Meen Sankranti 2026: मीन संक्रांति पर भक्‍त करें यह कार्य, सूर्य देवता का म‍िलेगा आशीर्वाद

Surya Dev blessings : धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन से खरमास की शुरुआत भी हो जाती है. इस अवधि में पूजा-पाठ, जप और दान जैसे धार्मिक कार्यों का विशेष महत्व बताया गया है.

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मीन संक्रांति के दिन सुबह स्नान करके सूर्य देव को जल अर्पित करना चाहिए.

Meen Sankranti 2026:  हिंदू पंचांग के अनुसार जब सूर्य एक राशि से निकलकर दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं, तो उसे संक्रांति कहा जाता है. इसी क्रम में सूर्य जब  कुंभ राशि से मीन राशि में प्रवेश करते हैं, तो मीन संक्रांति मनाई जाती है. पंचांग के अनुसार इस साल सूर्य 14 मार्च की रात करीब 8:38 बजे मीन राशि में प्रवेश करेंगे. चूंकि यह संक्रांति शाम के बाद पड़ रही है, इसलिए मीन संक्रांति से जुड़े स्नान-दान और धार्मिक कार्य 15 मार्च को करना शुभ माना गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन से खरमास की शुरुआत भी हो जाती है. इस अवधि में पूजा-पाठ, जप और दान जैसे धार्मिक कार्यों का विशेष महत्व बताया गया है, जबकि विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्य करने से परहेज करने की सलाह दी जाती है. इसलिए मीन संक्रांति को धर्म और ज्योतिष दोनों दृष्टियों से खास माना जाता है.

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मीन संक्रांति का धार्मिक महत्व
सनातन संस्कृति में संक्रांति को विशेष महत्व दिया गया है. माना जाता है कि इस दिन सूर्य देव की पूजा, स्नान-दान और आध्यात्मिक साधना करने से पुण्य मिलता है. मीन संक्रांति के साथ शुरू होने वाले खरमास के दौरान भक्ति, जप-तप और दान को विशेष फलदायी माना जाता है.

इस दिन क्या करना शुभ माना जाता है
मीन संक्रांति के दिन सुबह स्नान करके सूर्य देव को जल अर्पित करना चाहिए. इस दिन भगवान विष्णु या सूर्य देव की पूजा करने, जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र या धन का दान देने और जप-तप, पाठ जैसे धार्मिक कार्य करना भी शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इन कार्यों को करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है और पुण्य की प्राप्ति होती है.
 

खरमास में क्यों टाले जाते हैं शुभ कार्य
मीन संक्रांति के साथ शुरू होने वाले खरमास के दौरान विवाह, गृह प्रवेश, सगाई या नया व्यवसाय शुरू करने जैसे मांगलिक कार्य करने से बचने की सलाह दी जाती है. माना जाता है कि इस अवधि में किए गए शुभ कार्यों में बाधाएं आ सकती हैं.
धार्मिक दृष्टि से यह समय आध्यात्मिक साधना, पूजा-पाठ और दान-पुण्य के लिए ज्यादा उपयुक्त माना जाता है. लगभग एक महीने तक चलने वाला यह काल सूर्य के मेष राशि में प्रवेश करने के साथ समाप्त होता है.

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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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