कैसर इलाज को नई दिशा देने वाले डॉ. नोरी दत्तात्रेयुडु को पद्म भूषण, दशकों की साधना को मिला देश का सलाम

Padma Bhushan Award: जाने-माने रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. नोरी दत्तात्रेयुडु को मेडिसिन के क्षेत्र में उनके बेहतरीन योगदान के लिए पद्म भूषण से सम्मानित किया गया है.

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रविवार को गृह मंत्रालय ने 2026 के पद्म पुरस्कारों की सूची जारी की.

भारत के लिए यह बेहद गर्व का पल है. जाने-माने रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. नोरी दत्तात्रेयुडु (Dr. Nori Dattatreyudu) को मेडिसिन के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए पद्म भूषण से सम्मानित किया गया है. रविवार को गृह मंत्रालय ने 2026 के पद्म पुरस्कारों की सूची जारी करते हुए इसकी घोषणा की. यह सम्मान कैंसर के इलाज (Cancer Treatment) को नई दिशा देने और दुनियाभर में मरीजों के बेहतर नतीजों के लिए किए गए उनके दशकों लंबे काम की पहचान है. 

पद्म पुरस्कार 2026 की मुख्य बातें:

  • पद्म पुरस्कार भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल हैं.
  • हर साल गणतंत्र दिवस के अवसर पर इनकी घोषणा होती है.
  • 2026 के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कुल 131 पुरस्कारों को मंजूरी दी.

इनमें शामिल हैं:

  • 5 पद्म विभूषण
  • 13 पद्म भूषण
  • 113 पद्म श्री

पुरस्कार राष्ट्रपति भवन में मार्च–अप्रैल में औपचारिक समारोह में दिए जाएंगे.

डॉ. नोरी दत्तात्रेयुडु क्यों खास हैं?

  • वे विश्व-प्रसिद्ध भारतीय रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट हैं.
  • कई दशकों से कैंसर रिसर्च और इलाज के क्षेत्र में सक्रिय.
  • अमेरिकी नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट द्वारा स्पॉन्सर्ड कई क्लिनिकल ट्रायल्स के प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर रहे.

कैंसर इलाज में ऐतिहासिक योगदान

हाई-डोज-रेट ब्रैकीथेरेपी पर शुरुआती और प्रभावशाली काम. इस तकनीक से इन कैंसरों के इलाज में बड़ा बदलाव आया:

  • गर्भाशय ग्रीवा कैंसर.
  • मूत्र प्रणाली कैंसर.
  • छाती, सिर और गर्दन के कैंसर.
  • रिमोट आफ्टर-लोडिंग ब्रैकीथेरेपी से.
  • कैंसर टिशू पर सटीक रेडिएशन.
  • हेल्दी सेल्स को कम नुकसान.

वैश्विक पहचान और सम्मान

  • 1970 के दशक में शुरू हुई यह तकनीक आज दुनिया भर में स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट.
  • लाखों मरीजों को मिल चुका है इसका लाभ.
  • 2014 में अमेरिका का प्रतिष्ठित एलिस आइलैंड मेडल ऑफ ऑनर मिला.
  • 2015 में भारत सरकार ने पद्म श्री से सम्मानित किया.
  • अमेरिका के टॉप डॉक्टरों में शामिल, खासकर महिलाओं में कैंसर इलाज के लिए.

गांव से वैश्विक मंच तक की यात्रा

  • जन्म: आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले के मंताडा गांव में.
  • एमबीबीएस: कुरनूल मेडिकल कॉलेज.
  • पोस्टग्रेजुएशन: उस्मानिया मेडिकल कॉलेज.
  • साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर विश्व स्तर पर पहचान बनाई.

डॉ. नोरी दत्तात्रेयुडु की यह उपलब्धि न सिर्फ मेडिकल जगत के लिए, बल्कि हर युवा के लिए प्रेरणा है कि समर्पण, ज्ञान और मेहनत से दुनिया बदली जा सकती है.
 

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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