Yashoda Jayanti 2026: मां यशोदा का दुनिया का इकलौता मंदिर, मान्‍यता है क‍ि सूनी गोद भरने की मन्नत होती है पूरी

यशोदा जयंती पर जानिए दुनिया के इस अनोखे मंदिर में जरूर जाइए. इंदौर का यशोदा मंद‍िर करीब 350 साल पुराना है और यहां दूर-दूर से लोग दर्शन करने आते हैं.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
यशोदा जयंती पर जरूर जाएं इंदौर के यशोदा माता मंद‍िर में.

Yashoda Jayanti 2026 Special: शनिवार, 7 फरवरी 2026 को यशोदा जयंती है. यह दिन ममता, त्याग और भरोसे का प्रतीक है. धार्मिक मान्यता है कि यशोदा जयंती पर व्रत और पूजा करने से संतान-सुख, घर में शांति और रिश्तों में मिठास आती है. खासकर वे महिलाएं जो लंबे समय से संतान की कामना कर रही हैं. इस दिन मां यशोदा से अपनी मन्नत मांगती हैं. यही वजह है कि यह पर्व आम त्योहारों से अलग और भावनात्मक रूप से बेहद खास माना जाता है. यशोदा जयंती से जुड़ी आस्था सिर्फ पूजा तक सीमित नहीं है. भारत में एक ऐसी जगह भी है, जहां मां यशोदा की ममता को आज भी जीवित माना जाता है. यह जगह मध्यप्रदेश का इंदौर है, जहां मां यशोदा का देश का इकलौता मंदिर मौजूद है. यहां निःसंतान दंपत‍ि के बच्‍चे की मन्‍नत पूरी होती है. पढ़िए इस अनोखे मंदिर की कहानी..

 7 या 8 फरवरी क‍िस द‍िन पड़ रही है यशोदा जयंती, भक्‍त यहां जान‍िए सही तारीख, पूजा मुहूर्त और कथा-आरती

इंदौर का अनोखा मंदिर

इंदौर का यशोदा माता मंदिर दुनिया में अपने आप में बिल्कुल अलग है. यहां भगवान कृष्ण, मां यशोदा की गोद में विराजमान हैं. यह मंदिर करीब 220 से 350 साल पुराना बताया जाता है और इंदौर के खजूरी बाजार, राजवाड़ा के पास है. यह देश का इकलौता मंदिर माना जाता है, जहां मां यशोदा की प्रतिमा बड़ी और नंद बाबा की प्रतिमा छोटी है. यहां श्रीकृष्ण के साथ राधा और रुक्मणी जी की प्रतिमाएं भी विराजमान हैं, जो अपने आप में दुर्लभ मानी गई हैं.

निःसंतान महिलाओं की मन्नत होती है पूरी

इस मंदिर की मान्यता है कि निःसंतान महिलाएं यहां मां यशोदा की गोद भरती हैं. माना जाता है कि ऐसा करने से मां यशोदा उनकी सूनी गोद भर देती हैं. यही कारण है कि यहां हर साल देश-विदेश से महिलाएं अपनी मनोकामना लेकर पहुंचती हैं. खास बात ये है कि यहां गोद भराई की रस्म संतान प्राप्ति से पहले की जाती है, जबकि आमतौर पर यह रस्म प्रेगनेंट होने के बाद होती है. जब भक्‍तों की मन्नत पूरी हो जाती है, तो वह अपनी संतान के साथ दोबारा यहां आकर धन्यवाद स्वरूप फिर गोद भराई करती हैं.

हर गुरुवार होती है गोद भराई की रस्म

मंदिर में हर गुरुवार को महिलाएं चावल, नारियल, चुनरी और पारंपरिक पूजन सामग्री लेकर मां यशोदा की गोद भरती हैं. मंदिर के पुजारी विधि-विधान से पूरी रस्म करवाते हैं. मान्यता है कि मां यशोदा अपने पुत्र कृष्ण जैसे संस्कारवान संतान का आशीर्वाद देती हैं.

जन्माष्टमी पर उमड़ता है श्रद्धा का सैलाब

कृष्ण जन्माष्टमी के दिन इस मंदिर की रौनक देखते ही बनती है. इस दिन इंदौर ही नहीं, बल्कि भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर और दूसरे राज्यों से भी महिलाएं यहां पहुंचती हैं. कई श्रद्धालु विदेशों से भी आते हैं. सालभर भक्त दर्शन के लिए आते रहते हैं, लेकिन जन्माष्टमी पर यहां विशेष पूजा और गोद भराई होती है.

Advertisement

मंदिर से जुड़ी कहानी 

मंदिर के पुजारी घनश्याम शास्त्री के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण आनंदीलाल दीक्षित ने करवाया था. उन्होंने राजस्थान के जयपुर से संगमरमर की मूर्तियां बनवाकर यहां स्थापित की थीं. मान्यता है कि आनंदीलाल को सपना आया था कि जो महिलाएं गुरुवार को मां यशोदा की गोद भरेंगी, उन्हें संतान की प्राप्ति होगी. तभी से यह परंपरा शुरू हुई, जो आज तक चली आ रही है.

Featured Video Of The Day
Arvind Kejriwal News: Delhi Liquor Case में बरी हुए केजरीवाल, Bhagwant Mann ने कही ये बात
Topics mentioned in this article