भारत के किस राज्य में थाली भरना इज्जत मानी जाती है? जानिए इस देसी परंपरा के पीछे का फूड कल्चर

Food as Respect: भारत के कई हिस्सों में मेहमाननवाजी की परंपरा है, लेकिन थाली भरकर परोसना अपने आप में अपनेपन और समृद्ध परंपरा का प्रतीक है. आइए जानते हैं किस राज्य में थाली भरना इज्जत माना जाता है.

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Food as Respect: पंजाब में खाना सिर्फ भोजन नहीं, भावना है.

Food Traditions India: भारत विविधताओं का देश है. यहां हर राज्य की भाषा, पहनावा और खाने का अंदाज अलग है. लेकिन, क्या आप जानते हैं कि भारत में एक ऐसा राज्य भी है, जहां मेहमान की थाली अगर पूरी तरह भरकर न परोसी जाए, तो उसे इज्जत की कमी माना जाता है? यहां खाना सिर्फ भूख मिटाने का जरिया नहीं, बल्कि सम्मान, अपनापन और दिल से जुड़ी भावना का प्रतीक है. हम बात कर रहे हैं पंजाब की. जी हां, यहां की परंपरा हमें सिखाती है कि भोजन सिर्फ पेट नहीं भरता, बल्कि रिश्ते भी मजबूत करता है.

पंजाब में खाना सिर्फ भोजन नहीं, भावना है. पंजाब में कहा जाता है, "जितना खाओगे, उतनी खुशी होगी."

यहां मेहमान को भगवान माना जाता है और उसकी थाली भरना मेजबान की शान समझी जाती है. अगर प्लेट में जगह दिख रही है, तो समझ लीजिए मेजबान की नजर में अभी सेवा अधूरी है. यही वजह है कि पंजाब में बस हो गया, कहने के बाद भी थाली में थोड़ा-बहुत और डाल दिया जाता है.

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क्यों बनी थाली भरने की परंपरा?

इस परंपरा की जड़ें पंजाब के कृषि प्रधान जीवन से जुड़ी हैं. पंजाब को भारत का अन्नदाता कहा जाता है. यहां खेतों में लहलहाती फसलें और भरपूर अनाज हमेशा से उपलब्ध रहा. ऐसे में घर में आने वाला कोई भी व्यक्ति खाली पेट जाए, यह असंभव सा माना जाता था. भरपूर खाना परोसना इस बात का संकेत है कि घर में समृद्धि, मेहनत और दिलदारी है.

पंजाबी थाली क्यों होती है इतनी भारी?

पंजाबी खाने की पहचान ही है मक्खन, घी और दमदार स्वाद. एक सामान्य पंजाबी थाली में शामिल होते हैं:

  • मक्के की रोटी या तंदूरी रोटी
  • सरसों का साग या दाल मखनी
  • छाछ या लस्सी
  • सलाद, अचार और ऊपर से घी

यह थाली इतनी पौष्टिक होती है कि एक बार खाने के बाद घंटों तक भूख नहीं लगती. ठंडे इलाकों और मेहनत वाले जीवन के लिए यह भोजन एकदम मुफीद है.

मेहमान अगर कम खाए तो?

पंजाब में अगर मेहमान कम खाता है, तो घरवाले चिंतित हो जाते हैं. "खाना पसंद नहीं आया क्या?" और लो, ताकत आएगी"

यह सवाल प्यार और अपनापन दिखाते हैं, न कि जबरदस्ती. यहां थाली भरना यह जताने का तरीका है कि आप हमारे अपने हैं.

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सिर्फ पंजाब ही नहीं, लेकिन पंजाब सबसे आगे:

भारत के कई हिस्सों में मेहमाननवाजी की परंपरा है, लेकिन पंजाब में यह भावना सबसे गहरी दिखाई देती है. पंजाब में थाली भरना सिर्फ खाना परोसना नहीं, बल्कि सम्मान, अपनापन और दिल खोलकर जीने की सोच का प्रतीक है.

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यह परंपरा हमें सिखाती है कि भोजन सिर्फ पेट नहीं भरता, बल्कि रिश्ते भी मजबूत करता है. शायद यही वजह है कि जिसने एक बार पंजाबी थाली खा ली, वह सिर्फ स्वाद ही नहीं, पंजाब का दिल भी अपने साथ ले जाता है.

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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