रमज़ान में खजूर से ही क्यों खोला जाता है रोज़ा? जानिए इसका धार्मिक महत्व

Ramadan: शाम को जब सूरज ढल जाता है, तब इफ़्तार के समय रोज़ा खोला जाता है. इफ़्तार की एक खास बात यह है कि रोज़ा आमतौर पर सबसे पहले खजूर खाकर ही खोला जाता है. यह परंपरा सिर्फ एक रिवाज नहीं है, बल्कि इसका गहरा धार्मिक महत्व है. आइए जानते हैं इसके बारे में-

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खजूर से ही क्यों खोला जाता है रोज़ा?

Ramadan: इस्लाम धर्म में रमज़ान का महीना बहुत पवित्र माना जाता है. इस पूरे महीने मुस्लिम समुदाय के लोग अल्लाह की इबादत करते हैं और रोज़ा रखते हैं. रोज़े के दौरान लोग सुबह सूरज निकलने से पहले सहरी करते हैं और फिर सूरज ढलने तक कुछ भी खाते-पीते नहीं हैं. यहां तक कि दिनभर पानी पीने की भी इजाज़त नहीं होती. शाम को जब सूरज ढल जाता है, तब इफ़्तार के समय रोज़ा खोला जाता है. इफ़्तार की एक खास बात यह है कि रोज़ा आमतौर पर सबसे पहले खजूर खाकर ही खोला जाता है. इसके बाद ही पानी या दूसरी चीजें खाई जाती हैं. यह परंपरा सिर्फ एक रिवाज नहीं है, बल्कि इसका गहरा धार्मिक महत्व है. आइए जानते हैं इसके बारे में-

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खजूर से ही क्यों खोला जाता है रोज़ा?

इस्लामिक मान्यता के अनुसार, खजूर खाकर रोज़ा खोलना सुन्नत माना जाता है. सुन्नत का मतलब है पैगंबर के बताए हुए रास्ते पर चलना. माना जाता है कि Prophet Muhammad को खजूर बहुत पसंद थे और वे अपना रोज़ा भी खजूर से ही खोला करते थे. इसलिए मुस्लिम समुदाय के लोग भी उनकी परंपरा का पालन करते हुए खजूर से इफ़्तार करते हैं. इसे पैगंबर के तरीके को अपनाना माना जाता है.

कब से कब तक है रमज़ान?

रमज़ान की शुरुआत चांद दिखने के साथ होती है, क्योंकि इस्लाम में चंद्र कैलेंडर माना जाता है. इस साल 18 फरवरी को रमज़ान का चांद दिखाई दिया, जिसके बाद 19 फरवरी को पहला रोज़ा रखा गया. इस्लामी कैलेंडर में हर महीना 29 या 30 दिनों का होता है. रमज़ान के 29वें दिन ईद-उल-फितर मनाई जाती है. चांद की स्थिति के अनुसार इस बार मीठी ईद 20 या 21 मार्च 2026 को मनाई जा सकती है.

ईद-उल-फितर के दिन लोग सुबह नमाज़ अदा करते हैं और फिर एक-दूसरे को गले लगाकर मुबारकबाद देते हैं. यह खुशी, भाईचारे और एकता का त्योहार है.

धार्मिक महत्व के साथ-साथ खजूर का स्वास्थ्य से भी संबंध माना जाता है. दिनभर भूखा-प्यासा रहने के बाद शरीर को तुरंत ऊर्जा की जरूरत होती है. ऐसे में खजूर हल्का और मीठा फल होने के कारण जल्दी ताकत देने में मदद करता है. इसलिए लंबे समय तक रोज़ा रखने के बाद खजूर से शुरुआत करना फायदेमंद माना जाता है.

इस तरह खजूर सिर्फ एक फल नहीं, बल्कि रमज़ान की परंपरा और आस्था का अहम हिस्सा है. यह धार्मिक भावना, अनुशासन और पैगंबर की सुन्नत का प्रतीक माना जाता है.

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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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