यमुनानगर जिले से एक बेहद सनसनीखेज और दिल दहला देने वाला मेडिकल लापरवाही का मामला सामने आया है. सिजेरियन ऑपरेशन के दौरान महिला के गर्भ में सर्जिकल स्पंज छोड़ देने और फिर करीब आठ महीने तक झूठी अल्ट्रासाउंड व सीटी स्कैन रिपोर्ट बनाकर सच्चाई छिपाने के आरोप में पुलिस ने पांच डॉक्टरों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है. यह कार्रवाई कैबिनेट मंत्री कृष्ण कुमार बेदी के सख्त आदेशों के बाद की गई है.
मामला जगाधरी के एसपी अस्पताल से जुड़ा है, जहां 13 मार्च 2025 को 21 वर्षीय मेहर खातून का सिजेरियन ऑपरेशन किया गया था. ऑपरेशन के दौरान कथित तौर पर महिला डॉक्टर डॉ. सोना गोयल ने गर्भ में सर्जिकल स्पंज छोड़ दिया. ऑपरेशन के बाद कुछ दिनों तक सब ठीक लगा, लेकिन फिर महिला को तेज दर्द, सूजन और कमजोरी होने लगी.
महिला को गलत इलाज की ओर धकेला गया
परिजनों का आरोप है कि अलग-अलग डायग्नोस्टिक सेंटरों पर बार-बार अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन कराए गए, लेकिन मिलीभगत के चलते सभी रिपोर्ट नॉर्मल बताई गईं. महिला को गलत इलाज की ओर धकेला गया और सच्चाई जानबूझकर छिपाई गई.
आखिरकार 24 मई 2025 को पंचकूला के एक निजी अस्पताल में जांच के दौरान खुलासा हुआ कि महिला के गर्भ में लंबे समय से सर्जिकल स्पंज फंसा हुआ है. इमरजेंसी ऑपरेशन कर पट्टी निकाली गई, इस दौरान महिला की आंत काटनी पड़ी और उसकी जान मुश्किल से बच पाई.
आठ महीने तक गुमराह किया
मामला ग्रीवेंस कमेटी की बैठक में उठा, जहां जांच में लापरवाही की पुष्टि हुई. इसके बाद मंत्री कृष्ण कुमार बेदी ने एसपी को सभी आरोपियों पर एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए. पुलिस ने डॉ. सोना गोयल, उनके पति डॉ. अनुप गोयल, डॉ. प्रदीप तेहलान, डॉ. निखिल मेहता और डॉ. कुलदीप चड्ढा के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
पीड़िता के पति ओसामा का कहना है,'मेरी पत्नी बिल्कुल ठीक थी, लेकिन डॉक्टरों की लापरवाही ने उसकी जिंदगी बर्बाद कर दी. आठ महीने तक हमें गुमराह किया गया. अब केस दर्ज हुआ है, हमें उम्मीद है कि हमें इंसाफ मिलेगा और दोषियों को सजा होगी.
पुलिस मामले की जांच में जुटी
वंही पर डॉक्टर अनूप गोयल ने कहा, कि यह मामला काफी समय पहले का है, जब संबंधित महिला का ऑपरेशन सिविल अस्पताल में हुआ था. उस समय से ही वह मुझ पर ब्लैकमेलिंग और पैसों की मांग को लेकर दबाव बना रही थी. इस केस की सच्चाई यह है कि महिला का ऑपरेशन विधिवत रूप से किया गया था और ऑपरेशन के बाद वह बीएमएस (बेसिक मेडिकल सर्विस/फॉलोअप) के लिए आती रही. लेकिन, हमारे पास ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं है कि वह नियमित रूप से फॉलोअप के लिए आती रही हो. यदि वह समय-समय पर नियमित फॉलोअप के लिए आती, तो संभव है कि आज यह स्थिति उत्पन्न ही न होती. इससे यह भी प्रतीत होता है कि उनकी मंशा शुरू से ही संदिग्ध रही है.
फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है. सवाल यही है कि क्या इस बड़े मेडिकल लापरवाही मामले में दोषियों को सख्त सजा मिल पाएगी या फिर मामला कागजों में ही दबकर रह जाएगा.














