- ओडिशा के नौगांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में नसबंदी ऑपरेशन के बाद महिलाओं को अस्पताल के फर्श पर लिटाया गया.
- सर्जरी के बाद कम से कम बीस महिलाओं को मेडिकल बेड के बजाय गंदगी भरे ठंडे फर्श पर रखा गया.
- अस्पताल में कुल बारह बेड उपलब्ध थे, जिनमें से आठ खाली थे, फिर भी मरीजों को फर्श पर रखा गया.
ओडिशा के स्वास्थ्य विभाग की ये दिल दहला देने वाली तस्वीरें सरकारी 'सिस्टम' के मुंह पर करारा तमाचा हैं. बदहाली की ये तस्वीर चीख-चीख कर कह रही है कि सिस्टम पूरी तरह वेंटिलेटर पर है. नसबंदी जैसे संवेदनशील ऑपरेशन के बाद, जब एक महिला को सबसे ज्यादा देखभाल और आराम की जरूरत होती है, तब उसे ठंड और गंदगी के बीच अस्पताल के ठंडे फर्श पर लेटने के लिए छोड़ दिया गया.
बीते गुरुवार को ओडिशा के जगतसिंहपुर जिले अंतर्गत नौगांव स्थित सरकारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर नसबंदी के लिए आईं कम से कम 20 महिलाओं को ऑपरेशन के बाद अस्पताल के ठंडे फर्श पर लेटने के लिए मजबूर होना पड़ा. वीडियो क्लिप में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह सर्जरी के बाद महिलाओं को बेड तक मुहैया नहीं कराए गए और उन्हें मेडिकल बेड के ठीक नीचे जमीन पर ही लिटा दिया गया.
ये महिलाएं परिवार नियोजन शिविर के तहत सर्जरी कराने नौगांव स्वास्थ्य केंद्र पहुंची थीं. इनमें से 17 महिलाओं का ऑपरेशन तो कर दिया गया, लेकिन बुनियादी सुविधाओं के अभाव में उन्हें गरिमापूर्ण उपचार के बजाय फर्श की गंदगी के बीच छोड़ दिया गया. जैसे ही यह वीडियो वायरल हुआ, चारों तरफ अस्पताल प्रशासन और सरकार की कड़ी आलोचना शुरू हो गई है.
स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया
जगतसिंहपुर के नौगांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में ऑपरेशन के बाद महिलाओं को फर्श पर लिटाए जाने की हृदयविदारक घटना जब जिला प्रशासन के संज्ञान में आई, तो स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया. जिला स्वास्थ्य विभाग ने इस गंभीर लापरवाही को देखते हुए केंद्र के मुख्य चिकित्सा अधिकारी को 'कारण बताओ नोटिस' जारी किया है. जिला चिकित्सा अधिकारी कार्यालय द्वारा जारी पत्र संख्या 1044/19.02.2026 के माध्यम से प्रशासन ने तीन दिनों के भीतर लिखित स्पष्टीकरण मांगा है कि आखिर किन परिस्थितियों में ऐसी अमानवीय स्थिति पैदा हुई.
हैरान करने वाली बात यह है कि जांच में पता चला कि नौगांव स्वास्थ्य केंद्र में कुल 12 बेड उपलब्ध थे. सर्जरी वाले दिन केवल 4 बेड पर सामान्य मरीज थे, जबकि 8 बेड पूरी तरह खाली थे. इसके बावजूद, सर्जरी के बाद महिलाओं को उन खाली बेडों पर आराम करने देने के बजाय पॉलीथीन से ढके एक असुरक्षित कमरे में फर्श पर रखा गया. यह सीधे तौर पर अधिकारियों की घोर संवेदनहीनता और लापरवाही को दर्शाता है, क्योंकि सर्जरी के तुरंत बाद मरीजों को संक्रमण (इंफेक्शन) का सबसे अधिक खतरा होता है. अब इस मामले में जनता के बीच भारी आक्रोश है और प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री से इस पूरे प्रकरण में हस्तक्षेप कर दोषियों पर तत्काल और कड़ी कार्रवाई की मांग की जा रही है.
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