- मजदूर दिवस पहली बार 1889 में मजदूरों के आठ घंटे काम करने की मांग को लेकर मनाया गया था
- भारत में आज भी लाखों मजदूर आधुनिक गुलामी की स्थिति में जबरदस्ती काम करते हैं और मेहनताना नहीं पाते
- ILO के अनुसार भारतीय औसतन सप्ताह में 45 घंटे से ज्यादा काम करते हैं जबकि कई यूरोपीय देशों में कम होता है
1 May Labour Day: मजदूरों के हक की आवाज उठाने के लिए साल 1889 में 1 मई का दिन चुना गया. ये वह दौर था जब पश्चिम की दुनिया में बड़े-बड़े कारखाने खुल रहे थे. मजदूरों से सुबह से लेकर शाम तक काम लिया जाता था. तब हजारों-लाखों मजदूरों ने तय किया कि वे 8 घंटे से ज्यादा काम नहीं करेंगे. दुनियाभर में मजदूरों ने अपनी मांगों को लेकर हड़तालें कीं. विरोध प्रदर्शन किया. धरना दिया.
भारत में 1923 से 1 मई को मजदूर दिवस के तौर पर मनाया जाता है. लेकिन भारत में आज भी हजारों-लाखों मजदूरों की हालत बहुत खराब है. वैसे तो भारत समेत दुनियाभर में ज्यादातर हिस्सों में हफ्ते में 48 घंटे काम करने का नियम है. लेकिन बहुत सी जगहों पर इसे माना नहीं जाता है. ग्लोबल स्लेवरी इंडेक्स की 2021 की रिपोर्ट बताती है कि भारत में 1.10 करोड़ से ज्यादा लोग 'मॉडर्न स्लेवरी' यानी 'आधुनिक गुलामी' में जी रहे हैं. इसका मतलब हुआ कि एक करोड़ से ज्यादा भारतीयों से न सिर्फ जबरदस्ती काम करवाया जा रहा है, बल्कि उन्हें इसका मेहनताना भी नहीं दिया जा रहा है.
इतना ही नहीं, आज के समय में भी दुनिया में सबसे ज्यादा काम करने वालों में भारतीय भी शामिल हैं. लेकिन कमाई में बहुत पीछे हैं.
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कितना काम करते हैं भारतीय?
कानूनन हफ्ते में 48 घंटे से ज्यादा काम नहीं करवाया जा सकता. अगर इससे ज्यादा काम करवाया जाता भी है तो उसके लिए ओवरटाइम देना होगा.
अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) का डेटा बताता है कि एक भारतीय हफ्ते में औसतन 45.5 घंटे काम करता है. यानी, साल में 2,366 घंटे. लेकिन 51% भारतीय ऐसे भी हैं जो हफ्ते में 49 घंटे से ज्यादा काम करते हैं. जबकि, ब्रिटेन में एक व्यक्ति औसतन 34.9 घंटे काम करता है. नीदरलैंड्स में तो 30.3 घंटे ही काम करता है. चीन जैसे देश में भी एक व्यक्ति हफ्ते में औसतन 46.1 घंटे काम करता है.
हालांकि, सरकारी आंकड़े तो इससे भी ज्यादा बताते हैं. पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) की 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय शहरों में नौकरीपेशा पुरुष हफ्ते में औसतन 51 घंटे काम करता है. शहरों में नौकरीपेशा महिलाएं 43.6 घंटे काम करती हैं.
इसी तरह, केंद्र सरकार का टाइम यूज सर्वे बताता है कि भारतीय अपने दिन का 440 मिनट यानी 7 घंटे से ज्यादा काम में बिताता है. एक दिन में पुरुष का औसतन 473 मिनट और महिला का 341 मिनट काम में जाता है.
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और कमा कितना पाते हैं?
दुनिया में सबसे ज्यादा काम करने वालों में भारतीय भी हैं. लेकिन इसके बावजूद भारतीयों की कमाई बहुत कम है. अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) का डेटा बताता है कि हर भारतीय हर घंटे औसतन 4.63 डॉलर (लगभग 440 रुपये) कमाता है.
अगर इसकी तुलना अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों से की जाए तो भारतीय बहुत पीछे हैं. ILO के मुताबिक, ब्रिटेन में एक व्यक्ति की एक घंटे की औसत कमाई 28.31 डॉलर (लगभग 2,686 रुपये) और अमेरिका में 43.49 डॉलर (लगभग 4,126 रुपये) है.
एक भारतीय एक ब्रिटिश व्यक्ति से 30% और एक अमेरिकी से 21% ज्यादा काम करता है, लेकिन ब्रिटिश व्यक्ति के मुकाबले 7 गुना और अमेरिकी के मुकाबले 10 गुना कम कमाता है.
PLFS का सर्वे भी बताता है कि एक भारतीय चाहे वह नौकरी करे या दिहाड़ी मजदूरी या फिर अपना खुद का काम... उसकी कमाई बहुत कम है. PLFS का सर्वे कहता है कि एक नौकरीपेशा भारतीय की महीनेभर की औसत कमाई सिर्फ 22,699 रुपये है. वहीं, दिहाड़ी मजदूरी करने वाला व्यक्ति हर महीने औसतन 453 रुपये ही कमा पाता है. जबकि, खुद का कोई काम करने वाला व्यक्ति महीने में औसतन 14,861 रुपये कमाई ही कर पाता है.
इसमें भी सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि भारत में 90% से ज्यादा मजदूर असंगठित क्षेत्रों में काम करते हैं. यानी, ऐसी जगहों पर काम करते हैं, जहां न तो काम की गारंटी है और न ही कोई सोशल सिक्योरिटी मिलती है. लेकिन अच्छी बात यह है कि अब 94 करोड़ से ज्यादा भारतीयों को सरकार की तरफ से कोई न कोई सोशल सिक्योरिटी मिली हुई है.
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