आपके किचन का नॉन-स्टिक बर्तन बन सकता है बच्चों के लिवर का दुश्मन, चौंकाने वाली स्टडी में बड़ा खुलासा

नई स्टडी में खुलासा हुआ है कि नॉन-स्टिक कुकवेयर में मौजूद PFAS और PFOA जैसे फॉरएवर केमिकल्स  टीनएजर्स में फैटी लिवर डिजीज का खतरा कई गुना बढ़ा सकते हैं.

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PFAS जैसे केमिकल्स शरीर और पर्यावरण में सालों तक रहते हैं.

क्या आप भी अपने किचन में नॉन स्टिक बर्तनों का इस्तेमाल करते हैं? हाल ही में एक स्टडी में नॉन स्टिक कुकवेयर में खाना बनाने के नुकसानों के बारे में खुलासा किया गया है. स्टडी में सामने आया है कि नॉन-स्टिक बर्तनों में इस्तेमाल होने वाले कुछ केमिकल्स टीनएजर्स की सेहत के लिए खतरा बन सकते हैं. खासतौर पर फैटी लिवर डिजीज का रिस्क इसमें तेजी से बढ़ता देखा गया है. स्टडी के मुताबिक, PFOA नाम का केमिकल, जो नॉन-स्टिक कुकवेयर में इस्तेमाल होता है, जो बच्चों में लिवर से जुड़ी समस्याओं का बड़ा कारण बन सकता है.

यह रिसर्च अध्ययनों का विश्लेषण और डेटा है जो दिखाता है कि PFAS (पर्फ्लुओरोअल्की और पॉलीफ्लुओरोअल्की पदार्थ) जैसे PFOA एवं PFHpA के स्तर को लेकर किशोरों में फैटी लिवर डिजीज (MASLD) का जोखिम बढ़ जाता है. यह शोध वैज्ञानिक जर्नल Environmental Research में प्रकाशित हुआ है, और इसका विवरण मीडिया और यूनिवर्सिटी रिपोर्ट्स में साझा किया गया है

क्या हैं PFAS और PFOA?

PFAS शरीर और पर्यावरण में सालों तक रहते हैं. PFOA, PFHpA और PFHxS जैसे केमिकल्स PFAS ग्रुप में आते हैं. ये न सिर्फ नॉन-स्टिक बर्तन, बल्कि कपड़ों, इलेक्ट्रॉनिक्स और पानी को वॉटरप्रूफ बनाने वाले प्रोडक्ट्स में भी पाए जाते हैं. ये केमिकल्स धीरे-धीरे शरीर में जमा होते रहते हैं और मेटाबॉलिज्म, हार्मोन और लिवर फंक्शन में बुरा असर डालते हैं.

टीनएजर्स में ज्यादा खतरा क्यों?

रिसर्च के अनुसार, किशोरावस्था एक बेहद सेंसिटिव फेज होता है. इस उम्र में हार्मोनल बदलाव और तेज ग्रोथ होती है. ऐसे में PFAS जैसे केमिकल्स शरीर पर ज्यादा बुरा असर डाल सकते हैं.

स्टडी में पाया गया कि PFOA की मात्रा दोगुनी होने पर टीनएजर्स में फैटी लिवर डिजीज का खतरा करीब 169% तक बढ़ गया. वहीं PFHpA और PFHxS जैसे केमिकल्स ने भी लिवर से जुड़ी समस्याओं का रिस्क कई गुना बढ़ाया, खासकर उन बच्चों में जिनमें PNPLA3 नाम का हाई-रिस्क जीन मौजूद था.

एडल्ट्स में खतरा

स्टडी में एडल्ट्स में PFAS और फैटी लिवर के बीच सीधा संबंध नहीं दिखा, लेकिन स्मोकिंग ने इस रिस्क को बढ़ा दिया. स्मोकर्स में PFAS का असर ज्यादा खतरनाक साबित हुआ, जिससे लिवर से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ गया.

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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