Epilepsy Treatment: दुनिया भर में लाखों बच्चे मिर्गी (Epilepsy) जैसी गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी से जूझ रहे हैं. यह एक ऐसी कंडीशन है जिसमें दिमाग की एब्नॉर्मल इलेक्ट्रिकल एक्टिविटीके कारण बार-बार दौरे (Seizures) पड़ते हैं. इन दौरों के दौरान बच्चे को कुछ सेकंड के लिए खाली घूरना, शरीर में तेज झटके आना, भ्रम की स्थिति या कुछ समय के लिए होश खो देना जैसी समस्याएं हो सकती हैं. ग्लोबल लेवल पर करीब 65 से 70 मिलियन लोग मिर्गी से प्रभावित हैं, और इनमें बड़ी संख्या बच्चों की है. भारत में भी स्थिति कम चिंताजनक नहीं है. अनुमान के मुताबिक 10 से 15 लाख बच्चे किसी न किसी रूप में मिर्गी से पीड़ित हैं. भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के अनुसार, हर 1000 बच्चों में 6 से 8 बच्चे पेडियाट्रिक एपिलेप्सी से प्रभावित होते हैं.
इनमें से कुछ मामलों में मिर्गी का एक दुर्लभ लेकिन गंभीर रूप भी होता है जिसे ड्रेवेट सिंड्रोम (Dravet Syndrome) कहा जाता है. यह बीमारी आमतौर पर बचपन के शुरुआती महीनों में शुरू होती है और इसमें दौरे अक्सर दवाओं से भी पूरी तरह कंट्रोल नहीं हो पाते. लेकिन हाल ही में एक इंटरनेशनल क्लिनिकल ट्रायल ने इस बीमारी के इलाज में नई उम्मीद जगाई है. एक नई दवा पर किए गए शोध में पाया गया है कि इससे बच्चों में दौरों की संख्या लगभग 91% तक कम हो सकती है. यह खोज उन परिवारों के लिए उम्मीद की किरण बन सकती है जो लंबे समय से इस दुर्लभ बीमारी से जूझ रहे हैं.
क्या है Dravet Syndrome?
ड्रेवेट सिंड्रोम (Dravet Syndrome) एक दुर्लभ आनुवंशिक (Genetic) मिर्गी है, जो आमतौर पर शिशु अवस्था में शुरू होती है. यह बीमारी अक्सर SCN1A जीन में बदलाव (mutation) के कारण होती है. यह जीन दिमाग में मौजूद न्यूरॉन्स के सही कामकाज के लिए जरूरी होता है. जब इस जीन में बदलाव होता है, तो दिमाग की विद्युत एक्टिविटी असामान्य हो जाती है और बार-बार दौरे पड़ने लगते हैं. यह बीमारी केवल दौरों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि बच्चों के विकास पर भी असर डाल सकती है.
ड्रेवेट सिंड्रोम के प्रमुख लक्षण | Symptoms of Dravet Syndrome
इस बीमारी की सही पहचान आमतौर पर जेनेटिक टेस्टिंग और मेडिकल जांच के बाद ही हो पाती है. इसके कुछ सामान्य लक्षण इस प्रकार हो सकते हैं:
- बार-बार और लंबे समय तक दौरे पड़ना.
- बच्चों में ग्रोथ धीमी होना.
- चलने-फिरने या संतुलन में कठिनाई.
- खाने-पीने में समस्या.
- व्यवहार और सीखने से जुड़ी दिक्कतें.
भारत में इस बीमारी के इलाज के विकल्प अभी भी सीमित हैं. कई बच्चों में दवाओं के बावजूद दौरे पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो पाते.
नई दवा जोरेवुनर्सेन क्यों है खास? | Why is the new drug Zorevunersen Special?
हाल ही में यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन और ग्रेट ऑरमंड स्ट्रीट अस्पताल के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक अंतरराष्ट्रीय क्लिनिकल ट्रायल में एक नई दवा ज़ोरेवुनर्सेन के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं. इस शोध में 81 बच्चों पर अध्ययन किया गया और पाया गया कि इस दवा के इस्तेमाल से बच्चों में दौरों की संख्या 91% तक कम हो गई.
यह दवा खास इसलिए है क्योंकि यह सीधे SCN1A जीन से जुड़ी समस्या को टारगेट करती है. इसका उद्देश्य शरीर में मौजूद हेल्दी जीन की एक्टिविटी को बढ़ाकर जरूरत प्रोटीन का उत्पादन बढ़ाना है, जिससे ब्रेन की बैलेंस इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी हो सके.
शोधकर्ताओं ने यह भी बताया कि इस दवा के कुछ हल्के साइड इफेक्ट देखे गए, लेकिन कुल मिलाकर इसके परिणाम काफी आशाजनक हैं. फिलहाल यह शोध फेज-3 ट्रायल की दिशा में आगे बढ़ रहा है.
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह खोज?
भारत में दुर्लभ बीमारियों के इलाज की पहुंच अभी भी सीमित है. कई ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में जेनेटिक टेस्टिंग और स्पेशलिस्ट इलाज आसानी से उपलब्ध नहीं है.
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारत अंतरराष्ट्रीय शोध संस्थानों के साथ मिलकर ऐसे क्लिनिकल ट्रायल और नई दवाओं को अपनाए, तो हजारों बच्चों को बेहतर इलाज मिल सकता है.
उम्मीद की नई किरण
ड्रेवेट सिंड्रोम जैसी दुर्लभ बीमारियां लंबे समय से परिवारों के लिए चुनौती बनी हुई हैं. लेकिन, नई दवा जोरेवुनर्सेन पर हुए शोध ने यह दिखाया है कि मॉडर्न साइंस और जीन जीन बेस्ड ट्रीटमेंट भविष्य में इन बीमारियों को कंट्रोल करने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं.
अगर आगे के ट्रायल भी सफल रहते हैं, तो यह इलाज दुनिया भर में हजारों बच्चों के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है और शायद पहली बार ड्रेवेट सिंड्रोम से जूझ रहे परिवारों को एक उम्मीद दे सकता है.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)














