- झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में पिछले 11 दिनों से एक हाथी के हमलों में 22 लोग मारे गए और कई घायल हुए हैं.
- वन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम हाथी की तलाश में जुटी है लेकिन घने जंगल के कारण उसका पता नहीं चल पा रहा है.
- ग्रामीण भयभीत हैं, कई गांवों में लोग रात में एक साथ रहकर पहरेदारी कर रहे हैं.
Elephant Attack: झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में बीते 11 दिनों से एक हाथी का आतंक जारी है. इस हाथी के हमले में अब तक 22 लोगों की मौत हो चुकी है, कई ग्रामीण घायल भी हुए हैं. इससे लोगों में दहशत है. लोग घर से निकलने से कतरा रहे हैं. स्थानीय लोग, पुलिस, प्रशासन के साथ-साथ दो-दो राज्यों की वन विभाग की टीम लगातार हाथी की तलाश में जुटी है. लेकिन अभी तक इस भड़के गजराज का सटीक लोकेशन नहीं मिल सका है. इससे लोगों में डर और गुस्सा दोनों हैं. लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर यह हाथी इस कदर आक्रामक क्यों है?
वन विभाग के कर्मी की भी हाथी के हमले में गई जान
स्थानीय लोग बताते हैं कि अकेले मिलने वाले लोगों के साथ-साथ बस्तियों में भी घुसकर यह हाथी लोगों को मार रहा है. 6 जनवरी को एक ही दिन में हाथी के हमले में 6 लोगों की मौत हुई. हाथी को पकड़ने की कोशिश में जुटा वन विभाग का एक कर्मी भी मारा गया. हाथी के हमले में लोगों की लगातार हो रही मौत के बाद अब दो-दो राज्यों की वन विभाग की टीम उसकी तलाश में जुटी है.
चाईबासा के मझगांव में 12 घंटे तक एक ही स्थान पर रहा
अब झारखंड और ओडिशा की संयुक्त वन विभाग की एक्सपर्ट टीम ड्रोन कैमरा के बावजूद हाथी की सटीक लोकेशन का पता नहीं कर पा रहे हैं. वन विभाग के अनुसार चाईबासा के मझगांव प्रखंड के बेनीसागर इलाके में यह दो दांतों वाले हाथी लगभग 12 घंटे तक एक ही स्थान पर रहा था. इसके बाद से उसका लोकेशन ट्रैक नहीं हो पा रहा है.
ओडिशा के काजू बागानों में हाथी के होने की सूचना
वन विभाग के अधिकारियों के द्वारा इस हाथी को ट्रेंकुलाइजर कर पकड़ने की पूरी तैयारी की गई थी, लेकिन घने जंगल और तकनीकी बाधाओं के कारण यह ऑपरेशन सफल नहीं हो सका. इसके बाद हाथी ओडिशा सीमा की ओर स्थित काजू बागानों में चला गया है, जिससे उसका मूवमेंट ट्रैक करना और भी मुश्किल हो गया है.
दहशत में कट रही रातें, पूरी रात पहरेदारी करते लोग
वहीं हाथी के लगातार आतंक से आस-पास के गांव में ग्रामीणों में भारी दहशत है. लोग रात में अपने घरों में अकेले सोने से डर रहे हैं. कई गांव में महिलाओं और बच्चे सुरक्षित पक्के मकान में शरण ले रहे हैं. जहां 15 से 20 लोग एक साथ रात गुजार रहे हैं. वहीं गांव के पुरुष मसाल और टॉर्च लेकर पूरी रात पहरेदारी कर रहे हैं ताकि किसी भी अप्रिय घटना से समय रहते बचाव किया जा सके.
ओडिशा के मझगांव में मिला था हाथी का लास्ट लोकेशन
जगन्नाथपुर के अनुमंडल पुलिस अधिकारी (SDPO) राफेल मुर्मू ने बताया कि पुलिस और वन अधिकारियों के प्रयासों के बावजूद हाथी ओडिशा सीमा के पास मझगांव पुलिस थाना क्षेत्र के तिलोकुट्टी गांव में ही रुका रहा. उन्होंने बताया कि हाथी के हमले में मारे गए लोगों की पहचान बेनीसागर गांव के 40 वर्षीय प्रकाश मालवा और एक नाबालिग लड़के के रूप में हुई है, जबकि एक अन्य व्यक्ति घायल हो गया है.
हाथी के कारण कई घंटे तक लाश तक उठाने नहीं पहुंचे लोग
मुर्मू ने बताया कि हाथी को बार-बार भगाने की कोशिश करने के बावजूद वह गांव से बाहर नहीं निकल रहा था. उन्होंने कहा कि इलाके में हाथी की मौजूदगी के कारण शवों को तुरंत बरामद नहीं किया जा सका, इसलिए अतिरिक्त बल बुलाया गया है. अधिकारियों ने बताया कि पिछले पखवाड़े में जिले के गोइलकेरा और कोल्हान वन क्षेत्रों में जंगली हाथी के हमलों में करीब 18 लोग मारे गए हैं.
आखिर इतना आक्रामक क्यों हुआ हाथी
इस सवाल पर कोल्हान DFO कुलदीप मीणा कहते हैं, "ऐसा लग रहा है कि यह हाथी मेटिंग स्टेज में है. इस समय प्रजनन हार्मोन टेस्टोस्टेरोन में भारी वृद्धि के कारण सिंगल मेल हाथी अत्यधिक आक्रामक हो जाता है." वन अधिकारी ने बताया कि यह समय के साथ पंद्रह-बीस दिनों में ठीक हो जाता है. अधिकारियों ने यह भी अंदेशा जताया है कि यह हाथी अपने झुंड से अलग होकर भटक गया है.
हाथी को अपने झुंड में शामिल कराना जरूरी
वह कहते हैं, "इसीलिए हाथी को ट्रेस कर सुरक्षित तरीके से जंगल में छोड़ना ज़रूरी है ताकि वह अपने झुंड में शामिल हो सके." लेकिन चाईबासा वन प्रमंडल पदाधिकारी आदित्य नारायण के अनुसार नर हाथी की अंतिम लोकेशन शुक्रवार की शाम तक ट्रेस नहीं हो सकी थी. कुलदीप मीणा के अनुसार, "हाथी जवान और काफ़ी फुर्तीला है, जिस कारण वह तेज़ी से अपना स्थान बदलता है, ख़ास कर रात में." इस कारण उसे पकड़ना काफी मुश्किल हो रहा है.














