इस साल दिल्ली में H1N1 यानि स्वाइन फ्लू के मामले पिछले साल की तुलना में काफी ज्यादा सामने आ रहे हैं. आंकड़ों के मुताबिक, 20 अगस्त तक दिल्ली में H1N1 संक्रमण के 1,777 मामले दर्ज किए जा चुके हैं. वहीं, पिछले साल इस समय ये संख्या सिर्फ 229 थी. अस्पतालों की OPD में भी फ्लू जैसे लक्षणों वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है. डॉक्टर्स का कहना है कि इस बार कुछ मरीजों में बीमारी सामान्य फ्लू से ज्यादा गंभीर रूप लेती दिख रही है.
हालांकि, राहत की बात यह है कि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने साफ कर दिया है कि फिलहाल देश में H1N1 का कोई नया या ज्यादा खतरनाक स्ट्रेन नहीं फैल रहा है. यानी इसे महामारी जैसी स्थिति मानने की जरूरत नहीं है. फिर सवाल ये है कि H1N1 के मामले अचानक इतनी तेजी से क्यों बढ़ रहे हैं?
अगर वायरस नया नहीं है, तो केस बढ़ क्यों रहे हैं?
दिल्ली AIIMS के मेडिसिन डिपार्टमेंट के प्रोफेसर डॉ. अनिमेष के मुताबिक, इसकी सबसे बड़ी वजह वायरस में समय-समय पर होने वाले छोटे बदलाव हैं. उन्होंने बताया कि कुछ साल पहले जो वायरस फैला था, लोगों के शरीर में उसके खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो गई थी. लेकिन इन्फ्लूएंजा वायरस लगातार छोटे-छोटे बदलाव करता रहता है. ऐसे में पहले बनी इम्यूनिटी उतनी प्रभावी नहीं रह जाती और लोग दोबारा संक्रमण की चपेट में आ सकते हैं.
उनका कहना है कि फिलहाल कई चीजें वायरस के पक्ष में काम कर रही हैं, जिनमें मौसम, लोगों की संवेदनशीलता और संक्रमण का फैलाव शामिल है. यही वजह है कि अभी वायरस तेजी से बढ़ रहा है.
डॉक्टर्स को क्या अलग दिखाई दे रहा है?
डॉ. अनिमेष बताते हैं कि 2 से 3 महीने पहले की तुलना में अब मरीजों की संख्या साफ तौर पर बढ़ी है. उनकी OPD में रोजाना 15 से 20 फ्लू के मरीज पहुंच रहे हैं. हैरान करने वाली बात ये है कि इस बार सिर्फ बुखार और खांसी ही नहीं, बल्कि कई मरीजों को सांस लेने में तकलीफ, निमोनिया, डायरिया और यहां तक कि किडनी से जुड़ी जटिलताएं भी हो रही हैं. कुछ लोगों में शुरुआती इंफेक्शन ठीक होने के बाद भी दूसरी तरह के इन्फेक्शन देखे जा रहे हैं.
इस बार खांसी ज्यादा कर रही है परेशान
फोर्टिस अस्पताल की संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. नेहा रस्तोगी कहती हैं कि इस सीजन में मरीजों के लक्षण थोड़े अलग नजर आ रहे हैं. उनका कहना है कि तेज बुखार आमतौर पर पहले 3-4 दिनों तक रहता है, लेकिन सबसे बड़ी परेशानी खांसी बन रही है. कई मरीजों में खांसी लंबे समय तक बनी रहती है और आसानी से ठीक नहीं हो रही. इसके पीछे प्रदूषण भी एक वजह हो सकता है.
डॉ. रस्तोगी के मुताबिक, इस बार श्वसन संबंधी समस्याओं के साथ-साथ पेट से जुड़े लक्षण भी ज्यादा सामने आ रहे हैं. डायरिया, पेट दर्द और ऐंठन वाले मरीज भी बड़ी संख्या में मिल रहे हैं.
क्या वायरस पहले से ज्यादा खतरनाक हो गया है?
AIIMS के वायरोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. आशीष चौधरी कहते हैं कि ऐसा मानना सही नहीं होगा. उनके मुताबिक H1N1 वायरस 2009 की स्वाइन फ्लू महामारी के बाद से सीजनल फ्लू का हिस्सा बन चुका है और हर साल छोटे बदलावों के साथ वापस आता है.
वह कहते हैं कि कुछ साल ऐसे होते हैं जब मामलों की संख्या अचानक बढ़ जाती है. इसका मतलब यह नहीं कि वायरस ज्यादा घातक हो गया है. ज्यादातर मरीज अभी भी हल्के लक्षणों के साथ ठीक हो रहे हैं.
किन लोगों को ज्यादा खतरा है?
डॉक्टर का कहना है कि H1N1 का खतरा छोटे बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और पहले से किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों में अधिक होता है.
इसके अलावा जो लोग फेफड़ों की बीमारी, हार्ट डिजीज, डायबिटीज या कमजोर इम्यूनिटी वाले होते हैं, उनमें भी H1N1 तेजी से गंभीर रूप ले सकता है. ऐसे लोगों में निमोनिया और ऑक्सीजन की जरूरत पड़ने की संभावना भी ज्यादा होती है.
कब लेनी चाहिए एंटीवायरल दवा?
डॉक्टर्स का कहना है कि हर फ्लू मरीज को एंटीवायरल दवा की जरूरत नहीं होती. अगर लक्षण हल्के हैं, तो आमतौर पर आराम, पर्याप्त पानी और डॉक्टर की सलाह से सामान्य इलाज काफी होता है. लेकिन हाई-रिस्क कैटेगरी के मरीजों या गंभीर लक्षण वाले लोगों को डॉक्टर ओसेल्टामिविर जैसी एंटीवायरल दवाएं दे सकते हैं. एक्सपर्ट के मुताबिक ये दवाएं तब सबसे ज्यादा असर करती हैं जब बीमारी शुरू होने के 48 घंटे के अंदर ले ली जाएं.
क्या घबराने की जरूरत है?
डॉक्टर का इस बारे में साफ कहना है कि किसी भी स्थिति में घबराने की नहीं, सतर्क रहने की जरूरत है. H1N1 के मामले फिलहाल भले ही काफी बढ़ रहे हैं, लेकिन फिलहाल किसी नए या अत्यधिक खतरनाक स्ट्रेन के सबूत नहीं मिले हैं.
फिर भी अगर तेज बुखार कई दिनों तक बना रहे, सांस लेने में दिक्कत हो, ऑक्सीजन लेवल गिरने लगे या व्यक्ति पहले से किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहा हो, तो इलाज में देर नहीं करनी चाहिए.
कैसे करें बचाव
अगर आप H1N1 जैसे संक्रमण से बचना चाहते हैं, तो कोशिश करें कि भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनकर जाएं, हाथों की सफाई का ध्यान रखें और जरूरत पड़ने पर फ्लू वैक्सीन लगवाएं. इन बचाव से ही आप H1N1 से सुरक्षित रह सकते हैं.
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