हिमाचल पंचायत चुनाव के लिए आज से नामांकन शुरू, आशा वर्कर्स के चुनाव लड़ने पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

हिमाचल प्रदेश की 3,758 पंचायतों में 7 मई से नामांकन प्रक्रिया शुरू हो गई है. प्रत्याशी सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे के बीच अपने पर्चे दाखिल कर सकते हैं.

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HP Panchayat Election: आज से भरे जाएंगे पर्चे, जानें आशा वर्कर्स के चुनाव लड़ने पर हाईकोर्ट ने क्या कहा? (फाइल फोटो)
IANS

Shimla News: हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव के नामांकन शुरू होने से ठीक पहले प्रदेश हाईकोर्ट ने आशा वर्कर्स को एक बड़ी राहत दी है. कोर्ट ने राज्य सरकार के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें आशा वर्कर्स को अंशकालिक कर्मचारी (Part-time employees) बताकर चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया था. रीना देवी और अन्य बनाम हिमाचल राज्य मामले की बुधवार को सुनवाई करते हुए जस्टिस की खंडपीठ ने सरकार के 2 मई 2026 के उस आदेश को फिलहाल स्थगित कर दिया है. इस फैसले के बाद अब प्रदेश भर की हजारों आशा वर्कर्स के लिए पंचायत चुनाव लड़ने का रास्ता साफ हो गया है.

1 जून 2026 को होगी अगली सुनवाई

दरअसल, सरकार ने आशा वर्कर्स को सरकारी तंत्र का हिस्सा मानते हुए उन्हें चुनाव प्रक्रिया से बाहर कर दिया था. इसके खिलाफ 7 आशा वर्कर्स ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. याचिकाकर्ताओं की दलील थी कि वे भारत सरकार के दिशानिर्देशों के अनुसार केवल स्वैच्छिक कार्यकर्ता (Honorary volunteers) हैं. उन्हें कोई तय वेतन या मानदेय नहीं मिलता, बल्कि केवल काम के आधार पर प्रोत्साहन राशि (Incentive) दी जाती है. कोर्ट ने प्राथमिक दृष्टि में याचिकाकर्ताओं के पक्ष को मजबूत माना और सरकार को दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. मामले की अगली सुनवाई अब 1 जून 2026 को होगी.

आज से शुरू हुई नामांकन प्रक्रिया

बताते चलें कि हिमाचल प्रदेश की 3,758 पंचायतों में चुनाव का बिगुल बज चुका है. 26, 28 और 30 मई को तीन चरणों में मतदान होना है. खास बात यह है कि प्रधान, उप-प्रधान, वार्ड सदस्य, पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्यों के लिए नामांकन की प्रक्रिया 7 मई से शुरू हो रही है. हाईकोर्ट के इस अंतरिम आदेश ने ऐन मौके पर उन आशा वर्कर्स को बड़ी संजीवनी दी है जो चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही थीं. अब वे बिना किसी कानूनी अड़चन के अपना पर्चा दाखिल कर सकेंगी.

इन लोगों के लिए चुनाव लड़ने से अब भी मनाही

भले ही आशा वर्कर्स को राहत मिली हो, लेकिन अन्य नियमों को लेकर सरकार का रुख बेहद सख्त है. राज्य में लागू नए अध्यादेश के तहत चिट्टा (सिंथेटिक ड्रग्स) तस्करी के आरोपियों और एनडीपीएस एक्ट में चार्जशीटेड व्यक्तियों के चुनाव लड़ने पर पूरी तरह पाबंदी है. साथ ही, यदि परिवार के किसी भी सदस्य ने सरकारी या पंचायत की जमीन पर कब्जा किया है, तो वह उम्मीदवार भी अयोग्य माना जाएगा.

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