Rohini Vrat: आज रखा जाएगा रोहिणी व्रत, जानें क्यों रखा जाता है 3, 5 और 7 साल तक यह व्रत, शुभ मुहूर्त-महत्व

Rohini Vrat 2026: रोहिणी व्रत का संबंध रोहिणी नक्षत्र से होता है, जो हिंदू पंचांग के 27 नक्षत्रों में से एक है. यह व्रत तब रखा जाता है, जब सूर्योदय के बाद रोहिणी नक्षत्र होता है. जैन धर्म में रोहिणी व्रत का विशेष स्थान माना जाता है.

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रोहिणी व्रत पूजा विधि और शुभ मुहूर्त
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Rohini Vrat 2026: जैन धर्म में रोहिणी व्रत का विशेष स्थान माना जाता है. यह व्रत मुख्य रूप से जैन समुदाय के लोग बेहद श्रद्धा और उल्लास के साथ रखते हैं. इस साल रोहिणी व्रत आज यानी 18 को रखा जाएगा. इस दिन जैन धर्म के 12वें तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य की पूजा-अर्चना की जाती है. धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को करने से जीवन में सुख-शांति और खुशहाली आती है. यह जैन धर्म का एक महत्वपूर्ण व्रत है, जिसे खासतौर पर महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए रखती हैं. इसके साथ ही यह व्रत अनुशासन, भक्ति और आत्मशुद्धि का प्रतीक भी माना जाता है.

रोहिणी व्रत 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त

  • मुख्य व्रत तिथि- 18 मई 2026, दिन सोमवार
  • तिथि प्रारंभ- 17 मई 2026 को रात 9:43 बजे से
  • तिथि समाप्त- 18 मई 2026 को शाम 5:55 बजे तक
  • पूजा मुहूर्त- 18 मई को सुबह 08:00 बजे से 10:00 बजे तक का समय पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जा रहा है.

रोहिणी व्रत क्या है?

रोहिणी व्रत का संबंध रोहिणी नक्षत्र से होता है, जो हिंदू पंचांग के 27 नक्षत्रों में से एक है. यह व्रत तब रखा जाता है, जब सूर्योदय के बाद रोहिणी नक्षत्र होता है. मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धा और नियम से रखने से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं. गरीबी और दुख कम होते हैं और रास्ते की रुकावटें खत्म होती हैं.

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3, 5 और 7 साल तक व्रत रखने का नियम

जैन शास्त्रों और मान्यताओं के अनुसार, रोहिणी व्रत को एक या दो बार रखकर नहीं छोड़ा जाता. इसके संकल्प की एक निश्चित अवधि होती है. श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और शारीरिक क्षमता के अनुसार 3 वर्ष 5 वर्ष या अधिकतम 7 वर्ष और 5 महीने तक इस व्रत को लगातार करने का संकल्प लेते हैं.

रोहिणी व्रत पूजा विधि

  • सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर घर की सफाई करें और स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें
  • घर के पूजा स्थल को साफ कर वहां भगवान वासुपूज्य की पंचधातु, तांबा या स्वर्ण की प्रतिमा स्थापित करें
  • प्रतिमा को जल, चंदन, पुष्प, धूप, और दीप के साथ पूजा करें
  • पूजा के दौरान "ॐ ह्रीं श्री वासुपूज्य जिनेन्द्राय नम:" मंत्र का जाप करें
  • रोहिणी व्रत की कथा पढ़ें या सुनें
  • इस दिन निर्जला उपवास या एक समय फलाहार का नियम लें
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