बंगाल के बाद मिशन पंजाब में जुटेंगे गृह मंत्री अमित शाह, हर महीने करेंगे यात्रा, जान लीजिए बीजेपी का प्लान

Amit Shah Punjab News: गृह मंत्री अमित शाह बंगाल के बाद अब मिशन पंजाब में जुटने वाले हैं. मई से हर महीने अब वो पंजाब दौरे पर रहेंगे. गौरतलब है कि 2027 के फरवरी में पंजाब में विधानसभा चुनाव होने हैं.

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अब मिशन पंजाब में जुटेंगे गृह मंत्री अमित शाह
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  • गृह मंत्री अमित शाह बंगाल के बाद अब मिशन पंजाब में जुटने वाले हैं
  • राज्य के विधानसभा चुनाव तक शाह हर महीने पंजाब दौरे पर जाएंगे
  • गौरतलब है कि पंजाब में अगले साल फरवरी महीने में चुनाव होने हैं
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नई दिल्ली:

पश्चिम बंगाल में पचास से अधिक रैलियां और रोड शो, करीब पंद्रह दिनों के प्रवास के बाद दिल्ली आते ही गृह मंत्री अमित शाह ने अब मिशन पंजाब की तैयारी शुरू कर दी है. वे अब अगले साल फरवरी में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव तक हर महीने राज्य का दौरा करेंगे.
 

अब पंजाब पर ध्यान 

सूत्रों के अनुसार पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव समाप्त होते ही गृह मंत्री अमित शाह ने अब पंजाब पर पूरा ध्यान केंद्रित करने का फैसला किया है. पंजाब में अगले साल फरवरी में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर के साथ विधानसभा चुनाव होने हैं. बाकी चार राज्यों में बीजेपी की सरकारें हैं लेकिन पंजाब में बीजेपी अपनी जमीन मजबूत करने के रास्ते तलाश रही है. यही कारण है कि बीजेपी के चाणक्य शाह ने अब पंजाब पर फोकस करने का फैसला किया है.
 

मई से मिशन पंजाब होगा शुरू 

सूत्रों के अनुसार अमित शाह का मिशन पंजाब मई महीने से शुरू हो जाएगा. वे मई में राज्य का दौरा करेंगे. इस दौरान ड्रग्स के खिलाफ राज्य भर में बीजेपी की यात्राओं की शुरुआत भी की जाएगी. ड्रग्स को एक बड़ा मुद्दा बनाते हुए बीजेपी ने राज्य भर में इसके खिलाफ जनजागरुकता अभियान चलाने का फैसला किया है. एक बीजेपी नेता के अनुसार बीजेपी पंजाब के साथ पूरे देश में ड्रग्स के खिलाफ युद्ध छेड़ रही है और इसकी शुरुआत पंजाब से ही की जाएगी.
 

ड्रग्स के खिलाफ बीजेपी निकालेगी यात्रा 

गौरतलब है कि शाह लंबे समय से पंजाब में ड्रग्स के खिलाफ यात्रा निकालने की योजना पर काम कर रहे हैं. 2016 में बीजेपी अकाली गठबंधन सरकार के समय भी बतौर पार्टी अध्यक्ष उन्होंने यह यात्रा निकालने का फैसला किया था लेकिन तब अंदरूनी कारणों से इस फैसले को टाल दिया गया था. अब एक बार फिर शाह ड्रग्स को बड़ा मुद्दा बनाते हुए राज्य की आम आदमी पार्टी सरकार को इस मुद्दे पर घेरेंगे. 2022 में आप ने ड्रग्स को विधानसभा चुनाव में एक बड़ा मुद्दा बनाया था और उसकी जीत के पीछे इसे भी एक बड़ा कारण माना गया था. लेकिन विपक्षी दलों का आरोप है कि आप सरकार इस मोर्चे पर नाकाम रही है.
 

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आप की टूट से बीजेपी को मिलेगा फायदा?

आम आदमी पार्टी के सात राज्य सभा सांसदों के साथ आने से भी बीजेपी के मिशन पंजाब को मदद मिली है. खासतौर से राघव चड्ढा और संदीप पाठक आप की अंदरूनी जानकारी अब बीजेपी तक पहुंचाएंगे. हालांकि बीजेपी नेताओं के अनुसार एंटी इंकबेंसी का सामना कर रहे आम आदमी पार्टी के विधायकों को साथ लेने की फिलहाल कोई योजना नहीं है. कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल से कुछ नेताओं के बीजेपी में आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.
 

अकेले चुनावी मैदान में उतरेगी बीजेपी 

बीजेपी ने पंजाब में अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है. पार्टी अपने पुराने सहयोगी शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन नहीं करेगी. बीजेपी का मानना है कि राज्य में उसके विस्तार की गुंजाइश है. शाह ने इस साल मार्च में मोगा में बदलाव रैली के माध्यम से बीजेपी के चुनावी अभियान का श्रीगणेश कर दिया है. उन्होंने लोगों को याद दिलाया था कि 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को पंजाब में 19 प्रतिशत वोट मिले थे. उन्होंने कहा था कि बीजेपी का यह रिकॉर्ड रहा है कि जिस राज्य में भी उसे 19 प्रतिशत वोट मिले, उसने बाद में उस राज्य में सरकार बनाई. जैसे कि ओडिशा, मणिपुर, असम, त्रिपुरा और उत्तराखंड.

गौरतलब है कि 2024 लोक सभा चुनाव में बीजेपी को पंजाब में 18.56 प्रतिशत वोट मिले थे. यह 2019 के 9.63 प्रतिशत के मुकाबले करीब दोगुना था. इसके बावजूद बीजेपी कोई लोकसभा सीट नहीं जीत सकी थी. बीजेपी ने जालंधर, लुधियाना और पटियाला जैसी शहरी सीटों पर मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई थी. उसे राज्य की 117 में से 23 विधानसभा सीटों पर बढ़त मिली थी. 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी का प्रदर्शन निराशाजनक रहा था. आम आदमी पार्टी की आंधी में बीजेपी केवल दो सीटें पठानकोट और सुजानपुर ही जीत सकी थी. उसे मात्र 6.6 प्रतिशत वोट मिले थे.
 

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बीजेपी का दावा, जमीनी हालत बदल गए हैं 

हालांकि बीजेपी नेताओं का कहना है कि अब जमीनी हालात बदले हैं. आम आदमी पार्टी सरकार अपने वादे पूरे नहीं कर सकी. लोगों में उसके प्रति निराशा है. कांग्रेस अंदरूनी गुटबाजी से जुझ रही है. वहीं सरदार प्रकाश सिंह बादल के देहांत के बाद शिरोमणि अकाली दल अंतर्विरोधों का सामना कर रही है. ऐसे में बीजेपी एक सशक्त विकल्प के रूप में उभर सकती है. सीमाई प्रदेश होने के कारण राज्य की सुरक्षा व्यवस्था एक संवेदनशील विषय रहा है. ऐसे में डबल इंजन की सरकार पंजाब को तरक्की के रास्ते पर ला सकती है. बीजेपी इन्हीं मुद्दों को लेकर गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में आगे बढ़ेगी.
 

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