आरती शुरू करने से पहले और खत्म होने के बाद जरूर बोलें ये मंत्र, घर में होगा सुख-समृद्धि का वास

आरती के समय सिर्फ दीप घुमाना ही काफी नहीं माना जाता, बल्कि कुछ खास मंत्रों का जाप भी बहुत शुभ माना गया है. पूजा शुरू करने से पहले और आरती खत्म होने के बाद बोले जाने वाले ये मंत्र मन को शांति देने के साथ पूजा को पूर्ण भी मानते हैं.

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आरती के पहले और बाद में कौन सा मंत्र बोलें?
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Mantras Before and After Aarti: हिंदू धर्म में सुबह-शाम घर के मंदिर में आरती करना बहुत ही पवित्र और शुभ माना जाता है. ज्यादातर घरों में हर दिन पूजा-आरती की जाती है. आरती करते समय हर कोई पूरी तरह भगवान की भक्ति में डूब जाते हैं. अक्सर लोग सिर्फ आरती गाकर पूजा खत्म कर देते हैं. लेकिन शास्त्रों के अनुसार, आरती शुरू करने का और उसे समाप्त करने का एक खास नियम है. आरती की थाली उठाने से लेकर आरती खत्म होने के बाद तक कुछ ऐसे मंत्र हैं, जिन्हें पढ़ने से आरती का फल कई गुना बढ़ जाता है. आइए जानते हैं कि आरती के पहले और बाद में कौन से मंत्र जरूर बोलने चाहिए, ताकि घर में सुख-समृद्धि का वास हो.

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आरती शुरू करने से ठीक पहले दीपक को नमन

कई लोग सीधे कपूर या दीये की बत्ती जलाकर आरती गाना शुरू कर देते हैं. लेकिन नियम यह है कि आरती शुरू करने से पहले हमें उस दीपक (ज्योति) को प्रणाम करना चाहिए, जो हमारे घर का अंधकार दूर कर रहा है. 

दीपक मंत्र

ॐ शुभं करोति कल्याणं आरोग्यं धनसंपदः।

शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिनमोऽस्तु ते॥

इस मंत्र का अर्थ

हे दीपक की सुंदर ज्योति. आप हमारा कल्याण करें, हमें अच्छा स्वास्थ्य (आरोग्य) दें और धन-संपत्ति प्रदान करें. हमारे भीतर जो निगेटिविटी या बुरी सोच (शत्रु बुद्धि) है, उसका नाश करें. मैं आपको नमन करता हूं.

आरती खत्म होने के ठीक बाद सर्वश्रेष्ठ स्तुति 

जब आरती पूरी हो जाए, तो भगवान को याद करते हुए एक विशेष श्लोक गाया जाता है. वैसे तो यह मंत्र भगवान शिव का है, लेकिन उज्जैन के ज्योतिषियों और पुराणों के अनुसार, शिव जी सृष्टि के कर्ता-धर्ता हैं, इसलिए किसी भी देवी-देवता की आरती के बाद इसे बोलने से सभी देवी-देवता खुश हो जाते हैं.

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शिव स्तुति मंत्र

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।

सदा वसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥

इस मंत्र का अर्थ

जो कपूर जैसे बिल्कुल सफेद और पवित्र रंग वाले हैं, जो दया और करुणा के जीते-जागते अवतार हैं, जो इस पूरी दुनिया के असली सार (मालिक) हैं, जो अपने गले में सांपों को हार की तरह पहनते हैं. ऐसे भगवान शिव और माता पार्वती (भवानी), जो हमेशा मेरे दिल में रहते हैं, उनको मैं प्रणाम करता हूं.

भूल-चूक के लिए 'माफी मंत्र'

हम इंसान हैं और पूजा-पाठ के नियम कायदों में हमसे जाने-अनजाने कोई न कोई छोटी गलती जरूर हो जाती है. कभी कोई शब्द गलत छूट जाता है तो कभी सही विधि याद नहीं रहती. इसलिए आरती के अंत में भगवान से माफी मांगना जरूरी है, ताकि हमारी पूजा अधूरी न रहे. इसके लिए 'क्षमा याचना' मंत्र बोलना चाहिए. इस मंत्र को बोलने के बाद शांत मन से 'ॐ शांति:' का उच्चारण करें और फिर भगवान की परिक्रमा करें.

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क्षमा प्रार्थना मंत्र

मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं जनार्दन।

यत्पूजितं मया देव परिपूर्णं तदस्तु मे॥

इस मंत्र का अर्थ

हे प्रभु (जनार्दन). मैं न तो सही मंत्र जानता हूं, न पूजा की सही क्रिया और न ही मेरे पास वैसी सच्ची भक्ति है. फिर भी मैंने टूटे-फूटे शब्दों में जैसी भी आपकी पूजा की है, कृपया अपनी दया से उसे पूरा मान लें और मेरी गलतियों को माफ कर दें.

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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