अजित पवार का अधूरा 'मिशन महाराष्ट्र': 12वें बजट से लेकर स्थानीय चुनावों तक, क्या-क्या रह गया अधूरा?

अजित पवार के पास केवल वित्त विभाग ही नहीं, बल्कि नियोजन और आबकारी जैसे महत्वपूर्ण पोर्टफोलियो भी थे.उनके एजेंडे पर कई ऐसे काम थे जो महाराष्ट्र की सूरत बदलने वाले थे. 

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अजित पवार के कई काम रह गए अधूरे
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  • अजित पवार महाराष्ट्र के सबसे अनुभवी वित्त मंत्रियों में से एक थे और अपना बारहवां बजट पेश करने वाले थे
  • उनके कार्यकाल में राज्य ने विदेशी निवेश के मामले में देश में शीर्ष स्थान हासिल किया था
  • अजित पवार के पास वित्त के अलावा नियोजन और आबकारी जैसे महत्वपूर्ण विभाग भी थे जिनके कई बड़े काम अधूरे थे
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मुंबई:

अजित पवार का अचानक जाना न केवल एक राजनीतिक शून्यता छोड़ गया है, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था और प्रशासन के उन पहियों को भी थाम गया है जो उनकी रफ्तार से चल रहे थे. अजित पवार महाराष्ट्र के इतिहास में सबसे अनुभवी वित्त मंत्रियों में से एक थे.वे जल्द ही अपना 12वां बजट पेश करने की तैयारी में थे.यदि वे ऐसा करते, तो वे महाराष्ट्र के पूर्व वित्त मंत्री शेषराव वानखेड़े के सर्वाधिक बजट पेश करने के रिकॉर्ड के बेहद करीब आ जाते.

यदि अजित पवार अपना 12वां बजट पेश करने में सफल रहते, तो शेषराव वानखेड़े के 13 बजटों के रिकॉर्ड के बेहद करीब पहुंचकर वे राज्य के सबसे अनुभवी 'अर्थशास्त्री राजनेता' के रूप में अपनी स्थिति और मजबूत कर लेते. उनके बजट में अक्सर कठोर वित्तीय अनुशासन और जनकल्याणकारी योजनाओं का जो संतुलन दिखता रहा. वह संभवतः इस बार भी बुनियादी ढांचे के बड़े निवेश और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने वाले प्रावधानों के रूप में सामने आता.एक कुशल प्रशासक के रूप में उनकी साख और बढ़ती, क्योंकि वे कठिन आर्थिक परिस्थितियों में भी राज्य के विकास दर को स्थिर रखने और भविष्य की बड़ी परियोजनाओं के लिए धन जुटाने की कला में माहिर माने जाते रहे.

बतौर वित्त मंत्री, उनके नाम सबसे कम समय में बजट भाषण पढ़ने और राज्य के वित्तीय घाटे को नियंत्रित रखते हुए रिकॉर्ड आवंटन करने का श्रेय दर्ज है. उनके कार्यकाल में महाराष्ट्र ने FDI विदेशी निवेश के मामले में देश में अपना शीर्ष स्थान फिर से हासिल किया.

लंबित काम और बड़ी सरकारी ज़िम्मेदारियां

अजित पवार के पास केवल वित्त विभाग ही नहीं, बल्कि नियोजन और आबकारी जैसे महत्वपूर्ण पोर्टफोलियो भी थे.उनके एजेंडे पर कई ऐसे काम थे जो महाराष्ट्र की सूरत बदलने वाले थे. 

माझी लाडकी बहिन योजना का विस्तार

इस फ्लैगशिप योजना के लाभार्थियों को ₹1500 से बढ़ाकर ₹2100 प्रति माह देने का प्रस्ताव उनके टेबल पर था.

पुणे-नाशिक हाई-स्पीड रेल

इस प्रोजेक्ट के लिए फंड जुटाने और ज़मीन अधिग्रहण की प्रक्रियाओं को वे व्यक्तिगत रूप से मॉनिटर कर रहे थे.

GST रिफंड का मुद्दा 

केंद्र सरकार से महाराष्ट्र के हिस्से का बकाया जीएसटी फंड वापस लाने के लिए वे लगातार समन्वय कर रहे थे.

नई सौर ऊर्जा नीति 

राज्य के किसानों को दिन में बिजली देने के लिए 'मुख्यमंत्री सौर कृषि वाहिनी योजना 2.0' को पूरे राज्य में लागू करना उनका सपना था.

'ग्राउंड ज़ीरो' की तैयारी: ज़िला परिषद और पंचायत समिति चुनाव

5 फरवरी 2026 को होने वाले स्थानीय निकाय चुनावों के लिए अजित पवार ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी.महायुती (NCP-BJP-Shiv Sena) के भीतर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी अजित गुट के लिए पुणे, नासिक, रायगढ़ और बीड जैसे गढ़ों में अधिकतम सीटें जीतना उनका प्राथमिक लक्ष्य था.

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उन्होंने हाल ही में ज़िला परिषदों के लिए विशेष विकास निधि जारी की थी, ताकि ग्रामीण स्तर पर सड़कों और पानी की समस्याओं को सुलझाकर चुनाव में उतरा जा सके.बारामती और आसपास के क्षेत्रों में उन्होंने बुथ लेवल पर कमेटियाँ गठित की थीं, जो सीधे उनके संपर्क में रहती थीं. अजित पवार का जाना महाराष्ट्र सरकार के लिए एक बड़ा पॉलिसी शॉक भी है.बजट की तैयारी, चुनाव की रणनीति और करोड़ों लाभार्थियों की योजनाओं का क्रियान्वयन अब उनके बिना एक बड़ी चुनौती होगी.

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