Som Pradosh Vrat: सोम प्रदोष व्रत की पूजा का महाउपाय, जिसे करते ही महादेव संग बरसेगा माता पार्वती का आशीर्वाद

Som Pradosh Vrat Puja Vidhi: पंचांग के अनुसार आज चैत्र मास के कृष्णपक्ष की त्रयोदशी तिथि है, जिसे प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाता है. सोमवार के साथ प्रदोष व्रत के इस संयोग में भगवान शिव संग माता पार्वती की कृपा पाने के लिए कब और कैसे करें पूजा, जानने के लिए पढ़ें ये लेख. 

विज्ञापन
Read Time: 4 mins
Som Pradosh Vrat: सोम प्रदोष व्रत की पूरी पूजा विधि
NDTV

Som Pradosh Vrat Ki Puja Kaise Karen: सनातन परंपरा में भगवान शिव की पूजा के लिए सप्ताह में सोमवार का दिन और प्रत्येक मास के कृष्णपक्ष और शुक्लपक्ष की त्रयोदशी तिथि या फिर कहें प्रदोष व्रत को अत्यंत ही शुभ माना गया है. हिंदू मान्यता के अनुसार जब ये दोनों एक साथ पड़ते हैं तो इस पावन दिन को सोम प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाता है. जिस प्रदोष व्रत को देवों के देव महादेव संग माता पावर्ती की कृपा दिलाने वाला माना जाता है, उस दिन सुख-सौभाग्य की कामना लिए हुए आखिर कब और कैसे करें पूजा? आइए इसे विस्तार से जानते हैं. 

कब करें प्रदोष व्रत की पूजा? 

पंचांग के अनुसार प्रदोष व्रत चंद्र मास की त्रयोदशी ति​थि पर रखा जाता है. हिंदू मान्यता के अनुसर जिस दिन यह पावन तिथि प्रदोष काल के समय व्याप्त होती है, उसी दिन महादेव का यह व्रत किया जाता है. आज 16 मार्च 2026 को चैत्र मास के कृष्णपक्ष की त्रयोदशी तिथि प्रात:काल 09:40 बजे प्रारंभ होकर कल 17 मार्च 2026 को प्रात:काल 09:23 बजे समाप्त होगी. ऐसे में सोम प्रदोष व्रत आज ही रखा जाएगा. प्रदोष व्रत की पूजा के लिए उत्तम माना जाने वाला प्रदोष काल आज सायंकाल 06:30 बजे से लेकर रात्रि 08:54 बजे तक रहेगा. 

सोम प्रदोष व्रत विधि 

हिंदू मान्यता के अनुसार सोम प्रदोष व्रत का पुण्यफल पाने के लिए साधक को इस दिन प्रात:काल स्नान-ध्यान करने के बाद सबसे पहले इस व्रत को विधि-विधान से करने का संकल्प लेना चाहिए. इसके बाद किसी शिवालय में अथवा घर में शिव परिवार का पूजन करना चाहिए. शिव पूजा के लिए समर्पित इस व्रत की विशेष पूजा दिन के संधिकाल यानि प्रदोषकाल में की जाती है, इसलिए शाम को इस शुभ मुहूर्त से पहले एक बार फिर तन और मन से पवित्र हो जाएं और फिर भगवान शिव का दूध, गंगाजल आदि से अभिषेक करें.

Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि पर अगर पहली बार रखने जा रहे हैं व्रत तो जान लें सारे जरूरी नियम

Advertisement

इसके बाद महादेव को उनकी प्रिय चीजें जैसे सफेद चंदन, सफेद पुष्प, बेलपत्र, शमीपत्र, बेल, धतूरा, भांग, सफेद मिठाई आदि अर्पित करते हुए पूजा करें. इसके बाद प्रदोष व्रत की कथा कहें तथा शिव मंत्रों का जप करें. शिव पूजन के बाद आज चंद्र देवता को अर्घ्य देना बिल्कुल न भूलें. 

सोम प्रदोष व्रत का महाउपाय

आज महादेव से अपने धन और मन से जुड़ी परेशानियों को दूर करने तथा सुख-सौभाग्य को पाने के लिए विशेष रूप स्फटिक से बने शिवलिंग की पूजा करनी चाहिए. साथ ही साथ आज शिव पूजा में महादेव का सबसे प्रिय माना जाने वाला रुद्राक्ष का बीज अर्पित करना चाहिए. अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद पाने के लिए महिलाएं महादेवी के साथ माता पार्वती की विशेष रूप पूजा करें तथा उन्हें चुनरी चढ़ाएं. 

Advertisement

प्रदोष व्रत क्यों रखा जाता है?

हिंदू मान्यता के अनुसार सोम प्रदोष का व्रत भगवान शिव की कृपा बरसाने वाला माना गया है. मान्यता है कि इस व्रत को विधि-विधान से करने पर महादेव हर मनोकामना पूरी करते हैं. महिलाएं इस व्रत को अखंड सौभाग्य की कामना को पूरा करने के लिए रखती हैं. प्रदोष व्रत के आध्यात्मिक महत्व की बात करें तो यह व्रत इंद्रियों पर नियंत्रण और मन की शुद्धि में सहायक होता है. 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

Featured Video Of The Day
Iran का सीधा ऐलान: अगर Netanyahu जिंदा हैं तो हम मारेंगे! Middle East War की सबसे बड़ी मिस्ट्री