UK Social Media Study: क्या बच्चों के लिए सोशल मीडिया वाकई खतरनाक है? ब्रिटेन में शुरू हुई दुनिया की सबसे बड़ी स्टडी

ब्रिटेन में 4,000 बच्चों पर एक बड़ी रिसर्च शुरू हुई है जो बताएगी कि सोशल मीडिया कम करने से उनकी मेंटल हेल्थ पर क्या असर पड़ता है.

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इस स्टडी के शुरुआती नतीजे 2027 की गर्मियों तक आने की उम्मीद है.

 Effects of restricting social media for children : हाल ही में ऑस्ट्रेलिया ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूरी तरह बैन लगा दिया है. अब ब्रिटेन की सरकार पर भी ऐसा ही दबाव है. लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि हमारे पास अभी तक इस बात का कोई सटीक साइंटिफिक डेटा नहीं है कि सोशल मीडिया को सीमित करने से बच्चों की हेल्थ पर वाकई क्या सुधार आता है. इसी सवाल का जवाब ढूंढने के लिए ब्रिटेन (UK) में एक बहुत बड़ी और अपनी तरह की पहली रिसर्च शुरू की गई है, जिसे कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर एमी ऑर्बेन लीड कर रही हैं.

आपको बता दें कि यह दुनिया की पहली ऐसी रिसर्च है जो सीधे तौर पर बच्चों के सोशल मीडिया टाइम को कंट्रोल करके उसके नतीजों को देखेगी.

कैसे होगी यह जांच?

इस रिसर्च का नाम 'IRL Trial' रखा गया है. इसमें ब्रैडफोर्ड के 30 स्कूलों के करीब 4,000 बच्चों को शामिल किया जाएगा, जो 8वीं, 9वीं और 10वीं क्लास के होंगे. 

यह भी पढ़ें- ऑस्ट्रेलिया में 16 साल से कम उम्र के बच्चों का Facebook-Insta बैन, जानें इसके फायदे और नुकसान

रिसर्च का अधार क्या होगा

दो ग्रुप्स में होगा बंटवारा
  • बच्चों को दो ग्रुप्स में बांटा जाएगा. एक ग्रुप के बच्चे जैसे सोशल मीडिया चलाते हैं, वैसे ही चलाते रहेंगे.
  • वहीं, दूसरे ग्रुप के बच्चों के फोन में एक ऐप डाला जाएगा, जो टिकटॉक, इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब जैसे ऐप्स का इस्तेमाल दिन में सिर्फ 1 घंटे तक सीमित कर देगा.
  • इसके अलावा बच्चों के लिए रात 9 बजे से सुबह 7 बजे तक सोशल मीडिया इस्तेमाल करने पर पूरी पाबंदी होगी.

Photo Credit: Pexels

सोशल मीडिया बैन का दोस्ती पर क्या होगा असर

रिसर्चर्स यह भी देखेंगे कि जब पूरे फ्रेंड सर्कल का सोशल मीडिया बंद होता है, तो उनकी दोस्ती पर क्या असर पड़ता है.

वॉट्सऐप कर सकेंगे यूज

इस रिसर्च की खास बात यह है कि वॉट्सऐप (WhatsApp) जैसे मैसेजिंग ऐप्स को इस बैन से बाहर रखा गया है ताकि बच्चे अपने परिवार से जुड़े रह सकें.

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सरकार और कानून का दबाव

एक तरफ जहां वैज्ञानिक डेटा जुटा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ ब्रिटेन की संसद में 'सोशल मीडिया बैन' को लेकर बहस तेज हो गई है. जॉन नैश नाम के एक नेता ने तो इसके लिए बाकायदा कानून में बदलाव की मांग की है.

उनका कहना है कि अगर हमने अभी कदम नहीं उठाया, तो बच्चों का बचपन खराब हो जाएगा. हालांकि, सरकार ने कहा है कि वह अभी इस पर विचार कर रही है और गर्मियों तक कोई फैसला लेगी.

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क्या हैं इस स्टडी की चुनौतियां?

डॉ. डैन लेवर, जो इस स्टडी के को-लीड हैं, कहते हैं कि बच्चों पर नजर रखना आसान नहीं है. हो सकता है बच्चे दूसरों का फोन इस्तेमाल कर लें या रिसर्च में हिस्सा ही न लें. लेकिन फिर भी, यह स्टडी हमें बताएगी कि क्या कम सोशल मीडिया इस्तेमाल करने से बच्चों की एंग्जायटी, डिप्रेशन और नींद में सुधार आता है या नहीं.

कब तक आएगा स्टडी का रिजल्ट?

इस स्टडी के शुरुआती नतीजे 2027 की गर्मियों तक आने की उम्मीद है.

यूके सोशल मीडिया बैन रिलेटेड FAQ

1. ब्रिटेन में सोशल मीडिया को लेकर क्या नई रिसर्च हो रही है?

ब्रिटेन की कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी 'IRL Trial' नाम की एक रिसर्च कर रही है. इस स्टडी में 4,000 बच्चों को शामिल किया जाएगा जिसमें देखा जाएगा सोशल मीडिया का इस्तेमाल सीमित करने से उनकी मेंटल हेल्थ पर क्या असर पड़ेगा.

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2. इस रिसर्च में बच्चों के लिए क्या रूल हैं?

रिसर्च में शामिल बच्चों को सोशल मीडिया (जैसे Instagram, TikTok) दिन में सिर्फ 1 घंटे इस्तेमाल करने की इजाजत होगी. साथ ही, रात 9 बजे से सुबह 7 बजे तक सोशल मीडिया चलाने पर पूरी पाबंदी होगी.

3. क्या इस पाबंदी में वॉट्सऐप (WhatsApp) भी शामिल है?

नहीं, रिसर्चर्स ने वॉट्सऐप और अन्य मैसेजिंग ऐप्स को इस पाबंदी से बाहर रखा है.

4. क्या ऑस्ट्रेलिया ने वाकई सोशल मीडिया पर बैन लगा दिया है?

जी हां, ऑस्ट्रेलिया दुनिया का पहला ऐसा देश बन गया है जिसने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर कानूनी रूप से प्रतिबंध लगा दिया है.

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5. इस स्टडी का रिजल्ट कब तक आएंगे?

इस स्टडी का पायलट प्रोजेक्ट अप्रैल में शुरू होगा और मुख्य रिसर्च अक्टूबर से शुरू होगी. वहीं,  शुरुआती और पक्के नतीजे साल 2027 की गर्मियों तक आने की उम्मीद जताई जा रही है.

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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