How many times navratri is celebrated in a year: हिंदू धर्म में भगवती दुर्गा की उपासना सभी दुखों और कष्टों को दूर करके कामनाओं को पूरा करने वाली मानी गई है. यही कारण है कि शक्ति के साधक उनकी पूजा के लिए सबसे उत्तम माने जाने वाली नवरात्रि के महापर्व का पूरे साल इंतजार करते हैं. देवी दुर्गा की साधना और आराधना से जुड़ा यह महाव्रत साल में कितनी बार रखा जाता है? क्या होती है गुप्त और प्रकट नवरात्रि? नवरात्रि में देवी दुर्गा की पूजा एवं व्रत का क्या पुण्यफल है? इन सभी सवालों के जवाब आइए विस्तार से जानते हैं.
एक वर्ष में कितनी नवरात्रि होती है (How any navratri in one year)
पंचांग के अनुसार देवी दुर्गा की पूजा से जुड़ा नवरात्रि (Navratri Festival) का महापर्व एक साल में कुल चार बार मनाया जाता है. जिसे देवी के साधक दो बार प्रकट रूप में तो वहीं दो बार उनकी यह साधना गुप्त रूप से होती है. पंचांग के अनुसार चैत्र नवरात्रि (वसंत नवरात्रि) और आश्विन नवरात्रि (Shardiya Navratri) जो कि शरद ऋतु के प्रारंभ होते ही मनाई जाती है, उसे शक्ति के साधक बड़ी धूम-धाम के साथ मनाते हैं. वहीं आषाढ़ (Ashadha) और माघ (Magh) मास में पड़ने वाली नवरात्रि गुप्त नवरात्रि (Gupta Navratri) कहलाती है.
चैत्र और आश्विन मास की प्रकट नवरात्रि (Chaitra and Ashwin Month Naavratri)
सनातन परंपरा में प्रकट नवरात्रि का पर्व चैत्र और आश्विन मास के शुक्लपक्ष की प्रतिपदा से लेकर नवमी तिथि के बीच में मनाया जाता है. इसमें देवी दुर्गा के 09 स्वरूपों शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की विशेष साधना-आराधना की जाती है.
चैत्र नवरात्रि पर जहां नए संवत्सर की शुरुआत होती है, वहीं शारदीय नवरात्रि के महापर्व पर देवी दुर्गा द्वारा महिषासुर पर विजय पाने का उत्सव या फिर कहें बुराई पर अच्छाई की जीत का महापर्व मनाया जाता है. चैत्र नवरात्रि का पर्व वसंत ऋतु में आता है, इसलिए इसे वसंत नवरात्रि भी कहा जाता है. अमूमन मार्च-अप्रैल के बीच में मनाया जाने वाला यह महापर्व इस साल 19 मार्च 2026 से प्रारंभ होकर 27 मार्च 2026 को समाप्त होगा.
आषाढ़ एवं माघ मास की गुप्त नवरात्रि (Ashadha and Magh Month Gupt Navratri)
हिंदू धर्म में चैत्र और आश्विन मास की नवरात्रि की तरह आषाढ़ और माघ मास में भी देवी दुर्गा की पूजा से जुड़ा नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है, लेकिन इसमें देवी के 09 स्वरूपों की जगह उनसे जुड़ी 10 महाविद्या यानि मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां धूमावती, माता बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की साधना अत्यंत ही गुप्त रूप से की जाती है.
हिंदू मान्यता के अनुसार गुप्त नवरात्रि में साधक जितनी गुप्त रूप से शक्ति की साधना करता है, वह उतनी ही फलदायी होती है. आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि जून-जुलाई के बीच में तो वहीं माघ मास की गुप्त नवरात्रि जनवरी-फरवरी महीने के बीच में आती है.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)














