आंखे हमारे शरीर का वो हिस्सा हैं जिनके बगैर जिंदगी में रंग अधूरे रह जाते हैं. आंखों से ही हम दुनिया को देखते हैं. लेकिन कई लोगों के लिए ये रंग बिरंगी दुनिया फीकी रहती है क्योंकि वो देख नहीं पाते हैं. लेकिन कहते हैं ना शरीर का हर एक अंग एक-दूसरे से जुड़ा रहता है. ठीक उसी तरह से आपकी आंखों की रोशनी का कनेक्शन आपके दांतों के साथ है. सोशल मीडिया पर एक ऐसे शख्स की कहानी सामने आई है जिसमें वो देख नहीं पाता था लेकिन विज्ञान के एक चमत्कार ने उसकी आंखों की रोशनी को वापस लाने में मदद की है.
इस वीडियो में आप देख सकते हैं कि ब्रेंट चैपमैन नाम का एक शख्स आंखों पर चश्मा लगाए बाहर देख रहा है. ऐसा हुआ उनके दांतों की वजह से. बता दें कि ये एक पूरा प्रोसेस है जिसे OOKP (ऑस्टियो-ओडॉन्टो-केराटोप्रोस्थेसिस) कहा जाता है. जिसमें सर्जरी के जरिए उनकी आंखों की रोशनी को वापस लाने में मदद मिलती है. आपको बता दें कि ब्रेंट चैपमैन उन तीन लोगों में से एक हैं, जिन पर टूथ इन आई सर्जरी की गई है. चलिए जानते हैं क्या है ये सर्जरी और कैसे करती है काम.
क्या है OOKP सर्जरी?
आपको बता दें कि ये इलाज उन मरीजों के लिए आखिरी इलाज का ऑप्शन होता है, जो कॉर्निया को गंभीर नुकसान पहुंचने की वजह से अंधे हो जाते हैं. इस प्रोसेस के बारे में नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में भी सारी जानकारी दी गई है. ऑस्टियो-ओडॉन्टो-केराटोप्रोस्थेसिस ( OOKP) सर्जरी होती क्या है और ये कैसे काम करती है .
कैसे करती है काम
इस सर्जरी में डॉक्टर सबसे पहले मरीज का एक दाँत निकालते हैं. ये दांत आमतौर पर कैनाइन ( यानि की आपके नुकीले दांत) होता है. इस दांत को निकालते समय ध्यान रखा जाता है कि इसे जबड़े की हड्डी के साथ निकाला जाए. इसके बाद इस दांत में एक खास लेंस को फिट करने के लिए उसे तैयार किया जाता है. इसके बाद दांत और लेंस की इस संरचना को कुछ महीनों के लिए मरीज के गाल के अंदर फिट कर दिया जाता है. ऐसा करने के पीछे की वजह होती है कि इस दांत में जिंदा टिश्यू और ब्लड वेसल्स को विकसित किया जा सके.
कुछ महीने का समय लेने के बाद इसको गाल से बाहर निकालकर दांतों पर लगाया जाता है. क्योंकि इसे बनाने में मरीज का खुद का दांत और हड्डी का इस्तेमाल किया जाता है इसलिए आपका शरीर इसे रिजेक्ट कर देगा इसकी संभावना बेहद कम होती है. हालांकि ऐसा नहीं है कि इस प्रोसेस के बाद आंखों से बिल्कुल साफ नजर आने लगता है लेकिन अमूमन मरीजों को कामचलाऊ विजन वापस से मिल जाता है. वो खुद से चल फिर सकते हैं, बड़े अक्षरों को पढ़ सकते हैं और अपने सारे काम खुद से कर सकते हैं.
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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)













