रोहिणी व्रत जैन धर्म में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र उपवास है, जो हर महीने उस दिन रखा जाता है, जब सूर्योदय के बाद आकाश में रोहिणी नक्षत्र का प्रबल योग होता है. साल में लगभग 12-13 बार आने वाले इस व्रत का मुख्य उद्देश्य आत्मिक शुद्धि, आर्थिक समृद्धि और पारिवारिक खुशहाली की प्राप्ति है. रोहिणी व्रत जैन धर्म के 12वें तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य स्वामी को समर्पित माना जाता है. यह व्रत हर महीने रखा जाता है. आम तौर पर इसे जैन और हिंदू परंपरा की महिलाएं अपने पति और परिवार की लंबी आयु और सुख‑समृद्धि के लिए रखती हैं. चलिए आपको बताते हैं जून के महीने में रोहिणी व्रत कब रखा जाएगा, रोहिणी व्रत का महत्व और पूजा विधि.
जून 2026 रोहिणी व्रत तिथि और समय
- तिथि- 13 जून 2026 (शनिवार)
- नक्षत्र- रोहिणी नक्षत्र शुरू होने पर
रोहिणी व्रत का महत्व
रोहिणी व्रत एक प्रमुख व्रत है, जिसे महीने में एक बार रखा जाता है. इसे खासकर महिलाएं करती हैं, लेकिन कुछ पुरुष भी इसे रखते हैं. जैन समाज में इस व्रत का विशेष महत्व है. यह व्रत हर महीने रोहिणी नक्षत्र के दिन रखा जाता है. रोहिणी को चंद्र देव की प्रिय पत्नी माना जाता है. रोहिणी नक्षत्र चंद्रमा का चौथा नक्षत्र है, जो सूर्योदय के बाद प्रभावी माना जाता है. रोहिणी नक्षत्र के दिन व्रत रखना बहुत ही खास और आध्यात्मिक महत्व रखता है. ऐसा माना जाता है कि इस व्रत से व्यक्ति को मोक्ष यानी आत्मिक मुक्ति के रास्ते पर चलने की प्रेरणा मिलती है. भक्तों का विश्वास है कि नियम और श्रद्धा के साथ व्रत रखने और पूजा करने से पिछले जन्मों के बुरे कर्म धीरे‑धीरे खत्म होते हैं. इससे जीवन की परेशानियां, दुख और गरीबी कम होने लगती है.
रोहिणी व्रत पूजा विधि
सुबह जल्दी उठें- स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें.
पूजा की तैयारी- घर के मंदिर में भगवान वासुपूज्य की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें.
पूजा प्रक्रिया- भगवान वासुपूज्य को वस्त्र, फूल, फल और चंदन अर्पित करें.
मंत्र- ॐ ह्रीं श्री वासुपूज्यजिनेन्द्राय नमः मंत्र का जाप करें.
दान और नियम- इस दिन जरूरतमंदों को दान देना शुभ माना जाता है. इस दिन अन्न का त्याग किया जाता है और कुछ अनुयायी फलाहार करते हैं.
व्रत समापन- अगले दिन सूर्योदय के बाद रोहिणी नक्षत्र समाप्त होने और मार्गशीर्ष नक्षत्र लगने पर व्रत तोड़ा जाता है.
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