Shankh Ke Niyam: घर में शंख रखने और बजाने के भी होते हैं नियम, जानें इसे कहां और कैसे रखें? 

Shankh Ke Niyam: समुद्र मंथन में से निकले 14 रत्नों में से एक शंख को सनातन परंपरा में बहुत ज्यादा पवित्र और पूजनीय माना गया है. शुभता का प्रतीक माने जाने वाले शंख को घर में कहां और कैसे रखना चाहिए? इसे कब बजाना चाहिए? शंख से जुड़े सभी जरूरी नियम और धार्मिक महत्व को जानने के लिए पढ़ें ये लेख. 

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देवी-देवताओं की पूजा में शंख का धार्मिक महत्व

Shankh ko kab aur kaise bajana chahiye: सनातन परंपरा में अक्सर किसी भी शुभ कार्य या पूजा-पाठ के दौरान शंख बजाने की परंपरा रही है. हिंदू धर्म में कई ऐसे देवता हैं, जिन्होंने इस पवित्र शंख को धारण कर रखा है. वैष्णव परंपरा में तो पूजा के दौरान भगवान विष्णु, भगवान राम और भगवान श्रीकृष्ण को शंख से अभिषेक कराना अत्यंत ही शुभ और फलदायी माना गया है. हिंदू मान्यता के अनुसार शंख के शीर्ष पर चंद्र देवता का वास होता है, जबकि इसके मध्य में स्वयं वरूण देवता विराज रहते है. इसी प्रकार पृष्ठ भाग में जगतपिता कहलाने वाले ब्रह्मा जी और अग्र भाग में मुक्तिदायनी गंगा, पापहारिणी यमुना और ज्ञानदायिनी सरस्वती का वास होता है. ऐसे में इस दिव्य और पवित्र शंख को घर में रखने और बजाने के लिए शास्त्रों में कुछ नियम बताए गये हैं. आइए शंख से जुड़े जरूरी नियमों को विस्तार से जानते हैं. 

शंख को कहां रखना चाहिए?

वास्तु शास्त्र के अनुसार पूजा में प्रयोग लाए जाने वाले शंख को हमेशा अपने घर के मंदिर या फिर कहें पूजा स्थान के उत्तर-पूर्व दिशा में रखना चाहिए. मान्यता है कि ईशान कोण में शंख को रखने पर सकारात्मक उर्जा बनी रहती है. जिस स्थान पर शंख रखें उसके आस-पास साफ-सफाई और पवित्रता हमेशा बनाए रखें. शंख को मंदिर पूजा स्थान पर भगवान विष्णु या लक्ष्मी जी की मूर्ति के दाएं ओर रखें. इसे भगवान शिव के चित्र या शिवलिंग के पास न रखें. 

शंख को कैसे रखना चाहिए?

पूजा में प्रयोग लाए जाने वाले शंख को कभी भूलकर भी जमीन में नहीं रखना चाहिए. शंख को हमेशा किसी स्टैंड अथवा किसी रेशमी वस्त्र से बने लाल रंग के आसन पर रखे. शंख को कुछ इस तरह से रखें कि इसका मुंह ऊपर की ओर रहे. पूजा स्थान पर शंख को कभी खाली न रखें. हमेशा उसमें जल, पुष्प या चावल भर कर रखें. 

शंख किसे और कब बजाना चाहिए?

हिंदू मान्यता के अनुसार शंख को सुबह-शाम पूजा के समय पूजा के समय तथा अन्य प्रकार के धार्मिक आयोजनों के दौरान बजाया जा सकता है. पूजा के दौरान इसे पूजा करने वाला साधक या फिर तन और मन से पवित्र अन्य कोई व्यक्ति बजा सकता है, लेकिन गर्भवती महिला को शंख नहीं बजाना चाहिए. पूजा में बजाए जाने वाला शंख और अभिषेक करने वाले शंख का अलग-अलग इस्तेमाल करना चाहिए. हिंदू मान्यता को शंख को बेवजह नहीं बजाना चाहिए. इसे जब भी बजाना हो तो सबसे पहले भगवान श्री लक्ष्मीनारायण का ध्यान करना चाहिए. 

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शंख का धार्मिक महत्व क्या है?

Photo Credit: AI Generated Image @ gemini

  • हिंदू मान्यता के अनुसार किसी भी पूजा या अनुष्ठान के बाद शंख में भरे जल को व्यक्ति अथवा घर के प्रमुख स्थानों पर पूजा का सकारात्मक फल और ईश्वरीय आशीर्वाद प्राप्त होता है. 
  • शंख को प्रतिदिन घर में बजाने से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और वहां पर सकारात्मक ऊर्जा का वास बना रहता है. 
  • हिंदू मान्यता के अनुसार जिस स्थान पर पूजा के दौरान प्रतिदिन तीन बार शंख बजाया जाता है, वहां पर धन की देवी लक्ष्मी जी हमेशा निवास करती हैं. 
  • शंख की मंगल ध्वनि से उस स्थान का सारा अमंगल दूर हो जाता है और वहां पर हमेशा सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है. 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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