हर्निया के इलाज में देरी पड़ सकती है भारी, डॉक्टर से जानें कब यह बन सकता है जानलेवा

 हमारे पेट की मांसपेशियां अंगों को अपनी जगह पर रोक कर रखती हैं. जब ये मांसपेशियां किसी वजह से कमजोर हो जाती हैं या उनमें छेद हो जाता है, तो अंदर के अंग (जैसे आंतें) उस कमजोर हिस्से से बाहर की ओर उभरने लगते हैं. इसी उभार या सूजन को हर्निया कहते हैं.

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डॉ. अपर्णा के अनुसार, हर्निया मुख्य रूप से तीन स्टेज में हो सकता है.

Hernia symptoms : हर्निया एक ऐसी समस्या है जिसे अक्सर लोग तब तक नजरअंदाज करते हैं जब तक कि उसमें दर्द न शुरू हो जाए. लेकिन क्या आप जानते हैं कि बिना दर्द वाला हर्निया भी अचानक इमरजेंसी का कारण बन सकता है? मुंबई के मशहूर अस्पतालों (सैफी, अपोलो और नमाह) की कंसल्टेंट सर्जन डॉ. अपर्णा गोविल भास्कर का कहना है कि हर्निया चाहे बच्चों में हो या बड़ों में, इसे हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है. आइए समझते हैं हर्निया क्या है, इसके प्रकार और सही समय पर इलाज क्यों जरूरी है.

आखिर हर्निया होता क्या है?

 हमारे पेट की मांसपेशियां अंगों को अपनी जगह पर रोक कर रखती हैं. जब ये मांसपेशियां किसी वजह से कमजोर हो जाती हैं या उनमें छेद हो जाता है, तो अंदर के अंग (जैसे आंतें) उस कमजोर हिस्से से बाहर की ओर उभरने लगते हैं. इसी उभार या सूजन को हर्निया कहते हैं.

Photo Credit: ians

हर्निया के तीन रूप: साधारण से खतरनाक तक

डॉ. अपर्णा के अनुसार, हर्निया मुख्य रूप से तीन स्टेज में हो सकता है:

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1. साधारण हर्निया

इसमें आंतें या अंदर का अंग मांसपेशियों के कमजोर हिस्से से बाहर आ जाता है, लेकिन वह वहाँ फँसता नहीं है.

2. फंसा हुआ हर्निया (इंकार्सरेटेड हर्निया)

इसमें आंतें बाहर निकलकर उसी जगह फँस जाती हैं और वापस अंदर नहीं जातीं.

3. खतरनाक हर्निया (स्ट्रैंग्युलेटेड हर्निया)

जब फंसी हुई आंतों तक खून की सप्लाई बंद हो जाती है, तब यह स्थिति बनती है. इससे आंतें खराब हो सकती हैं और गैंग्रीन जैसी गंभीर समस्या हो सकती है.

फंसा हुआ और खतरनाक हर्निया दोनों ही इमरजेंसी स्थिति माने जाते हैं और इनमें तुरंत ऑपरेशन करना जरूरी होता है. इसी वजह से डॉक्टर सभी तरह के हर्निया में सर्जरी की सलाह देते हैं, चाहे हर्निया साधारण ही क्यों न हो.

हर्निया की सर्जरी में बाहर निकले हुए अंग को उसकी सही जगह पर वापस रखा जाता है और मांसपेशियों के कमजोर हिस्से को मजबूत करने के लिए जाली (मेश) लगाई जाती है, ताकि हर्निया दोबारा न हो.

हर्निया का इलाज कैसे किया जाता है

हर्निया की सर्जरी दो तरीकों से की जाती है ओपन सर्जरी और लेप्रोस्कोपिक सर्जरी. सर्जरी के बाद अधिकतर मरीज 36 से 72 घंटे के अंदर घर जा सकते हैं. कई मामलों में मरीज उसी दिन घर चला जाता है.

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ओपन हर्निया सर्जरी

इस सर्जरी में मरीज को लोकल या स्पाइनल एनेस्थीसिया दिया जाता है, जिससे शरीर का निचला हिस्सा सुन्न हो जाता है. कुछ मामलों में जनरल एनेस्थीसिया भी दिया जा सकता है.  सर्जन हर्निया वाली जगह पर चीरा लगाता है. फिर बाहर निकली आंतों को धीरे-धीरे अंदर उनकी सही जगह पर वापस डाल दिया जाता है या जरूरत पड़ने पर हटा दिया जाता है. इसके बाद कमजोर मांसपेशियों को टांकों से बंद किया जाता है और उन्हें मजबूत करने के लिए मेश लगाया जाता है, जिससे हर्निया फिर से न हो.
आजकल ओपन सर्जरी बहुत कम की जाती है. यह आमतौर पर बहुत बड़े या बार-बार होने वाले हर्निया में ही की जाती है.

लेप्रोस्कोपिक हर्निया सर्जरी

यह सर्जरी आमतौर पर जनरल एनेस्थीसिया में की जाती है. इसमें पेट के अंदर गैस भरी जाती है ताकि अंदर का हिस्सा साफ दिखाई दे. इसके बाद बहुत छोटे-छोटे कट लगाए जाते हैं और कैमरे व खास उपकरणों की मदद से हर्निया को ठीक किया जाता है. इस सर्जरी में भी अक्सर मेश लगाया जाता है. लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के बाद मरीज जल्दी ठीक होता है. रिसर्च के अनुसार, इस सर्जरी के बाद मरीज ओपन सर्जरी की तुलना में लगभग एक हफ्ता पहले अपनी रोज़मर्रा की जिंदगी में लौट आता है.

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रोबोटिक हर्निया सर्जरी

आजकल हर्निया की सर्जरी रोबोटिक तकनीक से भी की जा रही है. इसमें सर्जन को अंदर का दृश्य ज्यादा साफ दिखाई देता है. यह तरीका खासकर जटिल हर्निया के मामलों में काफी मददगार होता है.

किस तरह की सर्जरी होगी?

किस मरीज के लिए कौन-सी सर्जरी सही है, यह हर्निया के आकार, प्रकार और उसकी जगह पर निर्भर करता है. इसके अलावा डॉक्टर मरीज की उम्र, उसकी सेहत और जीवनशैली को ध्यान में रखकर ही सर्जरी का तरीका तय करते हैं.

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अगर आपको हर्निया है, तो समय पर डॉक्टर को दिखाना और इलाज करवाना बहुत जरूरी है. इससे दर्द, इमरजेंसी ऑपरेशन और आंतों के रुकने जैसी गंभीर परेशानियों से बचा जा सकता है और जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है.

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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