काला कलावा क्यों बांधते हैं लोग? महाकाल से जुड़ी हैं ये मान्यताएं, 3 गांठों का भी है खास महत्व

शिव मंदिरों और काल भैरव धाम में अक्सर नजर आने वाला काला कलावा सिर्फ एक धागा नहीं माना जाता. धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक इसे सुरक्षा, आस्था और पॉजिटिव इनर्जी से जोड़कर देखा जाता है.

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क्यों पहनते हैं काला कलावा?

Kala Kalawa Bandhane ke Fayde: महाकाल, काल भैरव और दूसरे शिव मंदिरों के बाहर आपने काले रंग का कलावा बिकते हुए जरूर देखा होगा. कई लोगों की कलाई पर भी यह काला धागा बंधा नजर आता है. दिलचस्प बात यह है कि जहां ज्यादातर लोग लाल या पीले कलावे के बारे में जानते हैं, वहीं काले कलावे को लेकर भी कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं. कुछ लोग इसे बुरी नजर से बचाव का प्रतीक मानते हैं, तो कुछ इसे महाकाल और शनिदेव की कृपा से जोड़कर देखते हैं. यही वजह है कि पिछले कुछ सालों में काला कलावा पहनने का चलन काफी बढ़ा है. काले रंग के कलावे को लेकर भी कई तरह की धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं.

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महाकाल और काल भैरव से क्यों जोड़ा जाता है काला कलावा?

काले कलावे का संबंध भगवान शिव के रौद्र स्वरूप महाकाल और काल भैरव से माना जाता है. यही कारण है कि उज्जैन के महाकाल मंदिर और कई काल भैरव मंदिरों में श्रद्धालु इसे आशीर्वाद के रूप में धारण करते हैं. मान्यता है कि इसे पहनने से व्यक्ति खुद को आध्यात्मिक रूप से सुरक्षित महसूस करता है.

3, 5 या 7 गांठें ही क्यों लगाई जाती हैं?

काला कलावा बांधते समय गांठों का भी खास महत्व माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक इसमें 3, 5 या 7 गांठ लगाई जा सकती हैं. इनमें 3 गांठ सबसे ज्यादा प्रचलित मानी जाती है. कई लोग इसे सुरक्षा और शुभता का प्रतीक मानते हैं. इसी वजह से मंदिरों में कलावा बंधवाते समय अक्सर तीन गांठें लगाई जाती हैं.

बुरी नजर से बचाव की मान्यता

काले रंग को लंबे समय से नजर दोष और नकारात्मक प्रभावों से जोड़कर देखा जाता रहा है. इसी वजह से कई लोग काला कलावा धारण करते हैं. मान्यता है कि यह व्यक्ति को नेगेटिव प्रभावों से बचाने में मदद करता है और उसके आसपास पॉजिटिव माहौल बनाए रखता है.

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आत्मविश्वास और पॉजिटिविटी​

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक काला कलावा पहनने से मन में पॉजिटिविटी बनी रहती है. कई लोग मानते हैं कि इससे आत्मविश्वास बढ़ता है और अपने काम पर बेहतर फोकस करने में मदद मिलती है. इसी कारण कई लोग इसे सिर्फ धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि मानसिक मजबूती का प्रतीक भी मानते हैं.

किस दिन पहनना शुभ माना जाता है?

मान्यता है कि सोमवार, मंगलवार और शनिवार को काला कलावा पहनना शुभ माना जाता है. खासकर शिव मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद इसे धारण करने की परंपरा कई जगह देखने को मिलती है. कई श्रद्धालु महाकाल या काल भैरव मंदिर में पूजा के बाद पुजारी से यह कलावा बंधवाना पसंद करते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, काला कलावा सिर्फ एक धागा नहीं, बल्कि आस्था और विश्वास का प्रतीक है. यही वजह है कि आज भी बड़ी संख्या में लोग इसे अपनी कलाई पर धारण करते हैं और इससे जुड़ी परंपराओं का पालन करते हैं.

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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