HIV Epidemic in Pakistan: पाकिस्तान में HIV की सुनामी, तकरीबन 4000 बच्चे संक्रमित, बीते 15 साल में 200% बढ़े मामले, बड़ी मेडिकल लापरवाही

HIV Epidemic in Pakistan: सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन 4,000 बच्चों में से ज्यादातर को यह बीमारी जन्म से या उनके व्यवहार की वजह से नहीं हुई. 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के मुताबिक, इन बच्चों को उन अस्पतालों और क्लीनिकों में संक्रमण मिला जहां वे इलाज कराने गए थे.

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HIV Crisis in Pakistan: Nearly 4000 children infected | The HIV Epidemic in Pakistan

HIV Epidemic in Pakistan: पाकिस्तान के सिंध प्रांत से एक बेहद डराने वाली खबर सामने आई है. एक ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, सिंध में करीब 3,995 बच्चे HIV पॉजिटिव पाए गए हैं. यह आंकड़ा सिर्फ दर्ज किए गए मामलों का है, असल संख्या इससे भी ज्यादा हो सकती है. अकेले कराची में साल 2025 के दौरान 100 से ज्यादा नए मामले सामने आए हैं. यह स्थिति बताती है कि वहां का हेल्थ सिस्टम पूरी तरह से चरमरा गया है.

HIV infections rise in Pakistan:  WHO के अनुसार पाकिस्तान को पूर्वी भूमध्य क्षेत्र में मानव इम्यूनोडिफ़िशिएंसी वायरस (एचआईवी) महामारियों के सबसे तेजी से बढ़ने वाले देशों में से एक है. पिछले 15 वर्षों में नए संक्रमणों में 200% की वृद्धि हुई है - 2010 में 16,000 से बढ़कर 2024 में 48,000 हो गई है.

अस्पताल बने बीमारी का घर: लापरवाही या अपराध?

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन 4,000 बच्चों में से ज्यादातर को यह बीमारी जन्म से या उनके व्यवहार की वजह से नहीं हुई. 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के मुताबिक, इन बच्चों को उन अस्पतालों और क्लीनिकों में संक्रमण मिला जहां वे इलाज कराने गए थे. सुइयों का दोबारा इस्तेमाल, असुरक्षित इंजेक्शन और बिना जांचे खून चढ़ाया जाना इस तबाही की मुख्य वजह है. इसे सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि एक अपराध की तरह देखा जा रहा है.

झोलाछाप डॉक्टरों का आतंक

पाकिस्तान में मेडिकल रेगुलेशन की स्थिति इतनी खराब है कि पूरे देश में करीब 6 लाख से ज्यादा फर्जी (झोलाछाप) डॉक्टर प्रैक्टिस कर रहे हैं. इनमें से 40% अकेले कराची में हैं. ये फर्जी डॉक्टर बिना किसी रोक-टोक के क्लीनिक चला रहे हैं, पुरानी सुइयों का इस्तेमाल कर रहे हैं और मरीजों की जान जोखिम में डाल रहे हैं.

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2019 की त्रासदी से भी नहीं लिया सबक

यह पाकिस्तान के लिए पहली चेतावनी नहीं है. 2019 में 'रातोदेरो' में भी सैकड़ों बच्चे एक साथ संक्रमित हुए थे. साल 2019 में पाकिस्‍तान में राटोडेरो त्रासदी (Ratodero Tragedy) देखी गई. इस दौरान पाकिस्तान के सिंध प्रांत के राटोडेरो (लड़काना जिले) में एचआईवी (HIV) प्रकोप को देखा गया. ये एक बहुत बड़ा स्वास्थ्य संकट था. अप्रैल 2019 में, राटोडेरो में सैकड़ों बच्चों और कुछ महिलाओं में HIV पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई, जो कि 12 साल से कम उम्र के थे. 

तब सरकार ने बड़े-बड़े वादे किए थे कि सिस्टम सुधारा जाएगा, लेकिन 6 साल बाद भी हालात और बदतर हो गए हैं. पाकिस्तान मेडिकल एसोसिएशन (The Pakistan Medical Association's (PMA)  ने इसे 'हाई-लेवल अलर्ट' पर रखा है और अधिकारियों की सुस्ती पर सवाल उठाए हैं. 

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एशिया-प्रशांत क्षेत्र में दूसरे नंबर पर पाकिस्तान

हैरानी की बात यह है कि HIV के बढ़ते मामलों के कारण पाकिस्तान अब एशिया-प्रशांत देशों की लिस्ट में दूसरे नंबर पर पहुंच गया है. रिपोर्ट में इसे केवल मेडिकल इमरजेंसी नहीं, बल्कि एक संस्थागत सड़न (Institutional Rot) बताया गया है. भ्रष्टाचार और बुनियादी स्वास्थ्य मानकों की अनदेखी की कीमत अब मासूम बच्चों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ रही है.

इलाज के नाम पर सिर्फ इंतजार

पाकिस्तान में जो गिने-चुने HIV सेंटर हैं, वहां भी सुविधाओं का भारी अभाव है. टेस्ट किट की कमी, दवाओं (antiretroviral medicines) की किल्लत और ट्रेंड स्टाफ न होने की वजह से मरीजों को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटकना पड़ता है. सही समय पर जांच और इलाज न मिलना इस संकट को और गहरा बना रहा है.

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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