छत्तीसगढ़ के नर्सिंग होम में 12वीं पास युवक करता था ऑपरेशन, अस्पताल में लगा था अव्यवस्थाओं का अंबार

गर्भवती महिला की मौत के बाद छत्तीसगढ़ के एक प्राइवेट अस्पताल की जांच की गई थी. इसमें पता चला कि एक 12वीं पास युवक वहां मरीजों के ऑपरेशन करता था. इसके अलावा अस्पताल में न जीवन रक्षक उपकरण मिले और न ही अस्पताल में इमरजेंसी की सुविधा थी.

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बलौदा बाजार:

छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली का एक नायब नमूना बलौदा बाजार जिले के कसडोल विकासखंड के ग्राम कटगी में सामने आया है.वहां एक महिला की मौत के मामले में जांच करने प्रशासन की टीम जब संस्कार हॉस्पिटल में पहुंची, तब वहां चल रही भारी अनियमितताओं का भंडाफोड़ हुई.जांच में पता चला कि अस्पताल में न तो इमरजेंसी की सुविधा है,न ही आईसीयू और न ही जीवनरक्षक उपकरण. दवाइयों का स्टॉक भी ठीक से नहीं मिला. अस्पताल में 12वीं पास एक युवक ऑपरेशन करता हुआ मिला.

किसके निर्देश पर हुई अस्पताल की जांच

कलेक्टर दीपक सोनी से अस्पताल की अनियमितता की शिकायत हुई थी. कलेक्टर सोनी के निर्देश पर अनुविभागीय अधिकारी रामरतन दुबे के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम ने छापामार कार्रवाई की.तहसीलदार कसडोल और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में हुई इस जांच में ऐसे खुलासे सामने आए जिन्होंने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई. जांच टीम के पहुंचते ही अस्पताल में अवैध संचालन और लापरवाही की परतें खुलती चली गईं.

जांच में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि यह हॉस्पिटल पिछले तीन साल से बिना किसी रजिस्ट्रेशन के संचालित किया जा रहा था. नर्सिंग होम एक्ट का पालन तो दूर, अस्पताल में योग्य डॉक्टर, प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ और आवश्यक लाइसेंस तक मौजूद नहीं थे. इसके बाद भी यहां बड़े ऑपरेशन किए जा रहे थे. अस्पताल में 12वीं पास युवक दुखित राम साहू खुद को डॉक्टर बताकर मरीजों का इलाज कर रहा था. टीम को अस्पताल में बुनियादी सुविधाओं का भी घोर अभाव मिला. अस्पताल में न तो कोई इमरजेंसी सुविधा है,न ही आईसीयू और न ही जीवनरक्षक उपकरण. दवाइयों का स्टॉक अव्यवस्थित मिला और रिकॉर्ड में कई गड़बड़ियां पाई गईं.

गर्भवती की मौत के बाद मचा था बवाल

दरअसल बीते माह एक गर्भवती महिला की मौत के बाद ग्रामीणों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए थे. इसके बाद जांच को और तेज किया गया.

जांच में मिली अनियमितताओं को गंभीर मानते हुए प्रशासन ने नर्सिंग होम एक्ट के उल्लंघन के आरोप में तत्काल प्रभाव से अस्पताल संचालन को प्रतिबंधित कर दिया है. इसके बाद से संस्कार अस्पताल सील कर दिया गया.प्रशासन अस्पताल प्रबंधन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है.

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि क्षेत्र में अवैध रूप से चल रहे अस्पतालों और नर्सिंग होमों पर अब सख्त निगरानी रखी जाएगी.संस्कार हॉस्पिटल का मामला उस स्वास्थ्य अव्यवस्था की ओर इशारा करता है,जो ग्रामीण क्षेत्रों में बिना रोक-टोक फल-फूल रही है. प्रशासन की इस कार्रवाई से उम्मीद है कि अन्य फर्जी संस्थानों पर भी नकेल कसी जाएगी.

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