Parshuram Jayanti Kab Hai: हिंदू धर्म में भगवान परशुराम जयंती का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है. इस दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम जी की पूजा करने का विधान है. धार्मिक शास्त्रों के अनुसार परशुराम जी का जन्म अक्षय तृतीया पर हुआ था. इसी दिन भक्त व्रत रखते हैं, पूजा करते हैं और भगवान परशुराम से सुख‑समृद्धि का आशीर्वाद मांगते हैं. इसी कड़ी में आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि इस साल परशुराम जयंती कब मनाई जाएगी और पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है…
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कब है भगवान परशुराम जयंती?
परशुराम जयंती का पर्व हर साल वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर मनाया जाता है. वैदिक पंचांग के अनुसार वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया की शुरुआत 19 अप्रैल को सुबह 10 बजकर 49 मिनट पर होगी. वहीं, इसका समापन 20 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 27 मिनट पर होगा. ऐसे में भगवान परशुराम जयंती का पर्व 19 अप्रैल को मनाया जाएगा.
क्या है पूजा का शुभ मुहूर्त?
परशुराम जयंती पर पूजा के दो शुभ मुहूर्त हैं. 19 अप्रैल को पहला मुहूर्त सुबह 7 बजकर 29 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 20 मिनट तक है. वहीं, दूसरा मुहूर्त शाम को 6 बजकर 49 मिनट से लेकर रात 10 बजकर 57 मिनट तक है. आप इन दो मुहूर्त की अवधि में भगवान परशुराम की विधि-विधान से पूजा कर सकते हैं.
परशुराम जयंती पर करें भगवान परशुराम की आरती
ॐ जय परशुधारी,स्वामी जय परशुधारी। सुर नर मुनिजन सेवत,श्रीपति अवतारी॥
ॐ जय परशुधारी...
जमदग्नी सुत नर-सिंह,मां रेणुका जाया। मार्तण्ड भृगु वंशज,त्रिभुवन यश छाया॥
ॐ जय परशुधारी...
कांधे सूत्र जनेऊ,गल रुद्राक्ष माला। चरण खड़ाऊँ शोभे,तिलक त्रिपुण्ड भाला॥
ॐ जय परशुधारी...
ताम्र श्याम घन केशा,शीश जटा बांधी। सुजन हेतु ऋतु मधुमय,दुष्ट दलन आंधी॥
ॐ जय परशुधारी...
मुख रवि तेज विराजत,रक्त वर्ण नैना। दीन-हीन गो विप्रन,रक्षक दिन रैना॥
ॐ जय परशुधारी...
कर शोभित बर परशु,निगमागम ज्ञाता। कंध चाप-शर वैष्णव,ब्राह्मण कुल त्राता॥
ॐ जय परशुधारी...
माता पिता तुम स्वामी,मीत सखा मेरे। मेरी बिरद संभारो,द्वार पड़ा मैं तेरे॥
ॐ जय परशुधारी...
अजर-अमर श्री परशुराम की,आरती जो गावे। 'पूर्णेन्दु' शिव साखि,सुख सम्पति पावे॥
ॐ जय परशुधारी...
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.














