How to worship Goddess Saraswati at home: जीवन में हर किसी की ख्वाहिश होती है कि उसकी संतान खूब पढ़-लिखकर एक सफल इंसान बने. उसे प्रत्येक क्षेत्र में सफलता और प्रसिद्धि मिले. निश्चित तौर पर ऐसी कामनाओं के पूरा होने के लिए विद्या की देवी मां सरस्वती का आशीर्वाद मिलना बेहद जरूरी होता है. हिंदू मान्यता के अनुसार यदि सही समय पर बुद्धि काम न करे तो व्यक्ति अपने लक्ष्य के करीब पहुंच कर भी वापस लौट आता है. आइए जानते हैं कि आखिर किस विधि से पूजा करने पर मां सरस्वती (Goddess Saraswati) से बुद्धि, विवेक और ज्ञान का आशीर्वाद प्राप्त होता है.
मां सरस्वती की पूजा विधि (Maa Saraswati Ki Puja Vidhi)
हिंदू मान्यता के अनुसार मां सरस्वती की पूजा बुधवार के दिन प्रात:काल के समय करना अत्यंत ही शुभ और फलदायी मानी गई है. ऐसे में ज्ञान की देवी मां सरस्वती की पूजा करने के लिए साधक को इस दिन प्रात:काल स्नान-ध्यान करने के बाद पीले या फिर सफेद रंग के वस्त्र धारण करके मां सरस्वती की विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए. ज्ञान की देवी की मूर्ति या चित्र पर सबसे पहले पवित्र जल छिड़कें. इसके बाद माता को पीले वस्त्र अर्पित करें तथा उन्हें हल्दी या केसर से तिलक लगाएं.
इसके बाद मां सरस्वती को लगने वाले पीले पुष्प और पीले रंग की मिठाई अर्पित करें. इसके बाद साधक को मां सरस्वती की चालीसा, मंत्र या फिर स्तोत्र का विधि-विधान से पाठ करना चाहिए. मां सरस्वती की पूजा का शुभ फल पाने के लिए देवी के साथ अपनी कापी-किताब, पेन, लैपटाप आदि की पूजा भी पूरे श्रद्धा भाव के साथ करना चाहिए. मां सरस्वती की पूजा के अंत में उनकी आरती करना बिल्कुल न भूलें.
मां सरस्वती का महामंत्र (Maa Saraswati Ka Mantra)
हिंदू धर्म में किसी भी देवी या देवता को प्रसन्न करने के लिए मंत्र जप को बेहद प्रभावी माना गया है. ऐसे में आपको आज बुधवार के दिन उन मंत्रों का जाप विशेष रूप से करना चाहिए, जिसके पुण्य प्रभाव से मां सरस्वती का आशीर्वाद बरसता है. बुद्धि और ज्ञान में वृद्धि होती है. आइए मां सरस्वती की पूजा से जुड़े सरल एवं सिद्ध मंत्र के बारे में जानते हैं.
'ॐ ह्रीं सरस्वत्यै नमः'
'ॐ ह्रीं ऐं ह्रीं सरस्वत्यै नमः'
'ॐ ह्रीं ह्रीं सौं सरस्वत्यै नमः'
'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं सरस्वत्यै नमः'
सरस्वती नमस्तुभ्यं वरदे कामरुपिणि.
विद्यारंभं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु मे सदा..
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता.
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना.
या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता.
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा.
मां सरस्वती की आरती (Maa Saraswati Ki Aarti)
ॐ जय सरस्वती माता, जय जय सरस्वती माता.
सद्गुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता.
ॐ जय सरस्वती माता...
चंद्रवदनि पद्मासिनी, ध्रुति मंगलकारी.
सोहें शुभ हंस सवारी, अतुल तेजधारी .
ॐ जय सरस्वती माता...
बाएं कर में वीणा, दाएं कर में माला.
शीश मुकुट मणी सोहें, गल मोतियन माला .
ॐ जय सरस्वती माता...
देवी शरण जो आएं, उनका उद्धार किया.
पैठी मंथरा दासी, रावण संहार किया .
ॐ जय सरस्वती माता...
विद्या ज्ञान प्रदायिनी, ज्ञान प्रकाश भरो.
मोह, अज्ञान, तिमिर का जग से नाश करो .
ॐ जय सरस्वती माता...
धूप, दीप, फल, मेवा मां स्वीकार करो.
ज्ञानचक्षु दे माता, जग निस्तार करो .
ॐ जय सरस्वती माता...
मां सरस्वती की आरती जो कोई जन गावें.
हितकारी, सुखकारी, ज्ञान भक्ती पावें .
ॐ जय सरस्वती माता...
जय सरस्वती माता, जय जय सरस्वती माता.
सद्गुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता.
ॐ जय सरस्वती माता...
ॐ जय सरस्वती माता, जय जय सरस्वती माता.
सद्गुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता.
ॐ जय सरस्वती माता...














