रथ सप्तमी आज, माघ शुक्ल सप्तमी पर सूर्य देव और मां नर्मदा की होती है पूजा, इस तरह करें अर्चना

रथ सप्तमी के दिन क्या उपाय करने चाहिए? इस साल रथ सप्तमी रविवार को पड़ रही है, जिससे इसका धार्मिक महत्व और बढ़ गया है. रविवार सूर्य देव को समर्पित दिन माना जाता है और सप्तमी तिथि भी सूर्य से जुड़ी होती है.

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रथ सप्तमी के दिन किस देवता की पूजा की जाती है?

Maagh Shukla Saptami  : 25 जनवरी का दिन इस बार धार्मिक रूप से विशेष माना जा रहा है.  इस दिन माघ महीने की शुक्ल पक्ष की सप्तमी को रथ सप्तमी आ रही है. इसी दिन रथ सप्तमी और नर्मदा जयंती मनाई जाती है. धार्मिक मान्यताओं में यह तिथि सूर्य देव और मां नर्मदा दोनों की आराधना से जुड़ी मानी जाती है, इसलिए इसका महत्व खास माना गया है. रथ सप्तमी को लेकर मान्यता है कि इसी दिन सूर्य देव अपने रथ पर सवार होकर उत्तर दिशा की ओर यात्रा शुरू करते हैं. इस वजह से यह तिथि सूर्य पूजा के लिए बेहद शुभ मानी जाती है. माना जाता है कि रथ सप्तमी के बाद मौसम में बदलाव शुरू होता है और ठंड का असर धीरे-धीरे कम होने लगता है. इसी कारण यह पर्व ऋतु परिवर्तन का संकेत भी माना जाता है.

इस साल रथ सप्तमी रविवार को पड़ रही है, जिससे इसका धार्मिक महत्व और बढ़ गया है. रविवार सूर्य देव को समर्पित दिन माना जाता है और सप्तमी तिथि भी सूर्य से जुड़ी होती है. ऐसे में यह संयोग विशेष फल देने वाला माना जा रहा है. धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन सूर्य देव के साथ मां नर्मदा की पूजा करने से अक्षय पुण्य प्राप्त होता है, यानी ऐसा पुण्य जिसका प्रभाव लंबे समय तक बना रहता है.

मान्यता है कि रथ सप्तमी के दिन पूजा के साथ दान-पुण्य जरूर करना चाहिए. इससे कुंडली में मौजूद ग्रह दोषों में कमी आती है और जीवन में सुख-समृद्धि के योग बनते हैं. जिन लोगों के लिए नर्मदा नदी के तट तक पहुंचना संभव नहीं है, वे घर पर ही मां नर्मदा का ध्यान करते हुए पूजा कर सकते हैं.


नर्मदा नदी क्यों मानी जाती है इतनी पवित्र


धार्मिक ग्रंथों में नर्मदा नदी को अत्यंत पवित्र बताया गया है. मान्यता है कि मां नर्मदा की उत्पत्ति भगवान शिव के पसीने की बूंदों से हुई थी, इसी कारण उन्हें शिव की पुत्री कहा जाता है. नर्मदा को रेवा नाम से भी जाना जाता है और स्कंद पुराण में इसका विस्तार से वर्णन मिलता है.

नर्मदा नदी का उद्गम मध्य प्रदेश के अमरकंटक पर्वत से होता है. मैकल पर्वत श्रृंखला का हिस्सा है, इसी कारण नर्मदा को मैकलसुता भी कहा जाता है. यह नदी मध्य प्रदेश के अमरकंटक पर्वत से निकलकर करीब 1300 किलोमीटर का सफर तय करती है और अंत में गुजरात की खंभात खाड़ी के जरिए अरब सागर में समाहित हो जाती है.

नर्मदा को बेहद पवित्र नदी माने जाने के कारण इसकी परिक्रमा की परंपरा भी काफी प्रचलित है. मान्यता है कि नर्मदा की परिक्रमा करने से पाप नष्ट होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है. स्कंद पुराण में यह भी उल्लेख मिलता है कि प्रलय काल में भी नर्मदा नदी बनी रहेगी. वहीं मत्स्य पुराण के अनुसार नर्मदा के दर्शन मात्र से ही जीवन में शुद्धता और सकारात्मकता आती है.

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रथ सप्तमी पर सूर्य देव की पूजा का तरीका


रथ सप्तमी के दिन सूर्योदय से पहले स्नान करना शुभ माना जाता है. इसके बाद तांबे के लोटे में जल भरकर उसमें लाल फूल, चावल और रोली या कुमकुम मिलाएं. फिर पूर्व दिशा की ओर मुख करके उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करें.

अर्घ्य देते समय ऊँ सूर्याय नमः मंत्र का जाप करें. इस मंत्र का 108 बार जप करना विशेष फलदायी माना जाता है. सूर्य को अर्घ्य देने से धार्मिक लाभ के साथ स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों में भी राहत मिलती है. मान्यता है कि सूर्य पूजा से आत्मविश्वास बढ़ता है. इस दिन गुड़, गेहूं या लाल वस्त्र का दान भी किया जा सकता है.
 

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इस शुभ योग में क्या करें और क्या न करें


रथ सप्तमी के दिन पूजा के बाद दान को विशेष महत्व दिया गया है. इस दिन गौशाला जाकर गायों को हरी घास खिलाना शुभ माना जाता है. अपनी क्षमता के अनुसार धन, अन्न, वस्त्र या भोजन का दान भी किया जा सकता है. मंदिर में धूप, दीप, फूल या प्रसाद अर्पित करना भी पुण्यकारी माना गया है. इससे घर में सुख-शांति बनी रहती है.

इसके साथ ही इस दिन भगवान शिव की पूजा भी की जाती है, क्योंकि मां नर्मदा को शिव जी की पुत्री माना जाता है. शिवलिंग पर जल चढ़ाकर ऊँ नमः शिवाय मंत्र का 108 बार जाप करें. बेलपत्र, धतूरा और जनेऊ अर्पित करें. अंत में चंदन से तिलक कर धूप-दीप जलाएं और आरती करें. भोग में आप कोई भी फल या मिठाई जो चाहें अर्पित कर सकते हैं.

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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