रमज़ान में जकात कैसे निकालें? जानें क्या होती है जकात और इसे कैसे कैलकुलेट करें

What is the formula to calculate Zakat: वैसे तो जकात साल में कभी भी दी जा सकती है, लेकिन रमज़ान में इसे अदा करने का सवाब ज्यादा माना जा

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रमज़ान में जकात कैसे निकालें?

What is the formula to calculate Zakat: रमज़ान का महीना इबादत, सब्र और दूसरों की मदद का पैगाम देता है. इस पवित्र महीने में मुसलमान रोज़ा रखते हैं, नमाज़ पढ़ते हैं और जरूरतमंदों की सहायता करते हैं. इन्हीं नेक कामों में एक अहम फर्ज है- जकात देना. हालांकि, बहुत से लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि जकात क्या है और इसे सही तरीके से कैसे निकाला जाए. आइए जानते हैं इस बारे में- 

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क्या होती है जकात?

जकात इस्लाम के पांच बुनियादी स्तंभों में से एक है. यह हर उस मुसलमान पर फर्ज है जिसकी संपत्ति एक तय सीमा से अधिक हो जाती है. इस सीमा को 'निसाब' कहा जाता है. जकात का मकसद सिर्फ दान देना नहीं है, बल्कि अपनी कमाई को पाक करना और समाज में जरूरतमंद लोगों तक मदद पहुंचाना भी है. अब, वैसे तो जकात साल में कभी भी दी जा सकती है, लेकिन रमज़ान में इसे अदा करने का सवाब ज्यादा माना जाता है.

निसाब क्या है?

निसाब वह न्यूनतम रकम या संपत्ति है, जिसके ऊपर जकात देना जरूरी हो जाता है. इसकी गणना सोने या चांदी की कीमत के आधार पर की जाती है. निसाब लगभग 87.48 ग्राम सोना या 612.36 ग्राम चांदी के बराबर होता है. अगर किसी व्यक्ति की कुल जकात योग्य संपत्ति एक साल तक इस सीमा से ऊपर रहती है, तो उस पर जकात देना फर्ज हो जाता है.

किन चीजों पर जकात लगती है? 

केवल नकद बचत ही नहीं, बल्कि बैंक बैलेंस, घर में रखी रकम, सोना-चांदी, व्यापार का सामान, निवेश से हुआ मुनाफा, किराये से बची रकम और वह पैसा जो किसी से वापस मिलना हो- ये सब जकात में शामिल होते हैं. लेकिन रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली चीजें जैसे- घर, गाड़ी, कपड़े या घरेलू सामान पर जकात नहीं लगती.

जकात कैसे निकालें?

जकात निकालने का तरीका बहुत आसान है. सबसे पहले अपनी सारी जकात योग्य संपत्ति जोड़ लें. फिर जो कर्ज या बिल एक साल के अंदर चुकाने हैं, उन्हें घटा दें. जो रकम बचेगी, उसका 2.5 प्रतिशत जकात के रूप में देना होगा. जैसे- अगर आपकी शुद्ध संपत्ति 5 लाख रुपये है, तो 12,500 रुपये जकात बनती है.

किस तारीख को देनी होती है जकात?

जकात देने की तारीख इस बात पर निर्भर करती है कि आपकी संपत्ति कब पहली बार निसाब से ऊपर पहुंची थी. उसी तारीख को हर साल जकात देनी चाहिए.

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जकात गरीबों, जरूरतमंदों, कर्जदारों और मुसाफिरों को दी जा सकती है. हालांकि माता-पिता या बच्चों को जकात नहीं दी जा सकती, क्योंकि उनकी जिम्मेदारी पहले से आप पर होती है.

सही तरीके से जकात अदा करना न सिर्फ धार्मिक कर्तव्य है, बल्कि दिल को सुकून देने वाला अमल भी है.

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