मध्यपूर्व एशिया में कई हफ्ते तक चले युद्ध और स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ के ज़रिये ऑयल और गैस टैंकरों की आवाजाही को लेकर जारी अनिश्चितता के बीच फर्टिलाइजर प्लांट्स में गैस सप्लाई मुहैया कराने की कवायद में जुटी भारत सरकार ने स्पष्ट किया है की खरीफ सीजन 2026 के दौरान देश में सभी प्रमुख उर्वरकों की उपलब्धता आवश्यकता से अधिक है. भारत सरकार के केमिकल और फ़र्टिलाइज़र मंत्रालय ने गुरुवार को आंकड़े जारी करते हुए कहाखरीफ 2026 सीजन के लिए उर्वरक आवश्यकता का आंकलन 390.54 LMT किया गया है, जबकि आज तक यह स्टॉक लगभग 193.38 LMT (लगभग 50%) है, जो लगभग 33% के सामान्य स्तर से काफी अधिक है. यह सरकार की बेहतर योजना, अग्रिम स्टॉकिंग और कुशल लॉजिस्टिक्स प्रबंधन को दर्शाता है.
साथ ही, यूरिया और DAP की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है. देश में यूरिया, DAP, NPKs और SSP जैसे उर्वरकों की उपलब्धता भी पिछले साल के मुकाबले 30 अप्रैल, 2026 तक ज़्यादा है.खाड़ी क्षेत्र उर्वरक आयात का एक प्रमुख स्रोत है. यूरिया का 20-30 प्रतिशत और डीएपी का 30 प्रतिशत आयात इसी क्षेत्र से होता है. भारत के एलएनजी आयात का लगभग 50 प्रतिशत भी यहीं से आता है, जो यूरिया उत्पादन के लिए एक प्रमुख कच्चा माल है.
उर्वरक विभाग के मुताबिक, मध्यपूर्व एशिया में संकट के बाद उर्वरकों की उपलब्धता में 78 एलएमटी की बढ़ोतरी की गई है. अप्रैल 2026 के दौरान यूरिया का उत्पादन करीब 21 एलएमटी रहा है, जो अप्रैल 2025 में 21.89 एलएमटी रहा था.देश में यूरिया की उपलब्धता जरूरत के मुताबिक बहाल रखने के लिए सरकार ने मध्यपूर्व एशिया में युद्ध शुरू होने से पहले ही ग्लोबल टेंडर जारी कर दिया था. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक फरवरी के मध्य तक साढे 13 लाख टन Urea के आयात के लिए आर्डर जारी कर दिए गए थे.
ताज़ा आकड़ों के मुताबिक, ग्लोबल यूरिया टेंडर के ज़रिये भारत ने पिछले दो महीनों में (अप्रैल के अंत तक) कुल 38.07 एलएमटी यूरिया की सप्लाई सुनिश्चित की है. केमिकल और फर्टिलाइजर मंत्रालय के मुताबिक, रूस, मोरक्को और सऊदी अरब से बड़ी मात्रा में फर्टिलाइजर स्टॉक का आयात किया गया है.इस बार गैस की सप्लाई में कमी की वजह से यूरिया प्लांट का एनुअल मेंटिनेस समय से पहले किया गया, जिससे मौजूद गैस के स्टॉक का बेहतर इस्तेमाल यूरिया के प्रोडक्शन के लिए किया जा सके.
देश के 652 जिलों में उर्वरक की बिक्री की कड़ी निगरानी की जा रही है, और कहीं भी ब्लैक मार्केटिंग ना हो इसके लिए कारगर व्यवस्था बहस की गई है. कृषि मंत्रालय के मुताबिक, खरीफ सीजन के दौरान यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि किसी भी स्तर पर कृषि इनपुट और रसायनों की कोई कमी न हो. कृषि उत्पादों की कीमतें स्थिर हैं और उन पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है.














