बच्चों के दूध में जहर का खतरा! क्‍या है सेर्यूलाइड के लक्षण, बच्चों में फूड पॉइजनिंग से बचाव के लिए क्‍या करें

नेस्ले ने सलाह दी है कि जिन माता-पिता के पास ये बैच हैं, वे इन्हें अपने बच्चों को बिल्कुल न पिलाएं. हालांकि, अभी तक किसी बच्चे के बीमार होने की खबर नहीं मिली है, लेकिन सावधानी के तौर पर यह कदम उठाया गया है.

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दिग्गज कंपनी नेस्ले (Nestle) ने एहतियात के तौर पर यूरोप के कई देशों (जैसे फ्रांस, जर्मनी, इटली और स्वीडन) में अपने SMA इन्फेंट फॉर्मूला और फॉलो-ऑन फॉर्मूला के कुछ खास बैच बाजार से वापस मंगवा लिए हैं. कंपनी का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा उनकी प्राथमिकता है और इन बैचों में 'सेर्यूलाइड' (Cereulide) नाम का खतरनाक टॉक्सिन होने की आशंका है.

नेस्ले ने सलाह दी है कि जिन माता-पिता के पास ये बैच हैं, वे इन्हें अपने बच्चों को बिल्कुल न पिलाएं. हालांकि, अभी तक किसी बच्चे के बीमार होने की खबर नहीं मिली है, लेकिन सावधानी के तौर पर यह कदम उठाया गया है.

क्या है ये 'सेर्यूलाइड' (What is cereulide?)

सेर्यूलाइड एक बहुत ही खतरनाक जहर (टॉक्सिन) है, जो बैसिलस सेरियस (Bacillus cereus) नाम के बैक्टीरिया से बनता है. यह बैक्टीरिया आमतौर पर मिट्टी में पाया जाता है.

खाने में जहर: यह टॉक्सिन चावल, पास्ता, डेयरी प्रोडक्ट्स और मांस जैसे खाने को खराब कर सकता है.
गर्मी का असर नहीं: इसकी सबसे डरावनी बात यह है कि इस पर गर्मी का कोई असर नहीं होता. अगर खाने में एक बार यह टॉक्सिन बन गया, तो उसे उबालने, पकाने या माइक्रोवेव करने से भी यह खत्म नहीं होता.
कब बनता है: जब स्टार्च वाला खाना (जैसे चावल या दलिया) ज्यादा देर तक रूम टेम्परेचर पर छोड़ दिया जाता है, तो ये बैक्टीरिया एक्टिव होकर जहर बनाने लगते हैं.

क्या बेबी फॉर्मूला से फूड पॉइजनिंग हो सकती है?

ज्यादातर बेबी फॉर्मूला दूध (डेयरी) से बने होते हैं. दूध के अलावा इसमें डलने वाले तेल या अनाज के जरिए भी यह बैक्टीरिया फॉर्मूला में पहुंच सकता है. चूंकि यह बैक्टीरिया और इसका जहर गर्मी से नहीं मरता, इसलिए पाउडर में उबलता पानी डालने से भी खतरा कम नहीं होता. अगर आपके पास नेस्ले के प्रभावित बैच हैं, तो उन्हें फेंक देना ही सबसे बेहतर है.

सेर्यूलाइड का सेहत पर असर (Health Impact)

यह टॉक्सिन शरीर की कोशिकाओं (Cells) की 'एनर्जी फैक्ट्री' यानी माइटोकॉन्ड्रिया को नुकसान पहुंचाता है.

1. उल्टी और दस्त: इसे खाने के 1 से 6 घंटे के भीतर ही तेज उल्टी, जी मिचलाना और पेट में मरोड़ शुरू हो जाती है.
2. लिवर को खतरा: अगर शरीर में इस टॉक्सिन की मात्रा ज्यादा चली जाए, तो यह लिवर को गंभीर नुकसान पहुँचा सकता है.
3. आंतों और इम्यूनिटी पर हमला: यह आंतों की गुड बैक्टीरिया (जैसे लैक्टोबैसिलस) को खत्म कर देता है और शरीर की बीमारियों से लड़ने की ताकत (इम्यूनिटी) को कमजोर कर देता है.
4. लंबे समय का रिस्क: यह इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं को भी नुकसान पहुँचा सकता है, जिससे भविष्य में डायबिटीज जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है. छोटे बच्चे और बुजुर्गों के लिए यह ज्यादा खतरनाक है.

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बचाव के तरीके: इन बातों का रखें खास ख्याल (Prevention Tips)

सही तापमान: गर्म खाने को हमेशा 60°C से ऊपर गर्म रखें और ठंडी चीजों को 4°C से नीचे फ्रिज में रखें.
फ्रिज का इस्तेमाल: बचे हुए खाने को 2 घंटे के भीतर फ्रिज में रख दें. याद रखें, दोबारा गर्म करने से बैक्टीरिया मर सकते हैं, लेकिन पहले से बना हुआ 'सेर्यूलाइड' जहर खत्म नहीं होगा.
सावधानी: चावल, अनाज और क्रीम वाली डिशेज में यह बैक्टीरिया जल्दी पनपता है, इसलिए इन्हें स्टोर करते समय बहुत सावधानी बरतें.

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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