पढ़ने वाले बच्चों की बात सुनी जाएगी. उसे सही रास्ता दिखाया जाएगा. उसकी परेशानी को समय रहते दूर करने की कोशिश की जाएगी. नहीं तो जयपुर की अमायरा, दिल्ली के शौर्य पाटिल जैसे और भी कई मासूम स्कूल प्रबंधन की बेदिली से अपना अनमोल जीवन गंवाते रहेंगे. 

दरअसल अमायरा की खुदकुशी के बाद CBSE ने मामले की जांच की. जिसमें पता चला कि घटना वाले दिन अमायरा ने 5 बार मदद मांगी थी. वो 18 महीने से स्कूल प्रबंधन से मदद मांग रही थी. लेकिन उसे सही समय पर मदद नहीं मिली. अब नीरजा स्कूल की मान्यता तो रद्द हुई लेकिन कई सवाल छोड़ गई.

1 नवंबर को अमायरा ने स्कूल की चौथी मंजिल से लगाई थी छलांग

1 नवंबर 2025 की दोपहर जयपुर के प्रतिष्ठित नीरजा मोदी स्कूल में कक्षा चार की छात्रा अमायरा ने चौथी मंजिल से छलांग लगा दी. नौ साल की बच्ची की मौके पर ही मौत हो गई. इस घटना ने न सिर्फ एक परिवार को तोड़ दिया बल्कि स्कूल सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए.

  • अब करीब दो महीने बाद सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) ने नीरजा मोदी स्कूल की मान्यता रद्द कर दी. यह फैसला पीड़ित परिवार के ज़ख्मों पर कुछ हद तक मरहम है लेकिन ये घाव ऐसे हैं जो जीवन भर नहीं भर पाएंगे.
  • दरअसल ये दर्दनाक कहानी एक स्कूली तंत्र में मशीनी हो चुके सिस्टम की है. ये कहानी स्कूल में बच्चों के इमोशन की अनदेखी की है. ये कहानी इतने बड़े हादसे के बाद अपनी ज़िम्मेदारी से पीछे हटने की है. 
  • ये कहानी पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े करने की है और यह कहानी बताती है कि कैसे आधुनिक शिक्षा के नाम पर बड़ी फ़ीस वसूलने वाले संस्थान बच्चों की सुरक्षा को लेकर लापरवाह हो सकते हैं.

18 महीने की खामोश यातना

CBSE की जांच रिपोर्ट के मुताबिक अमायरा पिछले करीब 18 महीनों से स्कूल में बुलिंग और मानसिक उत्पीड़न का सामना कर रही थी. रिपोर्ट में कहा गया है कि उसे बार बार साथी स्टूडेंट्स की ओर से चिढ़ाया गया अपमानित किया गया और उस पर टिप्पणियां की गईं.

माता-पिता का आरोप है कि उन्होंने कई बार स्कूल प्रशासन को शिकायतें दीं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. न तो काउंसलिंग कराई गई और न ही किसी तरह की सुरक्षा या मनोवैज्ञानिक मदद दी गई.

अक्टूबर में अमायरा का व्यवहार बदलने लगा. वह स्कूल जाने से मना करने लगी. NDTV से बातचीत में परिजनों ने मां और अमायरा के बीच हुई बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग सामने आई, जिसमें अमायरा रोते हुए स्कूल न जाने की बात कह रही थी. 

यह भी पढ़ें - जयपुर के नामी स्कूल से कूदने वाली अमायरा ने रोते हुए कहा था- प्लीज मुझे मत भेजो, मां ने सुनाया ऑडियो

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1 नवंबर 2025: (घटना का दिन) सुबह अमायरा ने मां से कहा कि वह स्कूल नहीं जाना चाहती. मां ने भरोसा दिलाया कि वह स्कूल में बात करेंगी और बच्ची को स्कूल भेज दिया गया. 

क्लास में आखिरी 45 मिनट- CBSE की रिपोर्ट के मुताबिक, अमायरा ने घटना से पहले 45 मिनट में पांच बार अपनी क्लास टीचर से मदद मांगी. रिपोर्ट में कहा गया है कि टीचर ने बच्ची की मदद करने के बजाय उसे पूरी क्लास के सामने डांटा. उसे स्कूल काउंसलर के पास भी नहीं भेजा गया. खुद को अकेला महसूस कर रही अमायरा अपनी क्लास छोड़कर चौथी मंजिल पर गई और वहां से कूद गई.

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अस्पताल ले जाने पर डॉक्टर ने उसे मृत घोषित किया. परिवार का आरोप है कि घटनास्थल को जल्द साफ कर दिया गया. खून के धब्बे हटा दिए गए और सबूत मिटाने की कोशिश की गई. CBSE की रिपोर्ट में भी कहा गया है कि सबूतों से छेड़छाड़ होने की संभावना है.

2 नवंबर 2025: पुलिस जांच और FIR

जयपुर की मानसरोवर थाना में FIR दर्ज की गई. परिजनों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने भी सबूत इकट्ठा करने में देरी की जैसे बच्ची का बैग 9 दिन बाद कस्टडी में लिया गया. परिवार का आरोप था कि पुलिस स्कूल प्रबंधन को बचाने की कोशिश कर रही थी.स्कूल प्रशासन की तरफ़ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया. शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने परिवार को इंसाफ़ दिलाने की बात कही.

