Pearl Gemstone: ज्योतिष शास्त्र में मोती रत्न का विशेष महत्व माना गया है. यह रत्न चंद्रमा से जुड़ा होता है, जो मन, भावनाओं और मानसिक स्थिति का कारक ग्रह है. ज्योतिषाचार्य डॉक्टर गौरव कुमार दीक्षित बताते हैं, मोती पहनने से व्यक्ति को मानसिक शांति मिलती है और उसका मन स्थिर रहता है. जिन लोगों को अत्यधिक गुस्सा आता है, तनाव रहता है या जीवन में कलह-कलैश ज्यादा होता है, उनके लिए मोती बेहद लाभकारी माना जाता है. इसके अलावा यह शीत से संबंधित रोगों में भी राहत देने वाला माना गया है. आइए ज्योतिषाचार्य से जानें मोती रत्न पहनने के नियम-
किन लोगों को पहनना चाहिए मोती?
गौरव कुमार दीक्षित के अनुसार, कर्क राशि के जातकों के लिए मोती धारण करना सबसे शुभ होता है, क्योंकि इस राशि का स्वामी चंद्रमा है. ऐसे लोगों को मोती पहनने से मानसिक संतुलन, आत्मविश्वास और सुख-शांति प्राप्त होती है. हालांकि, सभी लोगों के लिए यह रत्न उपयुक्त नहीं होता. जिन लोगों की कुंडली में मिथुन, कुंभ, मकर या तुला लग्न होता है, उन्हें मोती पहनने से पहले किसी विशेषज्ञ से सलाह जरूर लेनी चाहिए.
कुछ स्थितियों में मोती पहनना नुकसानदायक भी हो सकता है. जिन जातकों की कुंडली में चंद्रमा छठे, आठवें या बारहवें भाव में स्थित हो, या चंद्रमा नीच राशि में हो, उन्हें मोती नहीं पहनना चाहिए. इसके अलावा वृश्चिक राशि के जातकों को भी मोती धारण करने से बचना चाहिए, क्योंकि यह उनके लिए शुभ परिणाम नहीं देता.
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ज्योतिषाचार्य आगे बताते हैं, मोती पहनने के लिए सही विधि का पालन करना बहुत जरूरी है, तभी इसका पूरा लाभ मिलता है.
- मोती को हमेशा सोमवार के दिन धारण करना चाहिए.
- इसे शुक्ल पक्ष में पहनना अधिक शुभ माना जाता है.
- मोती को चांदी की अंगूठी में जड़वाना चाहिए.
- इसे दाएं हाथ की सबसे छोटी उंगली (कनिष्ठा) में पहनना चाहिए.
मोती को पहनने से पहले उसे शुद्ध करना जरूरी होता है. इसके लिए अंगूठी को गंगाजल या कच्चे दूध में कुछ समय के लिए रखें और फिर साफ पानी से धो लें. इसके बाद श्रद्धा के साथ इसे धारण करें.
ज्योतिषाचार्य कहते हैं, मोती रत्न एक शक्तिशाली और प्रभावशाली रत्न माना जाता है, लेकिन इसे पहनने से पहले अपनी कुंडली की जांच जरूर करानी चाहिए. सही तरीके और सही समय पर धारण करने से यह जीवन में शांति, संतुलन और सकारात्मकता लाने में मदद करता है.














