Budget 2026 Mental Health: भारत में अब तक फिजिकल हेल्थ पर तो काफी चर्चा और निवेश होता रहा है, लेकिन मानसिक स्वास्थ्य (मेंटल हेल्थ) लंबे समय तक उपेक्षित रहा. तनाव, डिप्रेशन, एंग्जायटी, नशे की लत और ट्रॉमा जैसी समस्याएं आज तेजी से बढ़ रही हैं, लेकिन इनके इलाज और रिसर्च के लिए देश में राष्ट्रीय स्तर के विशेष संस्थानों की कमी रही है. इसी कमी को दूर करने के लिए यूनियन बजट 2026-27 में सरकार ने एक ऐतिहासिक और दूरगामी फैसला लिया है.
संसद में लगातार नौवां बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घोषणा की कि भारत में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए नए नेशनल लेवल के मेंटल हेल्थ इंस्टिट्यूट स्थापित किए जाएंगे. सरकार ने माना कि फिलहाल देश में ऐसे संस्थानों की संख्या बहुत सीमित है, जो सिर्फ मानसिक स्वास्थ्य पर केंद्रित हों.
रांची और तेजपुर में बनेंगे नए राष्ट्रीय मेंटल हेल्थ संस्थान
बजट के अनुसार, रांची और तेजपुर में दो नए राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थान स्थापित किए जाएंगे. ये संस्थान इलाज, उच्च शिक्षा, ट्रेनिंग और पॉलिसी आधारित रिसर्च के लिए राष्ट्रीय केंद्र के रूप में काम करेंगे. इनका उद्देश्य उन क्षेत्रों तक बेहतर मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है, जहां अब तक स्पेशलाइज्ड सुविधाएं सीमित रही हैं खासकर पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत में.
उत्तर भारत में बनेगा NIMHANS 2
इस बजट की सबसे बड़ी घोषणा मानी जा रही है NIMHANS 2, यानी बेंगलुरु स्थित नेशनल मेंटल हेल्थ और इंस्टिट्यूट ऑफ न्यूरो साइंस के मॉडल पर एक दूसरा कैंपस. यह नया NIMHANS कैंपस उत्तर भारत में स्थापित किया जाएगा, जहां अब तक एडवांस मेंटल हेल्थ और न्यूरोसाइंस संस्थानों की भारी कमी रही है. यहां गंभीर मानसिक रोगों का विशेष इलाज, ट्रॉमा और आपदा से जुड़े मामलों का प्रबंधन, मनोचिकित्सा, मनोविज्ञान और न्यूरोसाइंस में हाई लेवल रिसर्च, पोस्टग्रेजुएट और स्पेशलिस्ट ट्रेनिंग पर खास ध्यान दिया जाएगा.
बढ़ती मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से निपटने की तैयारी
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, यह विस्तार भारत में बढ़ते मानसिक स्वास्थ्य बोझ जैसे डिप्रेशन, एंग्जायटी, एडिक्शन, दुर्घटनाओं और आपदाओं से जुड़े ट्रॉमा से निपटने की क्षमता को मजबूत करेगा. NIMHANS मॉडल को देश के दूसरे हिस्सों में लागू कर विशेषज्ञों की संख्या बढ़ाने और इलाज के नतीजों को बेहतर बनाने की कोशिश की जाएगी.
क्यों जरूरी है यह कदम?
भारत में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा ट्रीटमेंट गैप काफी बड़ा है. मरीजों की संख्या के मुकाबले डॉक्टर, काउंसलर और संस्थान बहुत कम हैं. हालांकि Tele MANAS जैसे कार्यक्रमों से काउंसलिंग तक पहुंच बढ़ी है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि स्थायी समाधान के लिए मजबूत संस्थागत ढांचा जरूरी है.
यूनियन बजट 2026 में मानसिक स्वास्थ्य पर दिया गया यह जोर बताता है कि सरकार अब इसे सिर्फ सामाजिक मुद्दा नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और आर्थिक विकास की प्राथमिकता मान रही है. रांची, तेजपुर और उत्तर भारत में नए संस्थानों की घोषणा एक लंबी अवधि के संरचनात्मक सुधार की दिशा में बड़ा कदम है.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)














