क्या इंसान 200 साल तक जी सकते हैं, क्या कहता है व्हेल में छिपा राज: रिसर्च

बोहेड व्हेल एक खास प्रकार की व्हेल है जो ठंडे समुद्री इलाकों में पाई जाती है. इसका साइज बहुत बड़ा होता है और ये धीरे-धीरे बढ़ती है. साइंटिस्ट ने पाया कि ये व्हेल बहुत कम बीमारी पड़ती है और इसमें कैंसर जैसी बीमारियां भी बहुत कम होती हैं. यह वजह है कि इस पर स्टडी की गई है.

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200 लंबों तक जी सकेंगे मनुष्य, व्हेल में छिपा है इसका राज!

How to Live 200 Years: आपको सुनकर यकीन नहीं होगा कि अब मनुष्य भी संभावित रूप से 200 साल तक जी सकते हैं, और इसका राज पृथ्वी के सबसे लंबे समय तक जीवित रहने वाले जीवों में से एक व्हेल में छिपा हो सकता है. ये दावा University of Rochester के वैज्ञानिकों द्वारा की गई एक स्टडी में सामने आया है. रिसर्चर्स ने Bowhead whale पर स्टडी की, जो लगभग दो सदियों यानि की दो सौ साल तक जीवित रहने के लिए जानी जाती है.  इस स्टडी में ये जानने की कोशिश की गई उस व्हेल में उन्होंने एक ऐसी प्रोटीन का बारे में जाना, जो इनकी लंबी उम्र और बीमारियों से लड़ने की क्षमता के बारे में समझा सकता है.

क्या है बोहेड व्हेल 

बता दें कि बोहेड व्हेल एक खास प्रकार की व्हेल है जो ठंडे समुद्री इलाकों में पाई जाती है. इसका साइज बहुत बड़ा होता है और ये धीरे-धीरे बढ़ती है. साइंटिस्ट ने पाया कि ये व्हेल बहुत कम बीमारी पड़ती है और इसमें कैंसर जैसी बीमारियां भी बहुत कम होती हैं. यह वजह है कि इस पर स्टडी की गई है.

बोहेड व्हेल में क्या है खास 

Nature में प्रकाशित इस अध्ययन में पाया गया कि ये व्हेल CIRBP नामक DNA-रिपेयर प्रोटीन का बहुत अधिक स्तर बनाती हैं. यह प्रोटीन DNA में होने वाले गंभीर नुकसान—जैसे डबल-स्ट्रैंड ब्रेक—को ठीक करने में मदद करता है, जो इंसानों में बुढ़ापे, कैंसर और अन्य बीमारियों से जुड़ा होता है. वैज्ञानिकों Vera Gorbunova और Andrei Seluanov ने पाया कि बोहेड व्हेल में यह प्रोटीन अन्य स्तनधारियों की तुलना में लगभग 100 गुना ज्यादा होता है.

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क्या कहती है स्टडी 

यह खोज यह समझाने में मदद कर सकती है कि इतने बड़े शरीर और अरबों कोशिकाओं वाला जीव लंबे समय तक जीने के बावजूद कैंसर से कैसे बचा रहता है. इसे Peto's Paradox कहा जाता है. इस सिद्धांत के अनुसार, बड़े और लंबे समय तक जीने वाले जीवों में कैंसर का खतरा अधिक होना चाहिए, लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता. शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि व्हेल की कोशिकाओं में वे जेनेटिक म्यूटेशन कम होते हैं, जो आमतौर पर कैंसर का कारण बनते हैं.

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इस खोज को और समझने के लिए वैज्ञानिकों ने CIRBP प्रोटीन के व्हेल वाले संस्करण को मानव कोशिकाओं और फल मक्खियों (fruit flies) में डाला. इसके परिणामस्वरूप DNA रिपेयर बेहतर हुआ और फल मक्खियों की उम्र भी बढ़ गई. शोध में यह भी सामने आया कि ठंडा तापमान कोशिकाओं में CIRBP प्रोटीन के उत्पादन को बढ़ा सकता है. इससे यह सवाल उठता है कि क्या कुछ पर्यावरणीय या जीवनशैली से जुड़े कारक इंसानों में भी इस प्रोटीन को प्रभावित कर सकते हैं.

हालांकि, वैज्ञानिकों का कहना है कि यह शोध अभी शुरुआती चरण में है और किसी भी मेडिकल उपयोग से पहले और अधिक रिसर्च की जरूरत है. फिर भी, यह अध्ययन उम्मीद जगाता है कि व्हेल की जीवविज्ञान को समझकर भविष्य में इंसानों में बुढ़ापे की प्रक्रिया को धीमा करने, कैंसर के खतरे को कम करने और जीवनकाल को बढ़ाने में मदद मिल सकती है.

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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