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3 नवंबर 2025– शिक्षा विभाग की टीम ने सुरक्षा मानकों में कमी पाई

शिक्षा मंत्री मदन दिलावर का विदेशों पर गठित शिक्षा विभाग की टीम ने स्कूल का औचक निरीक्षण किया. निरीक्षण में पाया गया कि छात्रों ने आईडी कार्ड नहीं पहने थे. स्कूल में सुरक्षा समिति मौजूद नहीं थी. टीचर्स को एंटी-बुलिंग नियमों की ट्रेनिंग नहीं दी गई.सुरक्षा मानकों में कमी पाई गई. CBSE की टीम ने भी स्कूल का विज़िट किया पुलिस ने इस मामले में स्कूल के स्टाफ़ और पीड़ित परिवार के बयान दर्ज किए. 

NDTV के सवाल पर स्कूल मालिक पूर्व विधायक-सांसद ने साधी चुप्पी

अमायरा के इंसाफ़ की माँग को लेकर स्कूल के बाहर मशाल जुलूस निकाला गया नागरिकों ने विरोध प्रदर्शन भी किए. लेकिन स्कूल के दरवाज़े बंद कर दिए गए थे. बच्चों की छुट्टी कर दी गई थी. स्कूल की तरफ से कोई भी मीडिया के सामने आकर बात करने के लिए तैयार नहीं था. NDTV ने जब स्कूल के मालिक पूर्व विधायक और पूर्व सांसद विष्णु मोदी से फोन पर बात की तो उन्होंने कहा कि इस मामले में उनकी लीगल टीम ही बात करेगी. लेकिन लीगल टीम भी कैमरे के सामने नहीं आई. 

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बाद में जयपुर के मुख्य चौराहों और बस स्टॉप्स पर शिक्षा मंत्री के ‘लापता' पोस्टर लगाए गए. प्रदर्शनकारियों का कहना था कि इतने बड़े मामले पर सरकार और मंत्री चुप क्यों हैं? अमायरा के परिवार और अभिभावकों ने मोमबत्ती जलाकर धरने पर बैठकर विरोध जताया. #JusticeForAmayra हैशटैग के जरिए लोग स्कूल प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं.

12 नवंबर 2025: CBSE की दो सदस्यीय टीम ने अमायरा के माता-पिता से मुलाकात की. परिजन ने बताया कि बच्ची लगातार स्कूल में परेशान होने की बात कहती थी. टीम को सीसीटीवी फुटेज भी दिखाई गई, जिसमें बच्ची घटना से पहले टीचर से मदद मांगती नजर आई. इसके बाद 20 नवंबर 2025 कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. 

नोटिस में बच्चों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े नियमों के उल्लंघन की बात कही गई. घटना के करीब 50 दिन बाद स्कूल प्रशासन ने दो शिक्षकों को निलंबित किया. इस देरी पर अभिभावकों और समाज में सवाल उठे.

30 दिसंबर 2025 स्कूल की मान्यता रद्द

CBSE ने नीरजा मोदी स्कूल की मान्यता रद्द कर दी. बोर्ड ने लिखा कि बच्चों की सुरक्षा से किसी भी हालत में समझौता नहीं किया जाएगा. अमायरा की मौत सिर्फ एक बच्ची की मौत नहीं है. यह सिस्टम की संवेदनशीलता की मौत है. यह केस पूरे शिक्षा तंत्र और अभिभावकों के लिए नजीर है कि बच्चों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना कितना जरूरी है.

अब राजस्थान का शिक्षा विभाग भी कर सकता है कार्रवाई

राजस्थान का शिक्षा विभाग भी स्कूल पर कार्रवाई कर सकता है. जानकारी के मुताबिक शिक्षा विभाग नीरजा मोदी स्कूल के जवाब से संतुष्ट नहीं है. विभाग ने स्कूल को अपना पक्ष रखने के लिए 6 जनवरी को मौका दिया है. 6 जनवरी को स्कूल को विभाग के समक्ष अपना पक्ष रखना होगा.

शिक्षा विभाग ने स्कूल को 17 दिसंबर को नोटिस जारी किया था. इस नोटिस का जवाब सा दिन के भीतर देना था. जानकारी के मुताबिक अब शिक्षा विभाग ने स्कूल का जवाब रिव्यू कर लिया है. विभाग इस जवाब से असंतुष्ट है. 

शिक्षा विभाग की ओर से जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक रामनिवास शर्मा ने एक जांच रिपोर्ट तैयार की थी. इस जांच रिपोर्ट में स्कूल में कई खामियां पाई गई थी. स्कूल में किसी भी मंजिल पर नेट और सुरक्षा जालियों का ना होना. सीढ़ियों पर किसी भी गार्ड या सहायिका का बच्चों की मदद के लिए और निगरानी के लिए ना होना. साथ ही सीसीटीवी कैमरा की कमी जैसी कमियां पाई गई थी. 

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