उत्तराखंड के जंगलों में लगी आग के मामले में SC ने मांगे कुछ और दस्‍तावेज

उत्तराखंड में जंगल की आग से वन, वन्यजीव और पक्षियों की सुरक्षा के लिए एक जनहित याचिका दाखिल की गई है.

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उत्तराखंड के जंगलों में लगी आग के मामले में सुनवाई एक हफ्ते टली (प्रतीकात्‍मक फोटो)
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  • मामले की सुनवाई एक हफ्ते के लिए टली
  • टिहरी गढ़वाल के ऋतुपर्ण ने दाखिल की है याचिका
  • इसमें आग रोकने के लिए नीति का निर्देश देने का किया गया आग्रह
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उत्तराखंड के जंगलों में लगी आग (Uttarakhand wildfires) पर दाखिल याचिका सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के मुख्‍य न्‍यायाधीश (CJI) एसए बोबडे ने याचिकाकर्ता को कहा कि आप हाईकोर्ट जाएं, आपकी राहत उत्तराखंड राज्य तक सीमित है. इस पर याचिकाकर्ता ने कहा, 2016 में हाईकोर्ट द्वारा एक आदेश दिया गया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने रोक दिया था इसलिए मैं यहां आया हूं. इस पर मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने कहा कि अगर ऐसा है तो हम इसे अगले हफ्ते सुनेंगे. याचिका पर सुनवाई एक हफ्ते टली. सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में सुनवाई करते हुए याचिका के समर्थन में कुछ और दस्तावेज देने को कहा था.

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उत्तराखंड में जंगल की आग से वन, वन्यजीव और पक्षियों की सुरक्षा के लिए एक जनहित याचिका दाखिल की गई है. जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस बीआर गवई की पीठ ने वकील और उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले के रहने वाले ऋतुपर्ण उनियाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए ये दस्तावेज मांगे हैं. उनियाल ने जंगल की आग रोकने की नीति बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार को निर्देश जारी करने का सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है. पहले सुप्रीम कोर्ट ने उनियाल से हाईकोर्ट जाने को कहा था लेकिन बाद में उन्हें अपनी याचिका से पक्ष में कुछ और दस्तावेज दायर करने का निर्देश दिया.उनियाल ने जंगल की आग की बढ़ती घटनाओं पर मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए याचिका पर तुरंत सुनवाई का अनुरोध किया था.

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उन्होंने कहा था कि साल 2018 में जंगल में आग लगने की 1451 घटनाएं हुई थीं जबकि 2019 में अप्रैल और मई में आग लगने की 1493 घटनाएं हुई हैं. याचिका में जंगल को 'जीवित व्यक्ति के समान अधिकारों, कर्तव्यों और देयताओं के साथ कानूनी संस्थाओं के रूप में विशेष क्षेत्र घोषित करने के निर्देश देने की मांग की गई है.

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