महिलाओं में माइग्रेन और स्ट्रोक का खतरा अधिक क्यों होता है? जानें कारण और बचाव के उपाय

Migraines And Stroke Risk: पूरे परिवार का ख्याल रखते-रखते एक महिला अपना ही ख्याल रखना भूल जाती है. कई बार छोटे-मोटे दर्द को नजरअंदाज कर देती है. लेकिन ये लापरवाही आपके लिए बड़ी समस्या बन सकती है. इस आर्टिकल में जानते हैं महिलाओं में माइग्रेन और स्ट्रोक का खतरा अधिक क्यों.

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Women's Day 2026: महिलाओं में माइग्रेन और स्ट्रोक का खतरा अधिक क्यों होता है?

Women's Day 2026: अक्सर महिलाएं अपनी सेहत को नजरअंदाज करती हैं. कई बार छोटी-छोटी बातों पर ध्यान नहीं देती हैं. लेकिन ये लापरवाही कई बार उन्हें बड़ी परेशानी दे देती है. अक्सर महिला सिरदर्द को मामूली थकावट या सिर्फ एक सिरदर्द कहकर टाल देती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया भर में करोड़ों महिलाओं के लिए यह कोई आम दर्द नहीं, बल्कि एक गंभीर बीमारी है जिसे माइग्रेन कहते हैं.

क्या है माइग्रेन- (What Is Migraines)

माइग्रेन सिर्फ सिर का दर्द नहीं है, बल्कि यह दिमाग से जुड़ी एक ऐसी स्थिति है जो इंसान की पूरी दिनचर्या को तहस-नहस कर सकती है. जो इस समस्या से हर दिन जूझ रहा है वो ही इसे समझ सकता है.

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) के आंकड़े बताते हैं कि पुरुषों के मुकाबले महिलाओं को माइग्रेन होने का खतरा तीन गुना ज्यादा होता है. इंटरनेशनल विमेंस डे के मौके पर न्यूरोलॉजिस्ट्स ने इस बात पर जोर दिया है कि माइग्रेन को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है, क्योंकि इसका सीधा संबंध आपके दिल और दिमाग की सेहत यानी स्ट्रोक के खतरे से भी हो सकता है.

​महिलाओं को ही क्यों होता है ज्यादा माइग्रेन?

एक्सपर्ट की माने तो इसके पीछे सबसे बड़ा हाथ हार्मोन्स का है. महिलाओं के शरीर में 'एस्ट्रोजन' नाम का हार्मोन समय-समय पर बदलता रहता है. महिलाओं के जीवन के अलग-अलग पड़ाव माइग्रेन को ट्रिगर करते हैं.

​पीरियड्स और माइग्रेन- लगभग 60% महिलाएं महसूस करती हैं कि उनके पीरियड्स आने से ठीक पहले सिरदर्द बढ़ जाता है. इसे 'मेंस्ट्रुअल माइग्रेन' कहते हैं. 

​प्रेगनेंसी- गर्भावस्था के दौरान कई महिलाओं को माइग्रेन से राहत मिल जाती है क्योंकि हार्मोन स्थिर हो जाते हैं. 

​मेनोपॉज- जब महिलाएं मेनोपॉज (पीरियड्स बंद होने की उम्र) के करीब होती हैं, तब हार्मोन्स में भारी उतार-चढ़ाव होता है, जिससे माइग्रेन की समस्या और भी गंभीर हो सकती है.

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​क्या है माइग्रेन और स्ट्रोक का कनेक्शन- (What is the connection between migraine and stroke)

​जिन महिलाओं को 'ओरा वाला माइग्रेन' होता है, उनमें स्ट्रोक (लकवा) का खतरा उन महिलाओं के मुकाबले दोगुना होता है जिन्हें माइग्रेन नहीं है. ब्रिटिश मेडिकल जर्नल की एक रिपोर्ट भी इस बात की पुष्टि करती है.

​किसे रहता है ज्यादा रिस्क- 

  • ​हाई ब्लड प्रेशर 
  • ​मोटापा 
  • ​सिगरेट या बीड़ी पीना 
  • ​हाई कोलेस्ट्रॉल
  • ​शारीरिक मेहनत की कमी
  • गर्भनिरोधक गोलियां

​कब डॉक्टर से मिलें- 

  1. ​अगर माइग्रेन का पैटर्न अचानक बदल जाए.
  2. ​सिरदर्द के साथ कमजोरी महसूस हो या बोलने में दिक्कत आए.
  3. ​दर्द इतना तेज हो कि बर्दाश्त से बाहर हो जाए.
  4. ​सिरदर्द लगातार बढ़ता ही जा रहा हो.

​माइग्रेन से बचने के लिए अपनाएं ये तरीके-

​1. पूरी नींद लें- 

कम नींद माइग्रेन का सबसे बड़ा दुश्मन है. इसलिए रोज एक ही समय पर सोएं और जागें. कम से कम 7-8 घंटे की नींद लें.

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Photo Credit: File Photo सिरदर्द से बचने के लिए पूरी नींद लें.

​2. स्ट्रेस कम लें- 

कई बार स्ट्रेस ज्यादा लेने से सिर का दर्द बढ़ जाता है. योग और मेडिटेशन से स्ट्रेस को कंट्रोल करें. 

3. अधिक पानी पिएं- 

पानी की कमी से शरीर को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है. अगर शरीर में पानी की कमी है तो सिरदर्द की समस्या हो सकती है. 

4. ​समय पर चेकअप कराएं- 

ब्लड प्रेशर और वजन बढ़ने से भी ये समस्या बढ़ सकती है. इसलिए खान-पान के साथ-साथ समय-समय पर चेकअप कराते रहें. 

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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