Shab-E-Barat 2026: आज है शब-ए-बारात, जानें इसे क्यों कहा जाता है गुनाहों से तौबा करने की रात?

Shab-E-Barat 2026 kab hai: इस्लाम में शब-ए-बारात को बड़ा ही मुकद्दस (पवित्र) त्योहार माना जाता है. इस्लामिक कैलेंडर के आठवें महीने शाबान की 14वीं और 15वीं रात को अल्लाह की बरकत और गुनाहों की के लिए माफी की रात के रूप में जाना जाता है. शब-ए-बारात का धार्मिक महत्व और इससे जुड़ी मान्यताओं के बारे में जानने के लिए पढ़ें ये लेख. 

विज्ञापन
Read Time: 6 mins
Shab-e-Barat 2026: शब-ए-बारात का धार्मिक महत्व और मान्यताएं
NDTV

Shab-E-Barat 2026 Significance: इस्लाम में शब-ए-बारात का पर्व माफी की रात के रूप में जाना जाता है. इस पाक त्योहार पर मुस्लिम समुदाय से जुड़े लोग अपनी भूल के लिए माफी, दुआएं और दान-पुण्य करते हैं. रमजान प्रारंभ होने से ठीक 15 दिन पहले मनाया जाने वाला यह पर्व हिजरी कैलेंडर के आठवें महीने शाबान की 14वीं और 15वीं रात के बीच पड़ता है. आज 03 फरवरी 2026 को यह पर्व पूरे देश भर में मनाया जा रहा है. आइए शब-ए-बारात से जुड़ी परंपरा, मान्यता और धार्मिक महत्व को विस्तार से जानते हैं. 

कब है शब-ए-बारात

भारत में शब-ए-बारात 3 फरवरी 2026 (मंगलवार) की शाम यानी आज रात से शुरू होकर 4 फरवरी 2026 (बुधवार) तक मनाई जा रही है. यह तारीख हिजरी कैलेंडर के शाबान महीने की 14वीं और 15वीं रात के बीच आती है और चांद दिखने पर अंतिम रूप से तय होती है

पाप से मुक्ति दिलाने वाला पर्व

इंडो इस्लामिक स्कॉलर गुलाम रसूल देहलवी के अनुसार शब-ए-बारात का अर्थ है निजात की रात. वह पाक रात जिसमें अल्लाह अपने फरिश्तों को दुनिया के आसमान पर उन लोगों के लिए भेजता है, जो बख्शीश या फिर कहें पापों से मुक्ति चाहते हैं. उनके लिए इस दिन दरवाजे खोल दिये जाते हैं ताकि वे जहन्नुम से छुटकारे के लिए दुआ कर सकें. इस पर्व पर रात के तिहाई हिस्से में विशेष इबादत करने के लिए कहा गया है. मान्यता है कि इस समय अल्लाह अपनी रहमत को नाजिल फरमाता है. गुलाम रसूल देहवली के अनुसार हिंदुस्तान की सूफी परंपरा से जुड़े लोग इस पर्व को जश्न के रूप में मनाते रहे हैं. इस​ दिन मस्जिदों में रौनक होती है. इस पर्व पर विशेष रूप से हलवा बनाकर बांटा जाता है.

शब-ए-बारात का धार्मिक महत्व

शब-ए-बारात का इस्लाम में बहुत ज्यादा धार्मिक-आध्यात्मिक महत्व माना गया है. इस्लामिक मान्यता के अनुसार इस पाक रात को जो कोई भी सच्चे दिन से अपनी भूल के लिए माफी मांगता है, अल्लाह उसके गुनाहों को माफ करके उस अपनी रहमतें बरसाता है. शब-ए-बारात के दिन दुआओं और जरूरतमंदों को दान करने का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. यही कारण है कि लोग इस दिन विशेष रूप से नमाज (Shab-e-Barat ki Namaz) अता करते हैं. शब-ए-बारात का त्योहार लोगों को खुदा के करीब जाकर एक बेहतर इंसान बनने और नेकी की राह पर चलने की प्रेरणा देता है. 

