International Epilepsy Day 2026: मिर्गी के बारे में फैले हैं ये 3 बड़े भ्रम, जानिए दौरे पड़ने के दौरान सही फर्स्ट एड क्या है

Epilepsy myths and Facts: मिर्गी दिमाग में होने वाली असामान्य इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी के कारण होती है. इस दौरान व्यक्ति को दौरे (Seizures) पड़ते हैं, जिनमें शरीर का झटकना, कुछ देर के लिए होश खो देना या आंखों का ऊपर की ओर चढ़ जाना शामिल हो सकता है.

विज्ञापन
Read Time: 4 mins
International Epilepsy Day: मिर्गी दिमाग में होने वाली असामान्य इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी के कारण होती है.

International Epilepsy Day 2026: हर साल 9 फरवरी को मनाया जाने वाला अंतर्राष्ट्रीय मिर्गी दिवस हमें एक ऐसी बीमारी के बारे में सोचने का मौका देता है, जिसे आज भी दुनिया के सबसे ज्यादा गलत समझे जाने वाले न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर्स में गिना जाता है. मेडिकल साइंस ने भले ही बड़ी तरक्की कर ली हो, लेकिन मिर्गी (एपिलेप्सी) को लेकर डर, अफवाहें और सामाजिक कलंक आज भी कायम हैं. यही वजह है कि लाखों लोग इलाज योग्य होने के बावजूद सही समय पर डॉक्टर तक नहीं पहुंच पाते. आखिर मिर्गी क्या है और इलाज कैसे किया जा सकता है.

मिर्गी क्या है? सच्चाई को समझना जरूरी

मिर्गी दिमाग में होने वाली असामान्य इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी के कारण होती है. इस दौरान व्यक्ति को दौरे (Seizures) पड़ते हैं, जिनमें शरीर का झटकना, कुछ देर के लिए होश खो देना या आंखों का ऊपर की ओर चढ़ जाना शामिल हो सकता है. यह बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है बचपन से लेकर बुजुर्ग अवस्था तक. सबसे जरूरी बात यह है कि मिर्गी संक्रामक नहीं होती, न ही इससे व्यक्ति की बुद्धि, समझ या क्षमता पर कोई असर पड़ता है. सही इलाज मिलने पर ज्यादातर मरीज पूरी तरह सामान्य जीवन जीते हैं.

शहर और गांव में इलाज में क्यों है फर्क?

भारत में शहरी इलाकों में लोग आमतौर पर समय पर जांच और इलाज करवा लेते हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी कई लोग मिर्गी को झाड़-फूंक, पूजा-पाठ या अंधविश्वास से जोड़कर देखते हैं. इससे मेडिकल इलाज में देरी होती है और बीमारी और गंभीर बन जाती है.

मिर्गी के कारण और ट्रिगर (Causes and Triggers of Epilepsy)

मिर्गी के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे जेनेटिक कारण, दिमाग में संक्रमण, ट्यूमर या स्ट्रोक, सिर में गंभीर चोट, तेज बुखार, लो ब्लड शुगर, नींद की कमी या बहुत ज्यादा तनाव कुछ लोगों में तेज चमकती रोशनी या स्क्रीन दौरे को ट्रिगर कर सकती है, लेकिन यह बीमारी का कारण नहीं होती यह एक आम भ्रम है.

Add image caption here
Photo Credit: iStock

खतरनाक मिथ और उनका सच

मिर्गी से जुड़े कुछ मिथक बेहद नुकसानदायक हैं:

  • मिर्गी टीकों या दवाओं से होती है
  • यह मानसिक बीमारी है
  • दौरे के समय मुंह में चम्मच या धातु डालनी चाहिए.

ये सभी बातें पूरी तरह गलत हैं. दौरे के समय किसी के मुंह में कुछ डालना, हाथ-पैर पकड़ना या पानी पिलाना गंभीर चोट या दम घुटने का कारण बन सकता है.

दौरे के समय सही फर्स्ट एड क्या है?

  • घबराएं नहीं.
  • व्यक्ति को एक करवट लिटा दें.
  • गले या गर्दन के टाइट कपड़े ढीले करें.
  • दौरा अपने आप 1-2 मिनट में शांत हो जाता है.

कब तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए?

  • अगर थोड़े समय में बार-बार दौरे पड़ें.
  • दौरा 5 मिनट से ज्यादा चले.
  • व्यक्ति को पहली बार दौरा पड़ा हो.

तो तुरंत मेडिकल जांच जरूरी है. आंकड़ों के मुताबिक, 70–80% लोगों को दोबारा दौरा नहीं पड़ता, लेकिन सही डायग्नोसिस बेहद अहम है. सही दवाएं, बुखार के दौरों में एंटीपायरेटिक और जरूरत पड़ने पर 2-3 साल की मेंटेनेंस थेरेपी से 90% तक सफलता मिल सकती है.

Advertisement

मिर्गी के साथ सामान्य जीवन संभव है:

एक्सपर्ट्स मिर्गी कंट्रोल के लिए पांच स्तंभ बताते हैं:

  • सही जांच और नियमित दवा
  • पूरी नींद और ट्रिगर से बचाव
  • सीमित स्क्रीन टाइम
  • रेगुलर न्यूरोलॉजिस्ट फॉलो-अप
  • परिवार और समाज का सहयोग

सही देखभाल के साथ मिर्गी से पीड़ित व्यक्ति पढ़ सकता है, नौकरी कर सकता है, शादी कर सकता है और सामान्य पारिवारिक जीवन जी सकता है.

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

Advertisement
Featured Video Of The Day
Nitish Kumar Viral Video: Bihar Assembly में नीतीश ने ऐसा क्या कहा की माइक बंद कराना पड़ा?