मिडिल ईस्ट में तनाव और तेल संकट के बीच देश में पेट्रोल-डीज़ल की बिक्री कितनी बढ़ी, इंडियन ऑयल ने बताया

सुजाता शमा ने कहा कि कुछ जगहों पर पैनिक बाइंग की खबर है.बुधवार को IRGC के सैनिकों के हमले के बाद बढ़ती अनिश्चितता की वजह से गुरुवार को Brent Oil Futures की कीमत बढ़कर US$ 100 प्रति बैरल के पार पहुंच गया.

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पेट्रोल और डीजल के क्यों नहीं बढ़े दाम - सरकार ने बता दिया
NDTV

मध्यपूर्व एशिया मैं युद्ध और स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज बाधित होने की वजह से अंतराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई बाधित हो रही है. इसकी वजह से भारत समेत दुनियाभर के देशों मैं कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हो रही है.इस बढ़ते संकट के बीच इंडियन ऑयल के मुताबिक इस साल 1 अप्रैल से 21 अप्रैल 2026 के दौरान देश में पेट्रोल और डीजल की बिक्री 13% से ज़्यादा बढ़ गयी है.  इंडियन ऑयल ने गुरुवार को एक बयान जारी कर कहा कि 1 अप्रैल से 21 अप्रैल 2026 के दौरान, रिटेल आउटलेट्स के माध्यम से पेट्रोल (MS) और डीज़ल (HSD) की बिक्री में 13% से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। इस बढ़ी हुई मांग को हमारे 42,000 से अधिक फ्यूल स्टेशनों के विशाल वितरण नेटवर्क के माध्यम से कुशलतापूर्वक पूरा किया गया है.

उधर, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर विधान सभा चुनावों के बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी की संभावना को लेकर जारी अटकलों पर पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव, सुजाता शर्मा ने गुरुवार को कहा कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है. इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल और एलपीजी की कीमतों में उथल-पुथल के बावजूद भारत सरकार ने कीमतें नहीं बढ़ाई है. बढ़ी हुई कीमतों को अब्जॉर्ब करने के लिए भारत सरकार एक्साइज ड्यूटी घटने का फैसला पहले ही कर चुकी है.

सुजाता शमा ने कहा कि कुछ जगहों पर पैनिक बाइंग की खबर है.बुधवार को IRGC के सैनिकों के हमले के बाद बढ़ती अनिश्चितता की वजह से गुरुवार को Brent Oil Futures की कीमत बढ़कर US$ 100 प्रति बैरल के पार पहुंच गया.सामरिक तौर पर महत्वपूर्ण इस समुद्री मार्गे से ऑयल कार्गो जहाज़ों की आवाजाही बाधित होने से अंतराष्ट्रीय एनर्जी मार्किट में करीब 20% कच्चे तेल की सप्लाई बाधित हो रही है, जिस वजह से उनकी कीमतें ऊँचे स्तर पर पहुँच गयी हैं.

भारत अपनी ज़रुरत का 85% से ज़्यादा कच्चा तेल अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार से आयात करता है. ऐसे में कच्चे तेल के और महंगा होने से तेल आयात का खर्च बढ़ता जा रहा है.पेट्रोलियम मंत्रालय की Petroleum Planning and Analysis Cell (PPAC) की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक मध्यपूर्व एशिया में जारी अनिश्चितता की वजह से 21 अप्रैल, 2026 को कच्चे तेल (भारतीय बास्केट) की कीमत US$ 102.46/बैरल के ऊँचे स्तर पर बनी रही.

सरकारी आकड़ों के मुताबिक, युद्ध शुरू होने से पहले फरवरी, 2026 में कच्चे तेल (भारतीय बास्केट) की औसत कीमत 69.01 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल थी।यानी, मध्यपूर्व युद्ध एशिया में जारी अनिश्चितता की वजह से कच्चा तेल फरवरी, 2026 की औसत कीमत के मुकाबले 21 अप्रैल, 2026 को 33.45 डॉलर प्रति बैरल महंगा हुआ, यानि 48.47% की बड़ी बढ़ोतरी. अप्रैल 2026 महीने के दौरान कच्चे तेल की औसत कीमत 21 अप्रैल तक 115.8 डॉलर प्रति बैरल बनी हुई है. मार्च, 2026 महीने के दौरान भी कच्चे तेल की औसत कीमत 113 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थी.

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