माफी, रहमत और इबादत की पवित्र रात

(शब-ए-बारात इस्लाम की सबसे मुकद्दस और आध्यात्मिक रातों में से एक है. इसे "माफी की रात", "रहमत की रात" या "गुनाहों से मुक्ति की रात" के नाम से जाना जाता है. शब-ए-बारात का अर्थ और महत्व'शब' का मतलब रात और 'बारात' का अर्थ माफी, निजात या मुक्ति होता है. इसलिए इसे शब-ए-बारात कहा जाता है, यानी गुनाहों से मुक्ति वाली रात. इस्लामी मान्यताओं के मुताबिक, इस रात अल्लाह तआला अपने बंदों के नामा-ए-आमाल (कर्मों का लेखा-जोखा) तय करते हैं और गुनाहों को माफ फरमाते हैं. यह रात इंसान को पिछले साल के गुनाहों पर तौबा करने, अल्लाह से माफी मांगने और अच्छे अमल की शुरुआत करने का सुनहरा मौका देती है.

एनडीटीवी रिपोर्ट में बताया गया है कि मुस्लिम समाज इस रात पूरी तरह जागकर इबादत करता है. लोग नमाज पढ़ते हैं, कुरान की तिलावत करते हैं, दुआएं मांगते हैं और इस्तिगफार (माफी मांगना) करते हैं. यह रात रहमत, बरकत और मगफिरत से भरी होती है.इतिहास और धार्मिक पृष्ठभूमिशब-ए-बारात की शुरुआत इस्लामी परंपराओं से जुड़ी है, जहां इसे अल्लाह की विशेष रहमत और फैसले का समय माना जाता है. सुन्नी और शिया दोनों समुदाय इसे महत्व देते हैं, लेकिन कुछ अंतर हैं:सुन्नी परंपरा में मुख्य जोर तौबा, इबादत, पूर्वजों के लिए दुआ और अच्छे कर्मों पर रहता है.

शिया समुदाय में यह रात और भी खास है क्योंकि इसे 12वें इमाम, इमाम महदी (अज) का जन्मदिन माना जाता है. शिया मान्यता के अनुसार, इस रात इमाम महदी का जन्म हुआ था, जो गैबत (अदृश्यता) में हैं और उनकी ज़ुहूर (प्रकट होने) की उम्मीद रखी जाती है. इसलिए यह माफी की रात के साथ-साथ खुशी और उम्मीद का मौका भी बन जाता है

Advertisement

शब-ए-बारात से जुड़ी मान्यताएं 

इस्लाम को मानने वाले कई लोग शब-ए-बारात पर रोजा भी रखते हैं. इस रोजा को फर्ज की बजाय नफिल रोजा कहा जाता है. मान्यता है कि इस पाक रात को अल्लाह अपने बंदों की सभी दुआएं कुबूल करते हुए उनकी सभी गलतियों को माफ कर देता है. यही कारण है कि बड़ी संख्या में लोग ​मस्जिदों में जाकर या फिर अपने घर में नमाज अता करने के बाद अपने परवरदिगार से नेकी की राह पर चलने का वादा करते हैं. 

भारत में शब-ए-बारात कैसे मनाई जाती है?

  • भारत के मुस्लिम समाज में यह त्योहार बड़ी आस्था, उत्साह और एकजुटता से मनाया जाता है. 
  • लोग पूरी रात जागकर इबादत करते हैं – नमाज, कुरान ख्वानी और दुआएं.
  • कब्रिस्तान जाते हैं, जहां मृत पूर्वजों की कब्रों पर सूरह फातिहा, सूरह यासीन पढ़कर सवाब पहुंचाते हैं और उनके लिए दुआ मांगते हैं.
  • घरों में मीठे व्यंजन जैसे हलवा, शीरखुरमा, मिठाइयां बनाई और बांटी जाती हैं, जो बरकत और खुशी का प्रतीक हैं.
  • मस्जिदों में विशेष नमाज और महफिल आयोजित होती हैं, साथ ही अमाल भी किए जाते हैं..
  • कई लोग 15 शाबान का रोजा भी रखते हैं

शब-ए-बारात के मौके पर अल्लाह की इबादत के साथ अपने पूर्वजों की कब्रों पर जाकर उनके लिए दुआ करने की परंपरा भी है. इस दिन कब्रिस्तानों की विशेष रूप सफाई की जाती है और लोग अपने पूर्वजों की कब्रों पर मोमबत्तियां जलाकर फातिहा पढ़ते हैं. मान्यता है कि शब-ए-बारात पर दुनिया से रुखसत हो चुके लोगों की आत्मा के लिए दुआ करने से अल्लाह उन पर भी रहम करता है. कुल मिलाकर इस पर्व पर पूरी रात भर नमाज, कुरान की तिलावत, दान और दुआओं का सिलसिला जारी रहता है. 

Advertisement

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

Featured Video Of The Day
India US Trade Deal | Trump-Modi की बात, सबसे बड़ी डील डन, US-Venezuela से तेल खरीदेगा भारत!
Topics mentioned in this article