शरद पूर्णिमा की रात चांद देखने और चांदनी में खीर रखने की तैयारी कर रहे हैं तो पहले अपने शहर में चंद्रोदय का समय जान लें. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस रात चंद्रमा की पूजा और मां लक्ष्मी की आराधना का विशेष महत्व है. कई घरों में खीर बनाकर चांदनी में रखने की परंपरा भी निभाई जाती है. हालांकि, अलग-अलग शहरों में चांद निकलने का समय अलग हो सकता है. आइए जानते हैं प्रमुख शहरों में चंद्रोदय का समय और खीर रखने से जुड़ी जरूरी बातें.
आज है शरद पूर्णिमा 2026
आचार्य मदन मोहन ने बताया कि शरद पूर्णिमा आज रविवार को मनाई जा रही है. पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर को सुबह 11:55 बजे शुरू होकर 26 अक्टूबर को सुबह 9:41 बजे समाप्त होगी. हिंदू पंचांग के अनुसार, इसे कोजागरी पूर्णिमा और रास पूर्णिमा भी कहा जाता है. इस दिन कई श्रद्धालु चंद्र देव और मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं. इस का दिन रात के समय चांदनी रात की चंदेरी रोशनी में खीर बनाई जाती है.
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दिल्ली समेत प्रमुख शहरों में चंद्रोदय का समय
आचार्य मदन मोहन ने बताया कि दिल्ली- NCR में शाम 5:00 बजे, गुरुग्राम शाम 5:01 बजे और फरीदाबाद शाम 5:00 बजे चंद्रोदय होगा. उन्होंने आगे बताया कि आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि का आरंभ 25 अक्टूबर को सुबह 11 बजकर 55 मिनट पर होगा. पूर्णिमा तिथि का समापन अलगे दिन 26 अक्टूबर को सुबह 9 बजकर 41 मिनट पर होगा. साथ ही शरद पूर्णिमा को रास पूर्णिमा, कोजागरा पूर्णिमा, शरद पूनम के नाम से भी जाना जाता है. आचार्य के अनुसार, शरद पूर्णिमा के दिन रात में गाय के दूध और चावल से बनी खीर को खुले आसमान के नीचे रखने की परंपरा है.
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शरद पूर्णिमा पर खीर कब रखें?
शरद पूर्णिमा पर खीर को चांदनी में रखने की परंपरा कई साल पुरानी है. काफी लंबे समय से इस परंपरा का पालन किया जा रहा है. देशभर में कई परिवार ऐसे हैं तो रात में दूध और चावल से खीर बनाते हैं और चंद्रमा को भोग लगाने के बाद इसे चांदनी में रखते हैं. आचार्य मदन मोहन ने बताया कि 25 अक्टूबर की रात मां लक्ष्मी की कोजागरी पूजा के लिए निशीथ काल रात 11 बजकर 40 मिनट से 26 अक्टूबर की रात 12 बजकर 31 मिनट तक बताया गया है. यह निशीथ काल का समय है.
शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा की पूजा कैसे करें
शाम को चंद्रमा के दर्शन के बाद श्रद्धालु परंपरा के अनुसार जल से अर्घ्य दे सकते हैं और चंद्र देव का स्मरण कर सकते हैं. इसके बाद मां लक्ष्मी की पूजा और प्रसाद अर्पित किया जााता है. व्रत रखने वाले लोग अपनी सेहत और पारिवारिक परंपरा के अनुसार नियम अपनााएं. सटीक पूजा-विधि और मुहूर्त के लिए स्थानीय पंचांग या योग्य धार्मिक विशेषज्ञ से सलाह लें.
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