अजित पवार के बाद अब NCP का क्या होगा? शरद पवार की क्या है सबसे बड़ी चिंता

अजित पवार शरद पवार के भतीजे हुए और सुप्रिया सुले और अजित पवार चचेरे भाई बहन.यही नहीं पवार परिवार में तीसरी पीढ़ी भी राजनीति में आ चुकी है.शरद पवार के बड़े भाई दिनकर राव पवार के पोते रोहित पवार करजत से विधायक हैं और कहा जाता है कि शरद पवार ने उन्हें राजनीति के लिए तैयार किया है,रोहित पवार ने राजनीति की शुरुआत पंचायत स्तर पर की फिर विधायक बने.

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अजित पवार के निधन के बाद अब एनसीपी का क्या होगा
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  • अजित पवार की विमान दुर्घटना में मौत से पवार परिवार को गहरा सदमा पहुंचा है
  • अजित पवार जिला परिषद के चुनाव प्रचार के लिए जा रहे थे, जहां एनसीपी के दोनों धड़े चुनाव लड़ रहे थे
  • पवार परिवार में राजनीतिक विरासत तीसरी पीढ़ी तक पहुंच चुकी है, जिसमें सुप्रिया सुले और रोहित पवार सक्रिय हैं
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नई दिल्ली:

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी नेता अजित पवार की विमान दुर्घटना में मौत से पवार परिवार पर दुखों का पहाड़ टूटा है.85 वर्षीय शरद पवार के लिए यह निजी और राजनैतिक दोनों नुकसान है क्योंकि अब सवाल यह उठने लगा है कि एनसीपी का क्या होगा.अजित पवार जिस काम के लिए हवाई जहाज से जा रहे थे वह था जिला परिषद का चुनाव प्रचार.अभी महाराष्ट्र में एनसीपी 12 जिला परिषदों में एक साथ मिल कर चुनाव लड़ रही हैं और कई जगह तो शरद पवार की पार्टी अजित पवार की पार्टी के चुनाव चिह्न घड़ी पर चुनाव मैदान में है.इसके बाद ही महाराष्ट्र में यह चर्चा जोर पकड़ने लगी कि क्या एनसीपी के दोनों धड़े एक होंगे.मगर अब अजित पवार के ना होने से एक नई परिस्थिति पैदा हो गई है.

आगे बढ़ने से पहले आपको शरद पवार के परिवार को समझना होगा.शरद पवार के चार भाइयों के नाम हैं दिनकर राव पवार,फिर शरद राव पवार,अनंत राव पवार और प्रताप राव पवार जबकि एक बहन सरोज पाटिल.शरद पवार के परिवार में उनके चार भाइयों और एक बहन में से उनके अलावा दो ही बच्चे राजनीति में आए.एक खुद शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले और अनंत राव पवार के बेटे अजित पवार.

इस तरह अजित पवार शरद पवार के भतीजे हुए और सुप्रिया सुले और अजित पवार चचेरे भाई बहन.यही नहीं पवार परिवार में तीसरी पीढ़ी भी राजनीति में आ चुकी है.शरद पवार के बड़े भाई दिनकर राव पवार के पोते रोहित पवार करजत से विधायक हैं और कहा जाता है कि शरद पवार ने उन्हें राजनीति के लिए तैयार किया है,रोहित पवार ने राजनीति की शुरुआत पंचायत स्तर पर की फिर विधायक बने.रोहित महाराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन के भी अध्यक्ष हैं.

रोहित शरद पवार के पोते हुए वहीं अजित पवार दो बेटे हैं पार्थ पवार और जय पवार जिसमें से पार्थ पवार 2019 में मालवण से लोकसभा का चुनाव लड़ कर हार चुके हैं.दूसरी तरफ अजित पवार के बड़े भाई के बेटे युगेन्द्र पवार अजित पवार के खिलाफ विधानसभा का चुनाव लड़ कर हार चुके हैं.जबकि 2024 लोकसभा चुनाव में सुप्रिया सुले अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार को हरा चुकी हैं और अब सुनेत्रा पवार राज्यसभा की सांसद है.

ये तो रही परिवार का बात दरअसल 2023 में एनसीपी में बंटवारे के बाद परिवार भी बंटा और राजनीतिक रूप से सब एक दूसरे के खिलाफ लड़ने लगे मगर सामाजिक रूप से पवार परिवार एक रहा.रक्षाबंधन और अन्य त्योहारों या परिवार के सामाजिक कार्यक्रमों में पूरा पवार परिवार एकजुट दिखता रहा.

2023 में एनसीपी में टूट के बाद शरद पवार वाली एनसीपी ने 2024 के लोकसभा में अच्छा प्रदर्शन किया 8 सीटें जीतीं वहीं अजित पवार को एक मिली लेकिन उसी साल विधानसभा चुनाव में अजित पवार के 40 विधायक जीते तो शरद पवार के 10.मगर अभी चल रहे स्थानीय निकाय के चुनाव में दोनों एनसीपी की हालत ठीक नहीं रही और तब उन्होंने 12 जिला परिषदों में एक साथ मिल कर लड़ने का फैसला किया.

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मगर अब सवाल है आगे क्या होगा

पहला एनसीपी एक हो जाए और एनडीए का हिस्सा बन जाए सांसदों की संख्या के अनुसार दो मंत्री पद मिलेगा और महाराष्ट्र में सत्ता में भी भागीदारी रहेगी.मगर इस सब के लिए शरद पवार जी को तैयार होना होगा उनकी सहमति जरूरी होगी.दूसरा अजित पवार वाली एनसीपी का नेतृत्व सुनेत्रा पवार और प्रफुल्ल पटेल मिल कर करें और पार्थ पवार अपनी मां की मदद करें महाराष्ट्र में.प्रफुल्ल पटेल संकट मोचक बनें दिल्ली की राजनीति में उनकी गहरी पैठ है वे दिल्ली के शक्ति संतुलन के साथ-साथ तालमेल की राजनीति को बख़ूबी समझते हैं.

फिर नाम आता है सुनील तटकरे,धनंजय मुंडे और छगन भुजबल जैसे नेताओं का कि ये तय करें आगे क्या करना है.इतना तो जरूर है कि फिलहाल एनसीपी अभी दो राहे पर खड़ी दिख रही है.शरद पवार पहले ही कह चुके हैं कि वे 2026 की राज्यसभा का चुनाव नहीं लड़ेंगे ऐसे में अजित पवार का चले जाना एक गहरा राजनीतिक संकट की ओर इशारा कर रहा है क्या एनसीपी टूट जाएगी.मगर कहते हैं ना संकट में से ही समाधान भी निकलता है और अभी शरद पवार हैं जिन्होंने शून्य से एनसीपी को खड़ा किया है उम्मीद है इस बार इस बड़े संकट को हराने में कामयाब रहेंगे.

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