क्या होता है कैंसर क्लिनिकल ट्रायल का मतलब, कैसे करता है काम? जानें इससे जुड़ी सभी जरूरी बातें

Cancer Clinical Trial: क्लिनिकल ट्रायल कोई आखिरी ऑप्शन नहीं, बल्कि बेहतर इलाज की दिशा में एक समझदारी भरा कदम हैं. सही जानकारी और डॉक्टर की सलाह के साथ लिया गया फैसला कैंसर के इलाज में बड़ा फर्क ला सकता है.

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क्या होता है कैंसर क्लिनिकल ट्रायल का मतलब?

Cancer Clinical Trial: अक्सर लोगों को लगता है कि क्लिनिकल ट्रायल सिर्फ उन्हीं कैंसर मरीजों के लिए होते हैं जिनका इलाज अब कहीं काम नहीं कर रहा. लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है. सच्चाई यह है कि क्लिनिकल ट्रायल कैंसर के इलाज का एक बहुत जरूरी हिस्सा हैं और ये बीमारी के हर स्टेज पर किए जाते हैं. आज जो भी मॉर्डन ट्रीटमेंट मौजूद हैं, वो किसी न किसी क्लिनिकल ट्रायल से होकर ही आए हैं.

क्लिनिकल ट्रायल आखिर होते क्या हैं?

आसान शब्दों में समझें तो क्लिनिकल ट्रायल ऐसे मेडिकल टेस्ट होते हैं, जिनमें डॉक्टर यह देखते हैं कि कोई नया इलाज, दवा या इलाज का तरीका कितना असरदार और सेफ है. इसमें सिर्फ नई दवाइयों की जांच ही नहीं होती, बल्कि यह भी देखा जाता है कि इलाज से मरीज की रोजाना की जिंदगी बेहतर हो रही है या नहीं. कई बार इलाज के पुराने तरीकों को ही बेहतर बनाकर परखा जाता है.

क्या ये सिर्फ आखिरी स्टेज के मरीजों के लिए होते हैं?

नहीं ऐसा नहीं है. क्लिनिकल ट्रायल शुरुआती स्टेज से लेकर एडवांस स्टेज तक हर लेवल पर होते हैं. शुरुआती स्टेज में ये बीमारी को जल्दी पकड़ने और सही इलाज तय करने में मदद करते हैं. बाद के स्टेज में इनका मकसद इलाज को ज्यादा असरदार बनाना और साइड इफेक्ट कम करना होता है. कई मरीजों को ऐसे इलाज भी मिल जाते हैं जो अभी आम अस्पतालों में उपलब्ध नहीं होते.

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मरीजों को इससे क्या फायदा होता है?

क्लिनिकल ट्रायल में शामिल मरीजों पर डॉक्टरों की टीम बहुत करीब से नज़र रखती है. उन्हें मॉर्डन इलाज मिलता है और उनकी सेहत की रेगुलर जांच होती रहती है. कई बार ऐसे इलाज मिल जाते हैं जिनसे बीमारी कंट्रोल में आती है या मरीज की लाइफ क्वॉलिटी बेहतर हो जाती है. साथ ही, आज जो मरीज ट्रायल में शामिल होते हैं, उनकी मदद से फ्यूचर के मरीजों के लिए बेहतर इलाज का रास्ता खुलता है.

क्या क्लिनिकल ट्रायल सुरक्षित होते हैं?

हर क्लिनिकल ट्रायल सख्त नियमों और मेडिकल गाइडलाइंस के तहत किया जाता है. मरीज की पूरी सहमति ली जाती है और उन्हें हर बात साफ-साफ समझाई जाती है. किसी भी तरह का खतरा होने पर इलाज तुरंत रोका जा सकता है. मरीज को किसी भी समय ट्रायल छोड़ने का पूरा अधिकार होता है.

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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