राधा अष्टमी का व्रत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को पड़ता है. राधा अष्टमी का व्रत राधारानी की कृपा पाने और प्रेम, सुख-समृद्धि की कामना के लिए बेहद शुभ माना जाता है. आज राधा अष्टमी व्रत रखा गया है. इस दिन सुबह जल्दी स्नान करके राधा-कृष्ण की पूजा का संकल्प लिया जाता है और दोपहर के शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से पूजा व कथा संपन्न की जाती है. अगर, आपने राधा अष्टमी की व्रत रखा तो आपको व्रत का पारण करने का सही नियम और पूजा विधि की जानकारी होनी चाहिए. चलिए आपको बताते हैं राधा अष्टमी का पारण कब करना चाहिए. राधा अष्टमी व्रत खोलने का सही समय और नियम क्या है.
राधा अष्टमी व्रत का पारण कब करें?
राधा अष्टमी व्रत के पारण को लेकर अलग-अलग क्षेत्रों और संप्रदायों में कुछ अंतर देखने को मिलता है. कई धार्मिक परंपराओं में राधा अष्टमी का व्रत पूरे दिन रखने के बाद अगले दिन नवमी तिथि में सूर्योदय के बाद पारण करने की परंपरा है. मान्यताओं के अनुसार, इस साल 20 सितंबर यानी रविवार को सुबह 6:08 बजे के बाद व्रत खोलना सबसे उत्तम रहेगा. हालांकि, कुछ परिवारों और वैष्णव परंपराओं में दोपहर की पूजा के बाद फलाहार या व्रत खोलने की अलग रीति भी प्रचलित है.
राधा अष्टमी के दिन क्या खाएं क्या न खाएं
राधा अष्टमी के दिन अगर आपने व्रत रखा है, तो व्रत के दौरान आप फल, दूध, और मेवे यानी ड्राई फ्रूट्स का सेवन कर सकते हैं. इसके अलावा कुट्टू या सिंघाड़े के आटे का फलाहार या सेंधा नमक का उपयोग कर सकते हैं. दोपहर में पूजा के बाद पंचामृत या चरणामृत ग्रहण करके व्रत का पारण किया जा सकता है. वहीं, व्रत के दौरान सामान्य अन्न, दाल, चावल और साधारण नमक का सेवन न करें. प्याज, लहसुन, मांसाहारी भोजन और मदिरा का सेवन भी नहीं करें.
राधा अष्टमी व्रत पूजा विधि
स्नान व संकल्प- सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें.
वेदी सजावट- पूजा स्थल को साफ करके राधा-कृष्ण की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें.
अभिषेक व श्रृंगार- अगर संभव हो, तो पंचामृत से राधा-कृष्ण का अभिषेक करें और उन्हें सुंदर वस्त्र व फूलों से सजाएं.
भोग अर्पण- भगवान को फल, खीर, मालपुआ, माखन-मिश्री या सात्विक मिठाइयों का भोग लगाएं. भोग में तुलसी जरूर शामिल करें.
कथा और आरती- राधा अष्टमी की व्रत कथा सुनें या पढ़ें और अंत में राधा रानी व श्री कृष्ण की आरती करें.
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