सनातन परंपरा में प्रत्येक मास के कृष्णपक्ष और शुक्लपक्ष की एकादशी तिथि का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है क्योंकि यह जगत के पालनहार माने जाने वाले भगवान श्री विष्णु के जप-तप और व्रत के लिए अत्यंत ही पुण्यदायी मानी गई है. इस पावन एकादशी तिथि का महत्व तब और ज्यादा बढ़ जाता है, जब यह माघ मास के कृष्णपक्ष में पड़ती है और षटतिला एकादशी कहलाती है. पंचांग के अनुसार जीवन से जुड़े सभी दोष और पाप को दूर करके अक्षय पुण्य दिलाने वाली षटतिला एकादशी का पावन व्रत आज रखा जा रहा है. आज षटतिला एकादशी के साथ मकर संक्रांति का भी शुभ संयोग बन रहा है. ऐसे में भगवान लक्ष्मी नारायण और सूर्य नारायण दोनों की कृपा पाने के लिए आज किस विधि से करें भगवान विष्णु का पूजन? पुण्य की प्राप्ति और दोष से बचने के लिए क्या करें और क्या न करें? षटतिला एकादशी व्रत से जुड़ी सभी अहम जानकारी को पाने के लिए देखें विस्तृत कवरेज.
Shattila Ekadashi Vrat LIVE UPDATES:
सारे तीरथ बार-बार, गंगा सागर एक बार
लक्ष्मीनारायण और सूर्य नारायण की पूजा का अजब संयोग
15 जनवरी को मकर संक्रांति के स्नान-दान का मिलेगा पुण्यफल
प्रयागराज के त्रिवेणी संगम पर लाखों लोग लगा रहे हैं आस्था की डुबकी
सूर्य के संक्रमण काल से जुड़ा है मकर संक्रांति का महापर्व
मकर संक्रांति के दिन सूर्य अपनी स्थिति बदल कर दक्षिणायन से उत्तरायण हो जाता है. महाभारत काल में भीष्म पितामह ने भी बाणों की शैय्या पर लेटे हुए सूर्य के उत्तरायण होने का इंतजार किया था. सनातन परंपरा में मकर संक्रांति के पर्व को सूर्य के संक्रमण काल का पर्व भी माना जाता है. सनानत परंपरा में मकर संक्रांति का पर्व प्रतिदिन प्रत्यक्ष दर्शन देने वाले भगवान भास्कर यान सूर्य देव की विशेष साधना और स्नान-दान के लिए अत्यंत ही पुण्यदायी माना गया है. हिंदू मान्यता के अनुसार मकर संक्रांति के दिन गंगा जैसे पवित्र जल तीर्थ पर स्नान करके सूर्यदेव को तांबे के पात्र या फिर अंजुलि से तिल मिश्रित जल देने पर अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है.














