ANNUAL REPORT ON REGISTRATION OF BIRTHS AND DEATHS IN DELHI - 2024: दिल्ली में बच्चों के जन्म और मांओं की शिक्षा को लेकर एक बहुत ही दिलचस्प रिपोर्ट सामने आई है. साल 2024 के 'सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम' (CRS) के आंकड़ों को देखें, तो एक ऐसी बात पता चली है जो समाज के बदलते नजरिए को दिखाती है. अक्सर लोग सोचते हैं कि कम पढ़ी-लिखी महिलाओं के ही ज्यादा बच्चे होते हैं, लेकिन दिल्ली के ताजा आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं.
10वीं पास महिलाएं सबसे आगे, ग्रेजुएट मांओं की संख्या भी बढ़ी
रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में साल 2024 में कुल 3,06,459 बच्चों का जन्म हुआ. इसमें सबसे ज्यादा चौंकाने वाला आंकड़ा 'मैट्रिक' यानी 10वीं पास लेकिन ग्रेजुएट से कम पढ़ी-लिखी मांओं का है. कुल जन्म लेने वाले बच्चों में से करीब 41.47% बच्चे ऐसी मांओं के हैं जो 10वीं या 12वीं पास हैं. वहीं, 31.14% बच्चे उन मांओं के हैं जो ग्रेजुएट या उससे ज्यादा पढ़ी-लिखी हैं.
इसके उलट, जो महिलाएं निरक्षर (Illiterate) हैं, उनके बच्चों की संख्या कुल जन्म का सिर्फ 5.42% है. यानी आज के समय में दिल्ली में मां बनने वाली ज्यादातर महिलाएं पढ़ी-लिखी हैं.
क्या चौथे बच्चे का चलन खत्म हो रहा है?इस रिपोर्ट में बर्थ ऑर्डर यानी परिवार में बच्चे के स्थान पर भी गौर किया गया है. आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली वाले अब 'छोटा परिवार, सुखी परिवार' के मंत्र को गंभीरता से ले रहे हैं.
- कुल जन्मों में से 51.49% मामले पहले बच्चे के थे.
- 36.39% मामले दूसरे बच्चे के थे.
- यानी करीब 88% परिवारों में सिर्फ एक या दो ही बच्चे हैं.
- चौथे या उससे ज्यादा बच्चे वाले मामले सिर्फ 1.96% ही रह गए हैं.
खास बात यह है कि जो महिलाएं ग्रेजुएट हैं, उनमें चौथा बच्चा होने की संभावना सिर्फ 9.63% देखी गई, जबकि 10वीं पास महिलाओं में यह आंकड़ा 41% के करीब है. इससे साफ है कि शिक्षा का स्तर बढ़ने के साथ ही परिवार का साइज छोटा रखने की समझ भी बढ़ रही है.
मां बनने की सही उम्र क्या है?
डॉक्टरों का मानना है कि 18-19 साल की उम्र में मां बनना सेहत के लिए ठीक नहीं होता. दिल्ली की रिपोर्ट में अच्छी बात यह है कि 19 साल से कम उम्र में मां बनने वाली लड़कियों की संख्या सिर्फ 2.57% है. सबसे ज्यादा बच्चे 25 से 29 साल (36.98%) की उम्र वाली महिलाओं के हुए हैं. वहीं, 30 से 34 साल की उम्र में मां बनने वाली महिलाओं की संख्या भी 24.57% है, जो दिखाता है कि अब महिलाएं करियर और मैच्योरिटी के बाद ही परिवार बढ़ा रही हैं.
अस्पताल में जन्म लेना बना पहली पसंद
दिल्ली में अब घर पर डिलीवरी (Domiciliary Birth) का चलन लगभग खत्म होने की कगार पर है. साल 2024 में 96.09% बच्चों का जन्म अस्पतालों में हुआ. इसमें से भी 62.56% सरकारी अस्पतालों में और 33.52% प्राइवेट अस्पतालों में हुए. यह दिल्ली के बेहतर होते हेल्थ सिस्टम और लोगों की जागरूकता का सबूत है.
लिंगानुपात (Sex Ratio)
दिल्ली में साल 2024 का सेक्स रेशियो 920 रहा. यानी हर 1000 लड़कों पर 920 लड़कियों ने जन्म लिया. हालांकि, 2023 के मुकाबले इसमें मामूली गिरावट आई है, लेकिन 2005 (822) के मुकाबले हम बहुत बेहतर स्थिति में हैं.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)














