दरभंगा में बर्ड फ्लू की दस्तक: जानें क्या है यह बीमारी और कैसे बचें?

Bird Flu: बिहार के दरभंगा में बर्ड फ्लू की पुष्टि होन के बाद राज्य सरकार ने लोगों से अपील की है कि वो सतर्क रहें. आइए जानते हैं क्या है बर्ड फ्लू, इसके लक्षण और बचाव के उपाय.

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Bird Flu: क्या है बर्ड फ्लू?

Bird Flu: बिहार में बर्ड फ्लू फैलने की पुष्टि होने के बाद वहां पर राज्य सरकार ने नई एडवाइजरी जारी की है. बता दें कि पटना के पीसी कॉलोनी, कंकड़बाग के जू-सेक्टर पार्क और पटना हाईकोर्ट परिसर में कौओं और मुर्गियों की हुई अचानक मौत के बाद बर्ड फ्लू (H5N1) की पुष्टि कर दी गई है.बर्ड फ्लू की वजह से मौत होने का शक होने पर इन नमूनों को जांच के लिए भेपाल भेजा गया था. वहां से रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद प्रशासन ने प्रभावित इलाके के एक किलोमीटर क्षेत्र को संक्रमित घोषित कर दिया.

बता दें कि इस संक्रमण को बढ़ने से रोकने के लिए अब तक लगभग 4575 मुर्गियों को मारा जा चुका है. वहीं, 9662 अंडे और 530 किलो दाना भी नष्ट कर दिया गया है.  इसके साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में दवा का छिड़काव भी किया गया है. प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है. 

पटना जू में पक्षी वार्ड को सैनिटाइज किया जा रहा है और डॉक्टरों की विशेष टीम पक्षियों की सेहत पर लगातार नजर रख रही है. बर्ड फ्लू की वजह से पटना जू को 7 मार्च तक बंद कर दिया गया है. 

क्या है बर्ड फ्लू? (What is Bird Flu)

बर्ड फ्लू, जिसे वैज्ञानिक भाषा में एवियन इन्फ्लूएंजा कहा जाता है, पक्षियों में होने वाली एक संक्रामक वायरल बीमारी है. यह मुख्य रूप से जंगली बत्तखों और गीज़ जैसे जलपक्षियों में पाया जाता है. लेकिन जब यह वायरस H5N1 जैसे घातक रूप में बदलता है, तो यह मुर्गीपालन (पोल्ट्री) और कभी-कभी इंसानों के लिए भी जानलेवा साबित हो सकता है.

कैसे फैलता है संक्रमण?

इंसानों में यह वायरस आमतौर पर संक्रमित पक्षी के सीधे संपर्क में आने से फैलता है. संक्रमण के मुख्य स्रोत हैं:

  • बीमार या मृत पक्षियों को छूना.
  • पक्षियों की लार, बीट (मल) या नाक के स्राव के संपर्क में आना.
  • दूषित पिंजरे, मिट्टी या पानी का इस्तेमाल.

ध्यान दें: सामान्य फ्लू का टीका बर्ड फ्लू से सुरक्षा नहीं देता है, इसलिए अतिरिक्त सावधानी बरतनी जरूरी है.

इंसानों में लक्षण: कब हों सावधान?

संक्रमित पक्षी के संपर्क में आने के 2 से 8 दिनों के भीतर लक्षण दिख सकते हैं. इनमें शामिल हैं:

  • तेज बुखार और खांसी.
  • गले में खराश और मांसपेशियों में दर्द.
  • सांस लेने में तकलीफ (गंभीर मामलों में).
  • आंखों में जलन या लालिमा (कंजंक्टिवाइटिस).
  • सिरदर्द और अत्यधिक थकान.

बचाव के लिए अपनाएं ये 5 जरूरी कदम

  • स्वास्थ्य विशेषज्ञों और प्रशासन ने नागरिकों के लिए कुछ जरूरी गाइडलाइंस जारी की हैं:
  • पक्षियों से दूरी बनाएं: मृत या बीमार दिखने वाले पक्षियों के पास न जाएं. यदि कहीं पक्षी मरे हुए दिखें, तो तुरंत स्थानीय पशुपालन विभाग को सूचित करें.
  • सफाई का रखें ख्याल: मुर्गियों या अंडों को छूने के बाद अपने हाथों को साबुन और पानी से कम से कम 20 सेकंड तक अच्छी तरह धोएं.
  • मांस-अंडे को सही से पकाएं: चिकन और अंडों को अच्छी तरह पकाकर ही खाएं. इन्हें कम से कम 75°C के तापमान पर पकाएं ताकि वायरस खत्म हो जाए. कच्चा या अधपका मांस बिल्कुल न खाएं.
  • हाथों को चेहरे से दूर रखें: बिना हाथ धोए अपनी आंखों, नाक या मुंह को न छुएं.
  • सुरक्षा उपकरणों का प्रयोग: यदि आप पोल्ट्री व्यवसाय से जुड़े हैं, तो काम के दौरान मास्क, दस्ताने और चश्मे का प्रयोग अनिवार्य रूप से करें.

इलाज और जांच

यदि आपको लगता है कि आप किसी संक्रमित पक्षी के संपर्क में आए हैं और लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. डॉक्टर रेस्पिरेटरी सैंपल (नाक या गले का स्वाब) के जरिए इसकी जांच करते हैं. शुरुआती दौर में ओसेल्टामिविर (Antiviral) जैसी दवाओं से इसका प्रभावी इलाज संभव है.

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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